राजस्थान : ड्राइंग मास्टर मधुसूदन कैसे बने Baba Vijaydas ? मौत के बाद अकेली रह गई 12 साल की पोती
कौन थे बाबा विजयदास जिन्होंने कपड़ा फैक्ट्री के ड्राइंग मास्टर मधुसूदन से महंत बनकर दी जान
भरतपुर, 23 जुलाई। राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव पसोपा में आदिबद्री एवं कनकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने की मांग को लेकर खुद को आग के हवाले करने वाले बाबा विजयदास की मौत हो गई है। उन्होंने के दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शनिवार सुबह साढ़े चार बजे अंतिम सांस ली।

साढ़े तीन बजे महंत विजय दास का अंतिम संस्कार
उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित बरसाना में अपराह्न साढ़े तीन बजे महंत विजय दास का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बरसाना स्थित माता श्री गौशाला में ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा या सुनील ठाकुर बाबा विजयदास की चिता को मुखाग्नि देंगे। भरतपुर के पहाड़ी उपखंड के एसडीएम संजय गोयल दिल्ली के सफदरजंग उनका शव लेकर बरसाना पहुंच रहे हैं।

गांव पसोपा में अवैध खनन को रुकवाने की मांग कर रहे
बाबा दें कि गांव पसोपा में बीते डेढ़ साल से साधु संत पहाड़ से अवैध खनन को रुकवाने और उसे वन क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे थे। साधु-संतों के इस आंदोलन में मंगलवार को मान मंदिर बरसाना के साधु नारायण दास मोबाइल टावर पर चढ़ गया था। वहीं, नीचे संत विजयदास ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली।

विजयदास को पुलिस ने डीग के सरकारी अस्पताल पहुंचाया
आग लगाने से गंभीर रूप से झुलसे बाबा विजयदास को पुलिस ने डीग के सरकारी अस्पताल पहुंचाया था। यहां प्राथमिक उपचार देने के बाद उनको भरतपुर के जिला अस्पताल रैफर किया गया। स्थिति गंभीर बनी रहने पर भरतपुर से उनको जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल और जयपुर से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्बुलेंस से नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया। यहां पर उनको वेंटिलेटर पर रखा गया। शनिवार तड़के मौत हो गई।

विजयदास के बाबा बनने की कहानी बेहद रोचक
बता दें कि विजयदास के बाबा बनने की कहानी बेहद रोचक है। विजयदास का जन्म हरियाणा के फरीदाबाद के गांव बडाला के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। साधु बनने से पहले इनका नाम मधुसूदन शर्मा था। ये फरीदाबाद की कपड़ा फैक्ट्री में ड्राइंग मास्टर के पद पर काम किया करते थे। उसी दौरान इनकी शादी हुई।

बेटा-बहू की हादसे में मौत हो ग
मधुसूदन शर्मा एक पोती के दादा थे। इनके बेटे तक की शादी हो गई थी। पोती के जन्म के बाद बेटा-बहू की हादसे में मौत हो गई। इसी दौरान कपड़ा फैक्ट्री में ड्राइंग मास्टर मधुसूदन शर्मा का सांसारिक जीवन से मोहभंग हो गया। वे दो-तीन साल की पोती दुर्गा को लेकर करीब 12 साल पहले बरसाना मान मंदिर आकर रहने लगे।

मधुसूदन शर्मा को नया नाम बाबा विजयदास मिला
बरसाना मान मंदिर आकर मधुसूदन शर्मा ने अपनी पोती दुर्गा को लालन पालन और शिक्षा के लिए मंदिर के गुरुकुल को सौंप दिया। इसी दौरान वे ब्रज के संत रमेश बाबा के सम्पर्क में आए और मान मंदिर में ही जीवन भर के लिए डेरा डाल लिया। तब उन्हें विधिवत साधु समाज में शामिल किया गया। मधुसूदन शर्मा को नया नाम बाबा विजयदास मिला।

749.44 हेक्टेयर भूमि को वन संरक्षित क्षेत्र में शामिल करने की मांग
फिर साल 2017 में नागल और भूआपुर गड़ी में खनन बंद करवाने की मांग को लेकर जो मान मंदिर के संतोष द्वारा आंदोलन किया गया उसमें विजयदास ने भी हिस्सा लिया था। 16 जनवरी 2021 को जब गांव पसोपा में मान मंदिर बरसाना के तत्वावधान में आदि बद्री और कनका चल पर्वत पर चल रहे अवैध खनन को बंद कराने तथा इस संपूर्ण 749.44 हेक्टेयर भूमि को वन संरक्षित क्षेत्र में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया तो बाबा विजयदास भी गांव पसोपा आकर आंदोलन में शामिल हो गए और मंगलवार को आत्मदाह कर लिया था।
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