50 साल बाद क्यों स्कूल लौट आए ये 'छात्र', वजह जानकार आप भी करोगे इनकी सराहना
जैसलमेर। वो वक्त था 1968-69 का...। हमसे ज्यादातर एक ही कक्षा में हुआ थे...। तब पेंट की बजाय निकर पहनते थे...। ये सबसे ज्यादा शैतानी किया करता था...। इसकी बातें तो आज भी हंसाती हैं...। सबसे होशियार इसे ही माना जाता था...। कुछ ऐसे ही संवाद जैसलमेर के अमर शहीद सामगर मल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में उस समय सुनने को मिले जब यहां के पूर्व छात्र पचास साल बाद लौटकर आए। साथी एक साथ मिले तो वर्षों पुरानी यादें जेहन ताजा हो गई।

दरअसल, अमर शहीद सामगर मल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जैसलमेर से पढ़कर निकले इन छात्रों में कोई आरएएस अफसर, अभियंता बन गया था तो कोई व्यापार और समाजसेवा से जुड़ा। वर्तमान में सभी साथी नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त हो चुके हैं और अब अपने पुराने स्कूल के लिए कुछ करना चाहते हैं।
जैसलमेर के राजेन्द्र भोपत बताते हैं कि बहुत दिन से इच्छा थी कि स्कूल के विकास के लिए कुछ करना चाहिए। अकेले की बजाय पूर्व छात्रों को साथ मिलाने की ठानी। नंबर पते लेकर सम्पर्क करना शुरू किया। गोल्डन ग्रुप के नाम से समूह बनाया। वर्तमान में अधिकांश साथी जैसलमेर के अलावा चैन्नई, सूरत, जोधपुर, जयपुर आदि शहरों में स्थायी रूप से रहने लगे, मगर जब ग्रुप बना तो सबने तय किया कि शनिवार और रविवार को स्कूल में मिलेंगे।

1968-69 में अमर शहीद सामगर मल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान संकाय के छात्र वरिष्ठ नागरिक के रूप में स्कूल पहुंचे। सेवानिवृत्त अधिकारी व विद्यालय के पूर्व छात्र श्यामसुंदर बिस्सा बताते हैं कि जिला मुख्यालय के इस विद्यालय में पढ़कर ही उन्होंने सफलता के सोपान को तय किया। जहां से तालीम लेकर वे आगे बढ़े, अब जीवन की दूसरी पारी विद्यालय के विकास में लगाएंगे।
शिक्षाधिकारी रह चुके विद्यालय के पूर्व छात्र नेमीचंद जैन बताते हैं कि गोल्डन ग्रुप ने शनिवार को भादरिया, रामदेवरा व आशापुरा भ्रमण किया और विद्यार्थी जीवन की सुनहरी यादों को ताजा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय विकास की योजना भी तैयार की और जिन शिक्षकों से वे पढ़े, उनके सम्मान का भी निर्णय लिया। रविवार को उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य घनश्याम गोस्वामी व स्टाफ से चर्चा की और विद्यालय विकास में योगदान करने को लेकर विचार-विमर्श किया।












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