Rajasthan News: राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस की रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी बनेगा पासपोर्ट
Rajasthan News: राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के नकारात्मक होने पर पासपोर्ट जारी करने से स्वतः इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पासपोर्ट प्राधिकरण के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। न कि केवल पुलिस रिपोर्ट पर। यह निर्णय उन व्यक्तियों के लिए बड़ी राहत है। जो पासपोर्ट प्राप्त करने या उसका नवीनीकरण करवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट के कारण बाधाओं का सामना करते हैं।
सावित्री शर्मा बनाम भारत सरकार मामला
यह फैसला सावित्री शर्मा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आया। जिसमें पुलिस सत्यापन रिपोर्ट में उनकी राष्ट्रीयता पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने इस फैसले को चुनौती दी। क्योंकि उनके दादा नेपाली मूल के थे। लेकिन उनका जन्म, विवाह और परिवार भारत से जुड़ा हुआ है। न्यायालय ने केंद्र सरकार और पासपोर्ट प्राधिकरण को आदेश दिया कि शर्मा के पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

पुलिस रिपोर्ट पासपोर्ट के अधिकार को नहीं रोक सकती
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि नकारात्मक पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर किसी नागरिक को पासपोर्ट से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।न्यायालय ने जोर देकर कहा कि पुलिस रिपोर्ट केवल एक सिफारिश है। अंतिम निर्णय पासपोर्ट प्राधिकरण को आवेदक के व्यक्तिगत मामलों की बारीकियों के आधार पर करना चाहिए। यह स्पष्ट किया गया कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 पासपोर्ट प्राधिकरण को विवेकाधिकार प्रदान करता है। जिसमें सत्यापन रिपोर्ट के बावजूद निष्पक्ष निर्णय लेने का अधिकार शामिल है।
पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट प्रक्रिया
न्यायालय ने पुलिस सत्यापन प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। लेकिन कहा कि इसका उद्देश्य आवेदक की पृष्ठभूमि की जांच करना है। न कि पासपोर्ट के अधिकार को बाधित करना। अगर रिपोर्ट में कोई गैरकानूनी गतिविधि का उल्लेख हो तो पासपोर्ट प्राधिकरण कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। हालांकि नकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद प्राधिकरण को आवेदक के पक्ष में निर्णय लेने का अधिकार है।
नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर कोर्ट का रुख
राजस्थान उच्च न्यायालय का यह फैसला पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के संबंध में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को बढ़ावा देता है। न्यायालय ने कहा कि पासपोर्ट जारी करना नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गतिशीलता का अधिकार है। यह निर्णय पासपोर्ट प्राधिकरण को विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए तर्कसंगत और न्यायपूर्ण निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
राजस्थान उच्च न्यायालय का यह निर्णय नागरिक अधिकारों की रक्षा और पासपोर्ट प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला पुलिस रिपोर्ट को अंतिम मानने की प्रथा को बदलने का संकेत देता है। हाई कोर्ट यह निर्णय उन नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है। जो पासपोर्ट आवेदन में प्रशासनिक बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
न्यायालय के आदेश ने यह सुनिश्चित किया है कि पासपोर्ट प्राधिकरण सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ प्रत्येक मामले की समीक्षा करे। यह फैसला नागरिक स्वतंत्रता और कानूनी अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।












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