GROUND REPORT: ईसरदा बांध में डूब क्षेत्र में बनेठा की मालियों की ढाणी के ग्रामीणों की पीड़ा, अनदेखा दर्द !
RAJASTHAN ISHARDA DAM NEWS: राजस्थान के टोंक-सवाईमाधोपुर जिले की बॉर्डर पर ईसरदा बांध का निर्माण कार्य कई सालों से चल रहा है। इस बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले किसानों, परिवारों को विस्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है लेकिन सरकारी महकमों के अधिकारियों की कारस्तानी से ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा है।
वन इंडिया हिंदी की टीम ने ईसरदा बांध के प्रभावित बनेठा के मालियों की ढ़ाणी में पहुंची उनकी पीड़ा जानने की कोशिश की। जहां ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को दो टूक शब्दों कहा कि उनकों पूरा मुआवजा दिया जाए साथ ही पुर्नवासित कॉलोनी में सुविधा मुहाल हो।
ग्रामीणों ने तो यहां तक कहां सरकार के विभागीय अधिकारियों ने किसानों के साथ दोहरा व्यवहार अपनाया है किसी को सिंचित जमीनों का मुआवजा दे दिया, किसी को सिंचित जमीनों में भी असिंचित जमीन का मुआवजा दे रहे है।

दरअसल यह मालियों की ढाणी ईसरदा बांध के बिल्कुल किनारे पर बसी हुई है। इस ढाणी में 30 से 40 परिवार निवास कर रहे है। इनके कई बच्चे स्कूल में, कॉलेज शिक्षा में अध्ययनरत है। लेकिन अब डूब क्षेत्र में आने के बाद परिजन, ग्रामीण, किसान और स्थानीय लोग परेशान और चिंतित नजर आ रहे है।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत करते हुए ग्रामीण गोपी ने बताया कि हमसे सरकार और प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे किए लेकिन अब तक कोई मुआवजा राशि नहीं दी गई है। अब तक ना तो मकान का मुआवजा दिया गया है। ना ही जमीनों का पूरा मुआवजा दिया गया है।
सरकारी अधिकारियों ने बड़ी मनमानी करते हुए किसी किसान को तो सिंचित जमीन का मुआवजा दे दिया, किसी को जमीन असिंचित बताकर मुआवजा दे रहे है। कई बार शिकायतें की लेकिन कोई सुध नहीं ले रहे है।
किसान नेता रामेश्वर चौधरी ने बताया कि 1976 से पहले की जमीनों को तो सिंचित बता दिया गया लेकिन इसके बाद की जमीन को असिंचित बता रहे है। लेकिन यह तमाम जमीनें सिंचित है। यहां पर कई फसले होती है। जिनमे सौंप, जीरा, खीरा, ककड़ी सहित कई सब्जियां और फसले होती है लेकिन अधिकारी लापरवाही बरत रहे है।
वहीं ढाणी की महिलाओं ने पीड़ा सुनाते हुए कहा कि हम कई पीढ़ियों से यहां रह रहे है। सालों से हमारे परिवार यहां रहकर जिंदगी बिता रहे है। पहले टोंक जिले में बिसलपुर बांध बनाया जा चुका है और अब ईसरदा बांध बनाया जा रहा है। ना तो ईसरदा रख दिया लेकिन जमीनें वहीं टोंक जिले की छीनी जा रही है।
ना तो हमें जमीन का पूरा मुआवजा दिया गया, ना मकानों का मिला, ना मवेशियों का मुआवजा दे रहे है। वहीं एक 9 वीं कक्षा की छात्रा ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि हमें पूरा मुआवजा दिजिए, जहां पुर्नवास दे रहे है वहां पर स्कूल और आंगनबाड़ी सहित सुविधाएं मुहाल करवाइए।
अब ग्रामीणों के साथ महिलाओं ने सरकार को यह अल्टीमेटम भी दिया है कि अगर उन्हे पूरा मुआवजा समय पर नहीं दिया गया तो फिर जलभराव के दौरान भी वो यहां से बाहर नहीं निकलेंगे फिर चाहे जान देनी पड़े।
किसानों के इस अल्टीमेटम के बाद कई सवाल खड़े हो रहे है कि आखिर क्यों इन किसानों की मांगों और समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।












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