सामूहिक विवाह सम्मेलन में 11 जोड़ों ने हिंदू देवी-देवताओं का ना मानने की शपथ लेकर अपनाया बौद्ध धर्म
सामूहिक विवाह सम्मेलन में 11 जोड़ों ने हिंदू देवी-देवताओं का ना मानने की शपथ लेकर अपनाया बौद्ध धर्म
मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा...। न ही इनकी पूजा करूंगा...। मैं राम को ईश्वर नहीं मानूंगा...। उनकी पूजा भी नहीं करूंगा...। मैं गौरी-गणपति आदि हिंदू धर्म के किसी भी देवी-देवता को ईश्वर नहीं मानूंगा...। मैं बुद्ध की पूजा करूंगा...। ईश्वर ने अवतार लिया है...जिस पर मेरा विश्वास नहीं है...। मैं ऐसा कभी नहीं कहूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं...। मैं ऐसी प्रथा को पागलपन और झूठा समझता हूं...। मैं कभी पिंडदान नहीं करूंगा...। मैं बौद्ध धर्म के विरोध में कभी कोई बात नहीं करूंगा...।

यह वो शपथ है, जिसे लेकर राजस्थान के भरतपुर जिले के कुम्हेर कस्बे में 11 जोड़े विवाह बंधन में बंध गए और हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म अपना लिया। यहां पर यह सब रविवार को संत रविदास सेवा विकास समिति की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान हुआ। समिति ने नवविवाहित सभी 11 जोड़ों को हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने की शपथ दिलाई। उनके द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
रविदास सेवा विकास समिति से जुड़े शंकरलाल बौद्ध ने बताया कि 11 जोड़ों को 22 तरह की शपथ दिलाई गई है। कार्यक्रम में नेता और अधिकारियों भी मौजूद थे। हालांकि उनके कार्यक्रम से चले जाने से जाने के बाद शपथ ग्रहण आयोजन हुआ था। बाबा भीमराव अंबेडकर द्वारा दोहराई गई 22 प्रतिज्ञा को वर-वधू को दिलाकर विवाह विवाह संपन्न करवाया गया।
भरतपुर के कुम्हेर में हिंदू जोड़ों द्वारा देवी देवताओं को नहीं मानने की शपथ लेकर बौद्ध धर्म अपना लेने के मामले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आपत्ति जताई है। मीडिया से बातचीत में संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर विवादित शपथ दिलाना देश की अखंडता के लिए खतरा है। पूरे मामले को लेकर अब प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।












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