Constable Prahlad Singh: राजस्‍थान सरकार परिजनों को देगी एक करोड़, दोस्‍त ने शेयर किए बहादुरी के किस्‍से

Rajasthan Police Constable Prahlad Singh चोर की गोली से मारे गए थे। राजस्‍थान की अशोक गहलोत सरकार ने कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह के परिजनों को एक करोड़ की मदद की घोषणा की है।

Prahlad Singh Constable Dausa Police: राजस्‍थान के दौसा जिले में बाइक चोर के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह के परिजनों को सरकार की ओर से एक करोड़ की आर्थिक मदद दी जाएगी।

सीएम अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह के परिजनों के परिजनों को आर्थिक मदद के अलावा परिवार के एक सदस्‍य को अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन, कृषि भूमि, गैलेंट्री अवार्ड के लिए केंद्र सरकार को प्रस्‍ताव भेजा जाएगा।

Prahlad Singh Constable Dausa Rajasthan Police

उल्‍लेखनीय है कि मुठभेड़ में सिर में गोली लगने के बाद कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह कोमा में चले गए थे। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्‍पताल में उनका उपचार चल रहा था। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उन्‍होंने दम तोड़ दिया। बाद एसएमएस अस्‍पताल के मुर्दाघर के बाहर परिजन व ग्रामीण बड़ी संख्‍या में एकत्रित हो गए।

कौन थे कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह?

बता दें कि राजस्‍थान पुलिस के जाबांज सिपाही प्रह्लाद सिंह मूल रूप से नीमकाथाना जिले के चिपलाटा गांव के रहने वाले थे। 10 जुलाई 1989 को जन्‍मे प्रहलाद सिंह बचपन से ही साहसी व पढ़ाई में होशियार थे। साल 2008 में राजस्‍थान पुलिस ज्‍वाइन की थी। 12 मई 2021 से दौसा पुलिस में जिला विशेष टीम में तैनात थे।

Prahlad Singh Constable Dausa Rajasthan Police

कैसे हुई कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह की मौत?

दौसा सदर पुलिस थाना इलाके के गांव कालाखोह से बुधवार को इत्‍तला मिली कि बदमाश ने बाइक चुरा ली। इस पर डीएसटी के कांस्‍टेबल प्रह्लाद सिंह मौके पर पहुंचे थे। बाइक चोर ने उन पर गोली चला दी, जो सिर में लगी।

क्‍या बोले साथी कांस्‍टेबल रघुनाथ सिंह?

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में जयपुर के रेनवाल निवासी रघुनाथ सिंह ने बताया कि वे राजस्‍थान पुलिस कांस्‍टेबल भर्ती परीक्षा 2008 पास करके ट्रेनिंग के लिए राजस्थान पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र, जोधपुर पहुंचे थे। वहां उसी बैच के साथी कांस्‍टेबल गांव चिपलाटा के प्रह्लाद सिंह से मुलाकात हुई थी।

दोनों ने साथ-साथ ट्रेनिंग पूरी की थी। प्रह्लाद सिंह बहादुर ही नहीं बल्कि सारे बैच में सबसे निष्‍ठावान भी थे। ट्रेनिंग के दौरान वे हर टास्‍क को बेहतरीन ढंग से और समय पर पूरा करते थे। दौसा पोस्टिंग के बाद भी उनकी बहादुरी के कई किस्‍से अक्‍सर सुनने को मिलते थे।

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