किसानों का आंदोलन खत्म करने की जुगत में भूपेश सरकार, नवा रायपुर की जमीन पर सर्वे शुरू
रायपुर ,11 फरवरी। छत्तीसगढ़ की नई राजधानी यानी नवा रायपुर अटल नगर में किसान लगातार 40 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच भूपेश बघेल सरकार ने आंदोलन को समाप्त करवाने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने नवा रायपुर के किसान संगठन की मांगों से जुड़े पहलुओं को समझने के लिए अधिकारियों को नवा रायपुर सर्वे के काम पर लगा दिया है।
सर्वे के लिए नया रायपुर को कवर करने वाले आरंग और अभनपुर क्षेत्र के एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।नवा रायपुर में सरकार की तरफ से गठित 7 सदस्यों की टीम सर्वे का काम कर रही है, जो कि जमीन पर पट्टा देने और विकसित भूखंड आवंटित करने के से जुड़े तथ्यों पर जानकारियां जुटाकर रिपोर्ट सरकार के समक्ष पेश करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार नवा रायपुर के किसानों की मांग पर फैसला लेगी। गौरतलब है कि नवा रायपुर में हजारों की तादाद में 27 गांव के किसान 3 फरवरी से आंदोलन कर रहे हैं।

सर्वे का काम शुरू, किसान में जागी उम्मीद
राज्य सरकार के इस सर्वे को लेकर नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति से जुड़े किसानों ने बयान जारी करते हुए कहा है कि सरकार की तरफ से सक्षम अधिकारियों की टीम प्रभावित गांव में जाकर सम्पूर्ण बसाहट के रिहायशी मकानों ,लगानी ,आबादी,घास जमीन में मकान, ब्यारा बाड़ी,आंगन की लम्बाई-चौड़ाई कुल क्षेत्रफल और परिवार के सदस्यों की कुल संख्या का सर्वे कर रही हैं । अब देखना यह है कि सरकार का यह सर्वे प्रभावित गांवों के धरातल पर कितना कारगर होता है ।

क्या है किसानो की मांगे?
नवा रायपुर प्रभावित किसान कल्याण संघ के मुताबिक 27 गांव की जमीन लेकर नवा रायपुर (नया रायपुर) इलाका विकसित किया गया था। किसान चाहते हैं कि किसानों को जमीन पर चार गुना मुआवजा दिया जाए, हर प्रभावित परिवार को 1200 वर्ग फीट की विकसित जमीन देने के साथ किसान परिवारों के एक बेरोजगार वयस्क को रोजगार दिया जाए। किसान नेता ने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी एक बड़ा आंदोलन किया जा चुका है, जिसका समर्थन कांग्रेस ने किया था।

3 जनवरी से जारी है किसानों का धरना
साल 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार बनने पर उन्हें पूरा करने का वादा किया था। लेकिन सत्ता पर काबिज होने के बाद वह बीते 3 सालों मे वादे पूरे नही कर सकी है ,बल्कि नया रायपुर विकास प्राधिकरण से हर साल प्रभावित किसानों को मिलने वाली 15000 रुपए की राशि भी बंद कर दी गई है।
अपनी मांगो को लेकर किसान 3 जनवरी 2022 से लगातार नवा रायपुर में धरना दे रहे हैं। किसानों की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी मुलाकात हो चुकी है,के अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है। किसानों की कृषि मंत्री रविंद्र चौबे और वन मंत्री मोहम्मद अकबर से भी वार्ता मुलाकात हो चुकी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के रायपुर प्रवास के दौरान किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया था ,जिसके बाद मुख्यमंत्री ने किसान संगठन के नेताओं से मुलाकात करके मामले का जल्द ही हल निकालने का आश्वासन दिया था।
बहरहाल सरकार की तरफ से नवा रायपुर में कराया जा रहा सर्वे का काम किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।
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