छत्तीसगढ़ के मंत्री टी एस सिंहदेव ने किया 15 वन अधिकारियों को एक साथ निलंबित !

रायपुर ,21 मार्च। छत्तीसगढ़ में वन विभाग के अफसरों ने ऐसा कारनामा कर दिया कि लाखों रुपये लागत से बना एनीकट पानी में बह गया। जनता की गाढ़ी कमाई से घटिया निर्माण करवाने वाले अफसरों की करतूत तो बीते साल ही उजागर हो गई थी,लेकिन सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने सदन में 15 वन अधिकारियों को निलंबित करने की घोषणा कर दी।

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दरअसल छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग के तहत आने वाले मरवाही वन मंडल क्षेत्र में खोडरी वन परिक्षेत्र में फुलवारी नदी पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत बनाया गया एक एनीकट यानि स्टॉप डैम अक्टूबर 2021 को बारिश में बह गया था। स्टॉप डैम बहने से इसके निर्माण के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाली सामग्री के घटिया होने के साथ नियमों की अनदेखी और घोर लापरवाही बरतने की पोल खुल गई।

इस मामले को स्थानीय स्तर पर काफी चर्चाये मिली,लेकिन दोषी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में कांग्रेस विधायक गुलाब कमरों ने ध्यानाकर्षण के दौरान मरवाही वन मंडल में पुलिया और स्टॉपडेम निर्माण में अनियमितता होने का मामला सदन में उठाया। इस दौरान कांग्रेस विधायक ने अपनी ही सरकार से जानना चाहा कि मरवाही में घटिया निर्माण कार्य करवाने वाले अफसरों पर क्या कार्रवाई की जा रही है? जिसपर सूबे के पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने गलती स्वीकार करते हुए सदन के समक्ष बड़ी घोषणा कर दी।
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छत्तीसगढ़ के पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने मरवाही में एनीकट निर्माण के दौरान ही गड़बड़ी को स्वीकार करते हुए टी एस सिंहदेव ने सदन में की 15 वन अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने सदन में ज़िला पंचायत सीईओ गजेंद्र ठाकुर के निलंबन की भी घोषणा की। सिंहदेव ने कहा कि गड़बड़ी करने वाले एक तत्कालीन डीएफओ के ख़िलाफ़ कार्रवाई की अनुशंसा समन्वय में भेजी जाएगी।

सदन में मरवाही का मामला जब गूंजा तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत भी इसे बेहद ही गंभीरता से सुन रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष महंत ने इस दौरान सदन में कहा कि इस मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई करिए,क्योंकि इसमें अपराध भी बनता है। मामले की गंभीरता को भांपते हुए पंचायत मंत्री टी इस सिंहदेव ने कहा कि इस मामले को हम समन्वय में भेजेंगे,वह भी विमर्श नहीं, बल्कि निलंबन के लिए।

सिंहदेव ने आगे कहा कि किसी भी मामले में गड़बड़ी होने पर मैं वह अंतिम व्यक्ति भी नहीं हूं ,जो किसी को बचायेगा। क्योंकि यह सात करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला है ,तो इसमें कोई दोषी नहीं बचेगा। इसके बाद सिंहदेव से डॉ. महंत ने कहा अगर आप चाहें तो जीएडी को निलंबित की सूचना भेज सकते हैं। जवाब ने सिंहदेव ने कहा कि यदि ऐसा किया जा सकता है ,तब मैंजिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ समेत कर्मचारियों के निलंबन की घोषणा करता हूं।

बहरहाल जिस घटना की वजह से मरवाही के वन अधिकारियों पर गाज गिरी है, वहां के ग्रामीणों का के मुताबिक कि वन परिक्षेत्र में बनाया गया एनीकट शुरु से ही गुणवत्ताहीन बनाया गया था , इसके बनने के बाद ही डेम में दरारे दिखाई देने लगी थी। बारिश से पहले डेम की मरम्मत की गई थी,लेकिन पहली बारिश के बाद ही उखड़ गया था। वही इस मामले में मरवाही वनमंडल अफसर स्थानीय ग्रामीणों के ऊपर ही आरोप मढ़ते देखे जा रहे थे। अफसरों का कहना था कि एनीकट ग्रामीणों की लापरवाही के कारण कमजोर हो गया था। बहरहाल इस मामले में अब कार्रवाई होने से क्षेत्र में संतोष है।

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