Rajasthan News: जयपुर में 400 साल पुराना, मोती डूंगरी गणेश मंदिर, नेताओं के लिए क्यों है खास,जानना जरूरी है
Rajasthan Moti Dungari Ganesh Mandir: राजस्थान में चुनाव कोई सा भी हो, नगर निकाय से लेकर पंचायती राज या फिल विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव,नेताओं के लिए सबसे खास है यह गणेश मंदिर ।
उत्तर प्रदेश से शुरू होने वाली देश की सियासत से लेकर बिहार और फिर राजस्थान के रास्ते ही दिल्ली तक हर छोटे से बड़ा नेता बिना पिंक सिटी जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर के नहीं पहुंचे है।

आज हम आपकों राजस्थान के एक ऐसे गणेश मंदिर के सियासी किस्सों की हकीकत से रूबरू करवाएंगे कि आप पढ़कर यह जरूर सोचेंगे कि चलों इस बार दर्शन कर आते है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर प्रदेश में बनने वाले अब तक सभी राजनैतिक दलों के तमाम मुख्यमंत्री, मंत्री,विधायक, महापौर और यहां के पार्षद तक भी सियासी पारी शुरू करने से पहले इनके दर जरूर ढोल लगाते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो विधायक का टिकट मिलने से पहले भी यहीं आकर मन्नत मांगी थी। इतना नहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हो या फिर वसुंधरा राजे,यहां तक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने भी आकर कामना की थी।
कहा जाता है कि मोती डूंगरी के दर्शन कर मांगी जाने वाली हर मनोकामना पूरी होती है। और यहीं नतीजा है कि हर सपेदफोश अपनी सियासत चमकाने के लिए साल में एक बार नहीं कई बार यानी बार-बार आता है।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास
वैसे तो यह मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक मोती डूंगरी मंदिर जयपुर की एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है।
करीब 2 किमी के क्षेत्र में फैला हुए इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। पुष्य नक्षत्र में मोती डूंगरी मंदिर में भगवान गणेश का 151 किलो दूध से अभिषेक जाता है। साथ ही दही, बुरा, शहद, जल से भी अभिषेक किया जाता है।
अभिषेक के बाद फूल बंगले में भगवान गणेश को विराजमान करके खीर का विशेष भोग लगाया जाता है। एक छोटी पहाड़ी पर स्थित मोती डूंगरी मंदिर सिर्फ जिलेभर ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना बताया जाता है और सेठ जयराम पल्लीवाल के निरीक्षण में इसका निर्माण 1761 में किया गया। तीन गुंबदों से सुशोभित मोती डूंगरी मंदिर भारत में तीन प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करता है।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में जटिल पत्थर की नक्काशी के साथ ही संगमरमर पर बनाई गई पौराणिक छवियां अपने उत्कृष्ट अक्षांश के लिए जानी जाती है।
इसी के कारण मंदिर की शोभा और भी अधिक बढ़ जाती है और यहां आने वाले धर्मप्रेमी बंधुओं को यह अपनी ओर आकर्षित करती है। कला प्रेमी श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर पिंक शहर जयपुर के सबसे आकर्षक मंदिरों में से एक कहा जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक ओर बात जो कि पुराने लोगों द्वारा आज भी कही जाती है कि मेवाड़ के राजा एक बार भगवान गणेश की मूर्ति के साथ यात्रा से लौट रहे थे। तब उन्होंने यह निश्चय किया की उनकी बैलगाड़ी को जहां भी रोका जाएगा उसी जगह पर गणेश मंदिर की स्थापना की जाएगी।
गाड़ी डूंगरी पहाड़ी के नीचे आकर रुकी और उसके बाद मेवाड़ के राजा और सेठ जयराम पल्लीवाल के निरीक्षण में इसका निर्माण किया गया।
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर जिले के सबसे बड़े गणेश मंदिरों में से एक है और रोजाना यहां हजारों भक्त भगवान गणेश के दर्शन को आते है।
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान गणेश बुध के देवता है इसलिए हर बुधवार को यहां भक्तों का तांता लगा रहता है और हर साल करीब सवा लाख लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते है।
मंदिर में इस दौरान भक्तों का तांता लगा हुआ है और भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए दूर-दूर से मन्नत मांगने आ रहे है. भक्तों के लिए प्रतिदिन सुबह 5 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और शाम 4:30 बजे से 9:30 तक द्वार खुले रहते है. वहीं प्रवेश के लिए किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है.












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