Aravali Hills: राजस्थान के लिए अरावली क्यों है सम्मान का प्रश्न? इतिहास से लेकर आस्था तक दबे हैं अनकहे राज़
Aravali Hills Rajasthan: अरावली पर्वत को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर गए हैं। खास तौर पर राजस्थान में इसका पुरजोर विरोध हो रहा है। राजस्थान के लिए यह सिर्फ पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है। यहां के लोग इसे एक संरक्षक और देवता के रूप में देखते हैं। हजारों साल पुरानी यह पर्वतमाला मरू प्रदेश की जलवायु, संस्कृति, आस्था और अस्तित्व से जुड़ी है।
यही वजह है कि अरावली को बचाने के लिए लोग जान की बाज़ी तक लगाने को तैयार रहते हैं। इस पहाड़ ने इतिहास में खिलजी से लेकर मुगलों के आक्रमण से बचाने का काम किया है। अरावली की तलहटी में बने लोहागढ़ किले को अंग्रेज 11 बार जीतने की कोशिश कर भी सफल नहीं हो पाए थे। जानें राजस्थान के लिए अरावली क्यों महत्वपूर्ण है।

Aravali Hills History: मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक रोकने में कामयाब
राजस्थान के ज्यादातर विशाल किले अरावली की तराई में हैं। मुगल बादशाह अपने लंबे शासनकाल में इनमें से कई किलों को जीत नहीं पाए थे। इसमें कुंभलगढ़, लोहागढ़ जैसे किले शामिल हैं। पहाड़ों की तराई में होने की वजह से आक्रमणकारियों के लिए इसे पार करना कठिन होता था। राजस्थान में गर्मी और सर्दी दोनों बहुत ज्यादा पड़ती है और इस वजह से भी आक्रमणकारियों को पीछे हटना पड़ता था। यही वजह है कि अंग्रेजों को भी यहां मुंह की खानी पड़ती थी।
Aravali Hills Rajasthan: मरुस्थल को रोकने वाली दीवार
अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल और पूर्वी राजस्थान के बीच एक विशाल दीवार की तरह खड़ी है। यह रेगिस्तान की धूल भरी आंधियों और मरुस्थलीकरण को आगे बढ़ने से रोकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अरावली न होती, तो आज राजस्थान का बड़ा हिस्सा पूरी तरह रेगिस्तान में तब्दील हो चुका होता। राजस्थानी लोकगीतों में अरावली को एक विजयी देवता की तरह माना जाता है जो धूल की आंधियों और प्रदेश को रेगिस्तान में बदलने से रोकने में प्राकृतिक रक्षक बनता है।
Aravali Hills Facts: जल का स्रोत और जीवनदायिनी
पानी की कमी वाले राजस्थान में अरावली को 'जलदाता' कहा जाता है। बनास, बेड़च, लूनी, साबरमती और कोठारी जैसी कई प्रमुख नदियों का उद्गम इसी पर्वतमाला से होता है। प्राचीन काल से यहां के लोग जल संरक्षण के लिए पहाड़ियों, झीलों और कुंडों पर निर्भर रहे हैं। अरावली भूजल स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।
Aravali Hills History: धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र
अरावली क्षेत्र में अनेक पवित्र धार्मिक स्थल स्थित हैं। माउंट आबू का गुरु शिखर भगवान दत्तात्रेय से जुड़ा माना जाता है। देलवाड़ा मंदिर, अचलगढ़, और पुष्कर जैसे तीर्थस्थल इसी श्रृंखला में बसे हैं। लोक देवता पाबूजी, गोगाजी और तेजाजी का संबंध भी अरावली क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इन मान्यताओं के कारण अरावली केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धरोहर भी है। राजस्थान के भील और मीणा जैसे आदिवासी समुदाय अरावली को एक मां की तरह पूजते हैं। कई जनजातीय समुदायों में अरावली को पिता जैसा देव माना गया है।
Aravali Hills है खनिजों का भंडार
- अरावली तांबा, जस्ता और सीसा जैसे खनिजों से समृद्ध रही है, जिसने सदियों तक राजस्थान की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
- इसके जंगल वन्यजीवों, औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों का घर हैं। भील और गरासिया जैसी जनजातियां आज भी अपने जीवनयापन के लिए अरावली पर निर्भर हैं।
- अरावली राजस्थान की जलवायु को संतुलित रखती है, बारिश लाने में मदद करती है और उपजाऊ भूमि की रक्षा करती है।
- यही कारण है कि राजस्थान के लोग अरावली को केवल पहाड़ नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व का रक्षक मानते हैं। कहा जाता है कि अरावली बची है, तो राजस्थान बचा है।
Supreme Court के हालिया फैसले पर क्या है विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिया है कि 100 मीटर से कम ऊंची वाली पहाड़ियों को अरावली की श्रृंखला में नहीं माना जाएगा। स्थानीय लोग इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। इससे खनन की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता और यह जलवायु के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस पर्वतमाला को बिल्डर्स को सौंपना चाहता है। दूसरी ओर बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि अरावली की भौगोलिक संरचना को सुरक्षित रखा जाएगा।












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