राजस्थान की 5 हैंडीक्राफ्ट कलाओं को मिला जीआई टैग, अब बाजार तक पहुंच होगी आसान
राजस्थान की शान नाथद्वारा की पिछवाई कला, जोधपुरी बंधेज, उदयपुर की कोफ्तगिरी, बीकानेर की उस्ता कला और कशीदाकारी को हैंडीक्राफ्ट कलाओं को जीआई टैग दिया है।
राजस्थान की जिन पांच कलाओं का जीआई टैग मिले हैं, उनमें नाथद्वारा की प्रसिद्ध पिछवाई कला, जोधपुरी बंधेज, उदयपुर की कोफ्तगिरी, बीकानेर की उस्ता कला और कशीदाकारी क्राफ्ट शामिल है।

उल्लेखनीय है कि अब तक राजस्थान की 21 वस्तुओं को जीआई टैग मिल चुका है। दो साल पहले सोजत की मेहंदी को जीआई टैग दिया गया था।
पांच हैंडीक्राफ्ट कलाओं का महत्व
- -नाथद्वारा पिछवाई श्रीनाथ जी मंदिर में मूर्ति के पीछे बनी विशेष चित्रकारी है।
- -जोधपुरी बंधेज मलमल, रेशम और वॉयल कपड़े पर विशेष रंगाई व
- छपाई की जाती है।
- - उदयपुर कोफ्तगारी मेटल क्राफ्ट कला में हथियारों को डिजाइन, गर्म व ठंडा करने की एक जटिल प्रक्रिया द्वारा अलंकृत किया जाता है।
- -बीकानेर की कशीदाकारी में कपास, रेशम व मखमल पर विभिन्न प्रकार के महीन टांके और दर्पण कार्य किए जाते हैं।
- -बीकानेर उस्ता कला में ऊंट की खाल पर विशेष कारीगरी की जाती है।
अब बाजार तक पहुंच आसान बनेगी
नाबार्ड जोधपुर के जिला विकास प्रबंधक मनीष मंडा कहते हैं कि जीआई टैग ग्रामीण कृषि विकास, उत्पाद की अलग पहचान, ब्रांड का निर्माण, जैव विविधता का संरक्षण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे उत्पाद गुणकता में सुधार व बाजार तक पहुंच आसान बनेगी।












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