राजस्थान: ऐसा चमत्कारी शिवलिंग जिसका 'ना आदी ना अंत', दिन में 3 बार बदलता है रंग
जयपुर, 13 नवंबर: राजस्थान अपने इतिहास के साथ-साथ चमत्कार और रहस्यों के भी प्रसिद्ध हैं। वैसे तो प्रदेश में देवी-देवताओं के सैकड़ों विख्यात और चमत्कारी मंदिर हैं, लेकिन राजधानी जयपुर से 250 किलोमीटर दूर धौलपुर जिले में एक ऐसा शिव मंदिर हैं, जहां मंदिर में विराजमान शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। आस्था का अगाध केंद्र माना जाने वाला ये मंदिर चंबल नदी के बीहड़ों में स्थित भगवान शिव का अचलेश्वर महादेव मंदिर है।

दिन में 3 बार रंग बदलता है चमत्कारी शिवलिंग
राजस्थान में श्रीकृष्ण भक्त मीरा भी हुईं है तो सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती ने भी अपना ढेरा यहीं अजमेर में जमाया था। अब आपको ऐसे में अद्भुत और चमत्कारी शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लाखों लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र हैं। कहा जाता है कि अचलेश्वर महादेव का शिवलिंग अद्भुत होने के साथ-साथ चमत्कारी भी है। भगवान भोलनाथ का शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। मान्यता है कि सुबह के मय शिवलिंग की आभा लाल रंग की होती है, जो दोपहर तक बदलकर केसरिया दिखने लगती है। और फिर शाम को इसका रंग धीरे-धीरे सांवला होने लगता है।

करीब एक हजार साल पुराना मंदिर का इतिहास
धौलपुर जिले के चंबल के बीहड़ों में विराजमान अचलेश्वर महादेव का अपनी विशेष महत्व है। यहां भोलेनाथ की शरण में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लाखों की तादाद में भक्त दर्शन करने आते हैं। हर साल महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां विशाल मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें आस्था का सैलाब उमड़ता है। इस प्राचीन शिव मंदिर से कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं। श्रद्धालुओं की मानें तो अचलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास करीब एक हजार साल पुराना है।

शिवलिंग का 'ना आदी ना अंत'
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करीब एक हजार वर्ष पहले इस अद्भुत और चमत्कारी शिवलिंग का उद्गम हुआ था। बताया जाता है कि चंबल के बीहड़ों (जंगलों ) में कुछ पशु चराने वाले लोगों को जमीन में गढ़ी हुई एक पत्थर की पिंडी दिखाईं दी थी, जिसके बाद जैसे-जैसे उसकी खुदाई शुरू हुई वो वैसे वैसे शिवलिंग की चौड़ाई बढ़ती गई। ऐसे में इस शिवलिंग का आदी और अंत नहीं पाया गया और खुदाई को रोक दिया गया।

मनचाहे जीवनसाथी की मनोकामना होती है पूरी
इस अद्भुत अचलेश्वर महादेव मंदिर में लोगों की बहुत आस्था हैं। कहा जाता है कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही भक्त की सभी मनोकामनाएं यहां पूरी होती है। माना जाता है कि यहां कुंवारे युवक-युवतियों मनचाहा वर-वधु की इच्छा लेकर आते हैं तो उनकी प्रार्थना पूरी होती है। अविवाहित लोग यहां 16 सोमवार शिवजी को जल चढ़ाते हैं तो उनको मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।












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