जानिए, खुद को बेगुनाह बताने वाले राजद्रोह के आरोपी IPS जीपी सिंह की पूरी कुंडली
रायपुर ,12 जनवरी। छत्तीसगढ़ के विवादास्पद निलंबित आईपीएस जी पी सिंह को छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार करके रायपुर कोर्ट मे पेश किया है। ईओडब्ल्यू ने 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी जी पी सिंह के खिलाफ पिछले साल 29 जून को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने जुलाई के पहले सप्ताह में लगभग 15 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए लगभग 10 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता लगाया था। ईओडब्लू की कार्रवाई के बाद से ही जीपी सिंह फरार चल रहे थे।

निलंबित आईपीएस जीपी सिंह को रायपुर लाते ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने एसीबी और ईओडब्लू ऑफिस ले जाकर उनका मेडिकल और कोरोना टेस्ट कराया। टेस्ट के बाद उन्हें सीधे कोर्ट में पेश किया गया,जहां जीपी सिंह को 2 दिनों की रिमांड पर भेज दिया गया है। अब उन्हें 14 जनवरी की शाम 5 बजे तक कोर्ट में पेश होना होगा। इससे पहले रायपुर पहुचते ही जी पी सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जिन संपत्तियों को लेकर मुझपर आरोप लगे है वह गलत हैं। वह मेरी प्रोपर्टी नही है, न उससे मेरा कोई लेना देना है।मुझपर लगे आरोप मनगढ़ंत हैं।

जीपी सिंह पर राजद्रोह का मुकदमा, रह चुके हैं छत्तीसगढ़ में ACB चीफ
निलंबित आईपीएस जीपी सिंह 2019 में छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो के चीफ भी रह चुके हैं। सिंह पर आरोप है कि एंटी करप्शन चीफ रहते हुए छापेमारी का डर दिखाकर कई लोगों से बड़े पैमाने पर वसूली की थी।
एसीबी और ईओडब्ल्यू की शिकायत पर जीपी सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (देशद्रोह) और 153 ए (हेट स्पीच) के तहत मामला दर्ज किया गया था। छापेमारी में उनके ठिकानों से कई ऐसे दस्तावेज मिले थे, जिसमें उनपर हेट स्पीच और सरकार के विरुद्ध साजिश रचने का आरोप लगता है। गौरतलब है कि जुलाई के पहले सप्ताह में जीपी सिंह के रायपुर स्थित बंगले के अलावा कई अन्य ठिकानों पर एसीबी ने छापेमारी की थी। छापे मे कई दस्तावेज, लेपटॉप और पेन ड्राइव जप्त करने के साथ करीब 10 करोड़ से अधिक की संपत्तियों का पता लगा था।

अवार्ड पाने के लिए ग्रामीणों को नक्सली बताया
जीपी सिंह जब बस्तर जिले में एसपी थे। तब उन्होंने लगभग 100 ग्रामीणों को बस्तर से राजधानी रायपुर लाकर उन्हें मुख्यधारा में लौटने वाला नक्सली बताया था। चर्चा है कि सिंह ने यह सब गैलेंट्री अवार्ड पाने के लिए किया था। बाद में जब यह बात सामने आई कि रायपुर लाये गए लोग नक्सली नहीं, सामान्य आदिवासी ग्रामीण हैं। तब उनकी काफी फजीहत हुई थी।
इतना ही नही पहाड़ सिंह नाम के एक नक्सली से जप्त पैसों में अनियमितता बरतने का भी उनपर आरोप है। दरअसल पहाड़ सिंह नक्सलियों के अर्बन नेटवर्क का हिस्सा था। नक्सलियों की भर्ती अभियान के लिए वह पैसों का प्रबंधन करने के साथ व्यापारियों से सम्पर्क रखता था। नोटबन्दी के दौरान पुराने नोट खपाने के लिए उसने कुछ व्यापारियों से सम्पर्क किया था, जिसका उसके आत्मसमर्पण करने के बाद कोई पता नही चला। इस मामले में भी तत्कालीन रायपुर IG रहे जीपी सिंह सन्देह के दायरे में हैं, क्योंकि पुलिस पैसों के बारे मे कोई हिसाब नही दे सकी थी।

एसपी रहते हुए आईजी के घर की थी छापेमारी
जीपी सिंह ने बस्तर SP रहते हुए कई कारनामे किये। जीपी सिंह ने तब तत्कालीन IG रहे एमडब्ल्यू अंसारी के बंगले पर छापामार कार्रवाई करके ढाई लाख नकद बरामद किए थे। बताया जाता है कि दोनो अधिकारियों की आपस मे नहीं बनती थी। इस कार्रवाई के बाद अंसारी का तबादला कर दिया गया था।

युवा आईपीएस को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप
12 मार्च 2012 को बिलासपुर के 37 वर्षीय युवा एसपी राहुल शर्मा ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। यह घटना जीपी सिंह के करियर पर सबसे बड़ा दाग साबित हुई। कहा जाता है कि राहुल शर्मा जीपी सिंह के व्यवहार से बेहद परेशान थे और दोनो अधिकारियों के बीच अक्सर झगड़े होते थे। एक बार जब राहुल शर्मा छुट्टी में गए तो जीपी सिंह ने उनके जूनियर को एसपी पद का प्रभार दे दिया था। इस घटना के बाद ही राहुल शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। तत्कालीन रमन सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिये लेकिन सीबीआई किसी फैसले पर नही पहुंच सकी और जांच बन्द हो गई। भूपेश सरकार ने इस मामले में फिर जांच शुरू की, लेकिन वह भी 6 महीने से रुकी हुई है।
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