Ground Report: राजस्थान में दूसरे चरण की 13 सीटों का सियासी गणित, वोट प्रतिशत से समझिए किसका पलड़ा भारी
Lok Sabha Chunav: राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर दो अलग अलग चरणों में मतदान पूरा हो गया है। भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलो और निर्दलीय प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। अब 4 जून को परिणामों का इंतजार है।
राजस्थान में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में शुक्रवार को 13 सीटों पर हुए मतदान के बाद अब फाइनल आंकड़ा 64.56% फीसदी आ गया है। दूसरे चरण में हुआ मतदान पहले चरण से करीब 6 फीसदी ज्यादा है।

अब अगर प्रदेश की सभी 25 सीटों की बात करें तो मतदान 61.60 प्रतिशत रहा, जो पिछले 2019 के चुनाव के 67.75 प्रतिशत से 5.11 फीसदी कम है।
राजस्थान में पहले चरण में 12 सीटों पर 57.87 फीसदी मतदान हुआ था और जारी हुए आंकड़े भी दिलचस्प है कि साल 2019 में लोकसभा चुनाव में पहले चरण की 13 सीटों पर 29 अप्रैल को 68.22 प्रतिशत वोटिंग हुई।
6 मई को दूसरे चरण की 12 सीटों पर 63.78 प्रतिशत मतदान रहा। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए कुल 66.12 प्रतिशत वोटिंग हुई। 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश में 25 सीटों पर 63.10 वोटिंग हुई थी।
राजस्थान के बाड़मेर में सबसे ज्यादा वोटिंग
राजस्थान में दूसरे चरण का जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालोर, राजसमंद, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा, टोंक-सवाई माधोपुर, कोटा, झालावाड़-बारां सीट पर मतदान हुआ।
अब इन सभी लोकसभा सीटों की बात करें तो सबसे रौचक चुनाव बाड़मेर-जैसलमेर और बांसवाड़ा डूंगरपुर में हुआ है। बाड़मेर सीट पर सबसे ज्यादा 74.25 फीसदी वोट डाले गए है। माना जा रहा है कि इसकी सबसे बड़ी वजह त्रिकोणीय मुकाबला था। जो मतदान के दिन तक आते आते कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार की सीधी टक्कर में तब्दील हो गया ।
मुसलमान वोटर करेगा तकदीर का फैसला
बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र सिंह भाटी और कांग्रेस के उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। चर्चा है कि भाजपा के प्रत्याशी केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी मतदान के दिन तक आते-आते पिछड़े हुए दिखाई दिए हैं।
इस सीट पर एक-एक वोट के लिए संघर्ष हुआ, लेकिन ग्राउंड पर जो दिखा उससे साफ है कि 'पार्टियों' से ज्यादा इस सीट पर 'जाति' का चुनाव हुआ है। जाट राजपूत वोट बैंक में सेंधमारी के अलावा इस सीट पर मुसलमान एक बड़ा डिसाइडेड फैक्टर नजर आ रहा है।
बांसवाड़ा पर क्या होगा ?
राजस्थान में आदिवासी इलाके की बांसवाड़ा लोकसभा सीट पर भी रविंद्र सिंह भाटी की तरह राजकुमार रोत के रूप में नए राजनीतिक खिलाड़ी का उदय हुआ है।
बांसवाड़ा सीट पर 72.77 फीसदी मतदान हुआ। इसकी वजह बाप पार्टी के रोत और भाजपा में महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बीच सीधा मुकाबला होने की चर्चा है।
कांग्रेस का यहां बीएपी पार्टी से गठबंधन होने के बाद भी उनका प्रत्याशी अरविंद डामोर चुनावी मैदान में डटे रहना भी हैरानी भरा रहा। यहां के लोगों का मानना है कि कभी कांग्रेस के गढ़ रहे इस बेल्ट में बीएपी पार्टी ने उसकी जगह ले ली है। यहां मुकाबला आदिवासी और गैर आदिवासी वोटों का हो गया है। यहां कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
हाड़ौती के गढ़ कोटा में ओम बिरला का क्या होगा ?
अगर अब बात करे राजनीति के गढ़ हाड़ौती के कोटा-बूंदी सीट की। इस सीट पर शुरू से ही कांटे की टक्कर नजर आ रही है। एक ओर जहां भाजपा को छोड़ कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे प्रहलाद गुंजल सियासी विभिषण की भूमिका निभा रहे है। जो बिरला को हराने के साथ जीत कर राजा बनने का दावा कर चुका है। इसकी एक बड़ी वजह है मीना समाज का युवा और चर्चित चेहरा नरेश मीना जो लगातार अर्जून की तरह गुंजल की चुनावी प्रचार की कमान थामे हुए है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के लिए इस सीट पर जीत की राह आसान नजर नहीं आती है। 70.82 फीसदी का वोटिंग प्रतिशत बताता है कि इस सीट की सियासी जंग में जोर आजमाइश पूरी हुई है।
हालांकि सियासी पंडित मानते हैं कि गुंजल के अच्छा चुनाव लड़ने के बाद भी इस सीट पर ओम बिरला का पलड़ा भारी है। असल में इस सीट को हिंदुत्ववादी सीट माना जाता है। यही वजह है कि बिरला पिछले दो बार से दो लाख से अधिक मतों से जीतते आए हैं। कांग्रेस के मूल वोटर के साथ गुर्जर मीणा के जातीय समीकरणों के बाद भी ये मार्जिन पाटना आसान नहीं है।
सिरोही का मतदान प्रतिशत कर सकता बड़ा उलट फेर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की वजह से इस बार जालोर सिरोही सीट भी हॉट बन गई थी। इस सीट पर मतदान 62.28 फीसदी हुआ जो बता रहा है कि इस बार यहां चुनावी माहौल बना है।
लेकिन यहां पर पिछली बार भाजपा का जीत का 2.61 लाख अंतर कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी है। हालांकि इस इलाके में माली प्रभाव के करीब सवा लाख वोटर के अलावा आठ विधानसभाओं में से चार में कांग्रेस का प्रभाव है।
यह सीट भाजपा के प्रत्याशी लुंबाराम के स्थानीय होने के चलते स्थानीय और बाहरी उम्मीदवार का नारा लगा था, लेकिन अशोक गहलोत ने बीएपी पार्टी से समझौता कर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया है।
पायलट के गढ़ में सबसे कम मतदान
13 सीटों में सबसे कम मतदान टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर 56.55 प्रतिशत हुआ है, जो कि कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चिंता का विषय है।
सचिन पायलट के गढ़ कहे जाने वाले इस इलाके में कांग्रेस ने हरीशचंद्र मीणा को चुनावी मैदान में उतारा तो भाजपा ने फिर से सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर भरोसा किया।
गुर्जर मीणा बहुल इस सीट पर कम वोटिंग से माना जा रहा है कि जाट-गुर्जर वोटर धर्म संकट में पड़ गया है कि क्या पायलट के कहने पर मीणा को वोट दें? या फिर भाजपा के साथ जाकर अपना गुर्जर धर्म निभायें। लगता है कि इसी पसोपेश में गुर्जर वोटर वोट डालने नहीं निकला है।
13 सीटों पर किसका पलड़ा भारी?
पहले चरण में कम वोटिंग के बाद पीएम मोदी की अपील के बाद इस बार भाजपा का बूथ मेंनेजमेंट बेहतर नजर आया। कांग्रेस ने भी फंसी हुई सीटों पर वोटिंग बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगाया।
अब सवाल यह है कि दूसरे चरण में बढ़े वोट प्रतिशत का लाभ किसे मिलेगा। भाजपा कांग्रेस दोनों के अपने अपने दावे हैं। लेकिन यह भी सच है कि इन 13 सीटों में केवल पांच सीट बाड़मेर जैसलमेर, बांसवाड़ा, टोंक सवाई माधोपुर, कोटा बूंदी और जालौर सिरोही ही ऐसी है जहां मुकाबला कड़ा है।
जबकि अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, पाली, जोधपुर और झालावाड-बारां में भाजपा का पलड़ा भारी है। फिलहाल इंतजार 4 जून को नतीजे घोषित होने का है।












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