कौन हैं ये राजस्थान की 'स्टीफन हॉकिंग' अनुराधा बुडानिया, पूरा शरीर दिव्यांग, सिर्फ दिमाग करता है काम
हनुमानगढ़। दुनिया के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा। ब्लैक होल्स पर असाधारण रिसर्च करके इन्होंने दुनियाभर को चौंका दिया था। इनके शरीर का सिर्फ दिमाग को छोड़कर बाकी पूरा हिस्सा दिव्यांग था। कुछ ऐसी ही कहानी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की अनुराधा बुडानिया की है। यही वजह है कि इन्हें राजस्थान की 'स्टीफन हॉकिन्स' कहा जा रहा है।

अनुराधा बुडानिया ने प्रतिभा के दम पर कमाल कर दिखाया
दरअसल, अनुराधा बुडानिया का भी पूरा शरीर दिव्यांग है। सिर्फ दिमाग काम करता है। शरीर का बाकी हिस्सा काम नहीं करने के बावजूद कभी इसकी परवाह नहीं की और अपनी प्रतिभा के दम पर कमाल कर दिखाया है।

12वीं परीक्षा परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए
बता दें कि 21 वर्षीय अनुराधा मूलरूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गांव नथवाना की रहने वाली है। इन्होंने 12वीं परीक्षा परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। नतीजतन इन्हें राजस्थान सरकार के गार्गी पुरस्कार से नवाजा गया है।

व्यवस्थापक ने अनुराधा को उठाकर स्टेज पर पहुंचाया
हनुमानगढ़ के संगरिया के राजकीय बालिका विद्यालय में मंगलवार को गार्गी पुरस्कार वितरण समारोह हुआ था, जिसमें अनुराधा बुडानिया अपनी मां की गोद में सवार होकर कार्यक्रम में पहुंची। फिर स्कूल प्रिंसिपल व व्यवस्थापक ने अनुराधा को उठाकर स्टेज पर पहुंचाया, जहां एसडीएम रमेश देव, पालिका अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिद्धू ने घुटनों के बल बैठकर अनुराधा को माला व पगड़ी पहना उसका सम्मान किया।

अनुराधा का सपना है कि वह आईएएस बनें
मीडिया से बातचीत में अनुराधा ने बताया कि उसकी मुश्किलों ने उसे संवारा है। दिव्यांग होने के कारण घर से ही पढ़ाई की। हाथ-पांव, कमर सहित शरीर का कोई हिस्सा काम नहीं करता। खुद किताब भी नहीं उठा पाती हूं। परिजनों के सहयोग से यह सब संभव पा रहा है। बता दें कि अनुराधा ने कक्षा 10वीं में भी 78.50 प्रतिशत अंक लेकर गार्गी पुरस्कार प्राप्त किया था। दो मई 2020 को पिता सुरेंद्र बुडानिया की मौत के बाद मां सरोज बुडानिया ही इसका ख्याल रखती है। अनुराधा का सपना है कि वह आईएएस बनें।












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