हेलीकॉप्टर पर हर माह ₹2 करोड़ खर्च करेगी भजनलाल सरकार, जानिए गहलोत सरकार से कितना महंगा?
बीते दिनों राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने अशोक गहलोत सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने प्रदेश को कर्ज के बोझ तले दबा दिया। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की VIP उड़ानों के लिए दो करोड़ रुपए महीना के किराए पर हेलीकॉप्टर लिया है।
दरअसल, चौमूं से कांग्रेस विधायक शिखा मील बराला ने राजस्थान विधानसभा में सवाल पूछा था, जिसका नागरिक उड्यन विभाग ने जवाब दिया कि अशोक गहलोत सरकार ने हेलीकॉप्टर और चार्टर्ड प्लेन के किराए पर हर महीने औसतन 1.59 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। जबकि राजस्थान की मौजूदा भजनलाल शर्मा सरकार ने हर माह दो करोड़ के रुपए किराए में एक प्राइवेट विमानन कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया है।

कांग्रेस विधायक बराला के सवाल के जवाब में राजस्थान नागरिक उड्यन विभाग ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार के पास वर्तमान में कोई हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर नहीं है। सरकार ने 5 जून 2024 को नई दिल्ली की मैसर्स रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड से हेलीकाप्टर लीज पर लेने का एग्रीमेंट किया है। इस पर दो करोड़ रुपए महीने के हिसाब से हर साल 23.79 करोड़ रुपए खर्च होना अनुमानित है।
उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत सरकार के समय में साल 2020-21 से 2023-24 तक राजस्थान सरकार ने हेलीकॉप्टर और चार्टड प्लेन के किराए पर 76.46 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इस तरह चार साल में हर महीने औसतन 1.59 करोड़ रुपए चुकाए गए।
राजस्थान सरकार के पास पिछले एक दशक से खुद को हेलीकॉप्टर नहीं है। पहले हेलीकॉप्टर था, जो खराब पड़ा है। हुआ यह था कि साल 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकारी हेलीकॉप्टर से चूरू जिले के एक कार्यक्रम में जा रहे थे। रास्ते में चूरू-झुंझुनू बॉर्डर पर इस हेलीकॉप्टर की रोटर ब्लैड टूट गई थी।
हेलीकॉप्टर की एक खेत में इमरजेंसी लैंडिंग की गई थी। गहलोत इस हादसे में बाल-बाल बचे थे। यह हेलीकॉप्टर उसके बाद से ही बेकार पड़ा है। इसकी रिपेयरिंग भी की गई, लेकिन अब काम में नहीं लिया जा रहा है। पिछले एक दशक से ज्यादा समय से राज्य सरकार किराए पर ही हेलीकॉप्टर और प्लेन ले रही है।












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