नहीं रहे 'जगत मामा' पूर्णाराम छोड़ : स्कूलों में जाकर बांटे थे ₹ 4 करोड़, 300 बीघा जमीन भी की थी दान
नागौर, 21 जनवरी। राजस्थान में 'जगत मामा' के नाम से मशहूर पूर्णाराम छोड़ इस जहां से रुखसत हो गए, मगर वे लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। वजह ये है कि जगत मामा इस जगत अपना नाम करके गए हैं।

पूर्णाराम छोड़ उर्फ जगत मामा
हम बात कर रहे हैं कि राजस्थान के नागौर जिले के जायल तहसील के गांव राजोद निवासी पूर्णाराम छोड़ की। इन्होंने 90 साल की उम्र में गुरुवार को अंतिम सांस ली। इनका निधन गांव रामपुरा में अपनी बहन हस्ती देवी के घर हुआ।

समाज सेवा में खपाया जीवन
पूर्णाराम छोड़ वो शख्स थे जिन्होंने समाज सेवा में अपना जीवन खपा दिया। ताउम्र अविवाहित रहे और स्कूलों में जाकर ईनाम व शिक्षण सामग्री के रूप में चार करोड़ रुपए बांट दिए। यही नहीं बल्कि तीन सौ बीघा जमीन भी स्कूल, ट्रस्ट व गोशाला के लिए दान कर दी।

दिल के अमीर थे पूर्णाराम छोड़
बता दें कि आज के जमाने में जहां लोगों में पाई-पाई जोड़ने की होड़ लगी हुई है। वहीं, जगत मामा के पैसा बांटने की धुन सी लगी रहती थी। सिर पर दूधिया रंग का साफा, खाकी फटी सी धोती और नोटों से भरा थैला जब अपने हाथ में थामे जगत मामा लाठी के सहारे तेजी से चलते थे तो एक अत्यंत साधारण व्यक्ति लगते थे, लेकिन दिल के वे बहुत अमीर व प्यार के सागर से भरे हुए थे।

जरूरतमंद व प्रतिभावान छात्रों की परख थी
नागौर जिले के लोग बताते हैं कि जगत मामा जिस भी स्कूल में दाखिल होते वहां कुछ ना कुछ दान जरूर करते। खास बात ये भी है कि जगत मामा को स्कूलों में जरूरतमंद व प्रतिभावान छात्रों की परख थी। ये खुद से अपनी मर्जी से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी आर्थिक मदद करते थे। लोग इन्हें दानवीर कर्ण व जगत मामा के नाम से पुकारते थे।












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