छत्तीसगढ़: रमन सिंह के राज में कर्मचारियों के राज में आए अच्छे दिन
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बीते साल कहा था कि जल्द ही सातवें वेतन आयोग का फायदे राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी मिलेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भी अब फैसले चुनाव को ध्यान में रख कर लिए जाने शुरु हो गए हैं। डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बुधवार को कर्मचारियों को खुश करने वाला फैसला किया। खुद मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य में कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के तहत तन्ख्वाह दी जाएगी।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद से ही इसी तरह की मांग राज्यों में भी उठने लगी थी। इस मामले में हरियाणा सबसे पहला राज्य था, जिसने 7 वें केंद्रीय वेतन आयोग के लाभ राज्य कर्मचारियों को भी देने की घोषणा की। आयोग के नियम हरियाणा में 1 जनवरी 2016 से ही लागू हैं।
बीते साल दिसंबर में ही रमन सिंह ने सातवां वेतन बता दें कि सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों की तनख्वाह में 23.5 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी। राज्य सरकार ने पहले ही 1 करोड़ कर्मचारियों की सैलरी 2.57 गुणा बढ़ाने के लिए सूचना जारी कर दी है।
ये नियम पेंशन पाने वालों पर भी लागू होगा। गौरतलब कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के बाद 1 जनवरी 2016 से सबसे कम सैलरी 7,000 रुपए से बढ़कर 18,000 रुपए हो गई है। वहीं सबसे ऊंचे पद यानी कैबिनेट सेक्रेटरी की सैलरी ढाई लाख रुपए हो गई है।
वहीं सातवें वेतन आयोग की घोषणा होने के बाद जब इसकी सिफारिशों को मंजूरी मिली तो एक नया कानूनी विवाद सामने आ गया था। यह विवाद अधिकतम 2.50 लाख रुपए की सैलरी को लेकर था।
आयोग की सिफारिशों के बाद कैबिनेट सचिव और आर्मी चीफ जैसे बड़े रैंक के अधिकारियों को मिलने वाली बेसिक सैलरी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेसिक सैलरी से 1 लाख रुपए ज्यादा हो गई थी। जबकि कानूनन ऐसा नहीं होना चाहिए था। इसके बाद सरकार ने राष्ट्रपति का वेतन 300 फीसदी बढ़ाने की साफारिश की थी।












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