Dungarpur : तीन बेटियों के कंधे पर विदा हुए आजाद भाटिया, कुवैत में हार्ट अटैक से हो गई थी मौत

राजस्‍थान के डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा तहसील के गांव के वरदा में हर किसी को गमजदा कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पर एक व्‍यक्ति ने अपनी बेटियों के कंधे पर अंतिम विदाई ली है। इनके बेटा नहीं होने के कारण बेटियों ने ही मौत के बाद की सारी रस्‍मे निभाई हैं। हर किसी का कलेजा तो तब फट पड़ा इसी करवा चौथ को पत्‍नी दिनभर भूखी प्‍यासी रहकर पति की लंबी उम्र की कामना कर रही थी और शाम को चांद के दीदार से पहले ही पति का शव घर पहुंचा।

Dungarpur

जानकारी के अनुसार गांव वरदा के आजाद भाटिया तीन दशक से खाड़ी देश कुवैत रहकर काम करते थे। इनके तीन बेटी निशा, रितु व पायल हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। 10 अक्‍टूबर को आजाद भाटिया की कुवैत में हार्ट अटैक की वजह से मौत हो गई थी। आजाद के कोई बेटा नहीं है। कुवैत से शव भारत मंगवाने के प्रयास भी बेटियों ने ही किए। शुक्रवार को शव घर लाया गया था।

यूं तो हिंदू रीति रिवाज के अनुसार बेटियां और महिलाएं श्मशान में नहीं जातीं। मान्यता यह भी है कि बेटा न होने पर भी बेटियां पिता की अर्थी को कंधा या मुखाग्नि नहीं दे पातीं, लेकिन जमाना बदल गया है। अब बेटा बेटी में कोई फर्क नहीं रहा। शायद यही वजह है कि आजाद की भी तीनों बेटियों ने अपने पिता की मौत पर बेटे का फर्ज निभाने का फैसला किया।

निशा, रितु व पायल ने पिता की अर्थी को श्मशान तक कंधा दिया। उनकी चिता को मुखाग्नि भी दी। मोक्षधाम में जब बेटियां ने बेटों का फर्ज निभाया तो हर किसी के आंसू बह निकले। भाटिया समाज के मुक्तिधाम में रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया गया। वरदा के मुख्य मार्गो से आज़ाद भाटिया की अंतिम यात्रा निकाली गई जहां गांव का माहौल गमगीन हो गया। बड़ी बेटी निशा ने इस दौरान कहा कि हमारे भाई नहीं था ऐसे में पिता ने ही हमें कभी भाई की कमी नहीं होने दी और हाथ से हाथ मिला कर बराबरी करना सिखाया।

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