भीलवाड़ा नगर परिषद सभापति ललिता समदानी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित, 45 में से एक भी वोट पक्ष में नहीं पड़ा

भीलवाड़ा। राजस्थान निकाय चुनाव 2019 समाप्त होते ही भीलवाड़ा सभापति ललिता समदानी सुर्खियों में आ गई हैं। इनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 10 दिन चला सियासी ड्रामा बुधवार को मतदान के बाद खत्म हो गया। कांग्रेस की ललिता समदानी के खिलाफ 55 पार्षदों में से 43 पार्षदों ने 18 नवंबर को जिला कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट के सम्मुख पेश होकर अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।

कांग्रेस पार्षद ने नहीं किया मतदान

कांग्रेस पार्षद ने नहीं किया मतदान

बुधवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पार्षदों, विधायक तथा सांसद ने अपर जिला कलेक्टर (प्रशासन) राकेश कुमार की मौजदूगी में मतदान किया। कांग्रेस के एक पार्षद को छोड़कर अन्य पार्षदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। सभापति समदानी के खिलाफ में 45 तथा पक्ष में 0 मत पड़ा। इस तरह समदानी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया।

भीलवाड़ा सभापति पर ये आरोप

भीलवाड़ा सभापति पर ये आरोप

बता दें कि गत 18 नवंबर को नगर परिषद सभापति ललिता समदानी पर आय से अधिक संपत्ति, नगर परिषद में हुए टेंडरों में भष्ट्राचार, बिना भू-उपयोग परिवर्तन, बिना नक्शा पास कराए व बिना स्वीकृति लिए निर्माण कार्य होने देने, शहर में सफाई व्यवस्था नहीं होने समेत निर्माण कार्यों में गड़बड़झाला सहित कई आरोपों को लेकर भाजपा के 36 पार्षद और 9 निर्दलीय पार्षदों में से 7 निर्दलीय पार्षदों ने तथा शहर विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी ने हस्ताक्षर युक्त अविश्वास प्रस्ताव जिला कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट के सम्मुख पेश किया था।

भीलवाड़ा नगर परिषद में 55 पार्षद

भीलवाड़ा नगर परिषद में 55 पार्षद

भीलवाड़ा जिला कलेक्टर ने सभापति के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए 28 नवम्बर निर्धारित करते हुए अपर कलेक्टर (प्रशासन) राकेश कुमार अधिकारी नियुक्त किया था। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि निर्धारित होने के बाद अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ सभापति समदानी ने स्टे के लिए हाईकोर्ट की शरण लेते हुए याचिका दायर की थी, परंतु हाईकोर्ट ने 26 नवम्बर को समदानी की याचिका पर सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। बता दें कि भीलवाड़ा नगर परिषद में 55 पार्षदों का बोर्ड है।

सीएम से भी की शिकायत

सीएम से भी की शिकायत

नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए 43 पार्षद चाहिए थे। भाजपा के साथ निर्दलीय व विधायक, सांसद के मत के बाद 45 सदस्य हुए, जो अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए काफी थे। विदित है की पूर्वांचल जन चेतना समिति की अध्यक्ष अर्चना दुबे ने भी 12 बिन्दुओं को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 19 जून को शिकायत की थी। साथ ही कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अविनाश राय खन्ना को भी समदानी के खिलाफ भष्ट्राचार के सारे दस्तावेज पेश किए थे।

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