लोकतंत्र सैनानियों को लेकर भजन लाल सरकार का बड़ा फैसला, आपातकाल में जेल जाने वालों की नहीं रुकेगी पेंशन

Rajasthan News: राजस्थान में भजन लाल सरकार ने आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को लेकर बड़ा फैसला किया है। राज्य सरकार ने आपातकाल के दौरान जेल में बंद लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में विधेयक पेश किया है। राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक 2024 में मीसा और डीआईआर कैदियों को पेंशन, चिकित्सा सुविधा और मुफ्त सड़क यात्रा का प्रावधान है। हालांकि आपातकाल के दौरान माफी मांगकर जेल से रिहा हुए लोगों को ये सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

सरकार ने इस पहल के लिए 40 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच राजनीतिक या सामाजिक कारणों से जेल में बंद व्यक्तियों को लोकतंत्र सेनानी कहा जाता है। उनकी मृत्यु के बाद उनके जीवनसाथी को पेंशन मिलेगी। अगर वे 90 दिनों के भीतर आवेदन करते हैं।

bhajan lal sharma

वर्तमान में मीसा और डीआईआर कैदियों को 20 हजार रुपए मासिक पेंशन, 4 हजार रुपए का चिकित्सा भत्ता और राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है। आपको बता दें कि भजन लाल सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इन लाभों की घोषणा की थी।

इस विधेयक को इस इसलिए पेश किया गया है क्योंकि पेंशन को केवल विधानसभा में वापस लेकर ही रोका जा सकता है। यह कानूनी कवर किसी भी भावी सरकार को केवल प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से पेंशन रोकने से रोकेगा। यदि कोई सरकार इसे रोकना चाहती है तो उसे एक लंबी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

पहले कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने पर पेंशन अक्सर रोक दी जाती थी। अब इस विधेयक के आने से ऐसी रुकावटों को दूर करने के लिए विधानसभा में कानून को निरस्त करना पड़ेगा।

लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन के लिए पात्रता की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति बनाई जाएगी। इस समिति में प्रशासनिक अधिकारी और विधायक शामिल होंगे। जो पेंशन आवेदनों की समीक्षा करेंगे। कलेक्टर पात्र लोकतंत्र सेनानियों को पहचान पत्र जारी करेंगे।

इन पहचान पत्रों के आधार पर उन्हें 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय त्योहारों पर सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाएगा। इन निमंत्रणों को भेजने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है।

आपातकाल के दौरान 30 दिनों से ज्यादा जेल में रहने वाले और माफी मांगने के बाद रिहा होने वाले लोगों को लोकतंत्र सेनानी नहीं माना जाएगा। उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा अगर वे गंभीर नैतिक अपराधों या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं तो उनकी पेंशन रद्द कर दी जाएगी।

आपको बता दें कि मीसा कैदी वे हैं। जिन्हें 1975-77 के आपातकाल के दौरान राजनीतिक या सामाजिक कारणों से राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा अधिनियम 1971 के तहत हिरासत में लिया गया था। डीआईआर कैदी वे हैं। जिन्हें उसी अवधि के दौरान भारत रक्षा नियम 1971 के तहत हिरासत में लिया गया था। इस विधेयक के 2 अगस्त को समाप्त होने वाले सत्र से पहले इसी सप्ताह विधानसभा में पारित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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