पंजाब: कांग्रेस की क्या है आगे की रणनीति, क्या सिद्धू अब बदलेंगे अपने तेवर ? जानिए पूरा मामला
पंजाब में आचार संहिता लगने के साथ ही कोरोना का प्रकोप भी बढ़ रहा है। सभी सियासी दल अब डिजिटल मोड में चुनावी अभियान की तैयारियों में जुट गई है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस भी अब डिजिटल चुनावी अभियान की तैयारी कर रही है।
चंडीगढ़, 10 जनवरी 2022। पंजाब में आचार संहिता लगने के साथ ही कोरोना का प्रकोप भी बढ़ रहा है। सभी सियासी दल अब डिजिटल मोड में चुनावी अभियान की तैयारियों में जुट गई हैं। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस भी अब डिजिटल चुनावी अभियान की तैयारी कर रही है। पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले गुटबाज़ी भी देखने को मिल रही है। वहीं सूत्रों की मानें तो पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को यह निर्देश दिए गए है कि सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसा पोसट नहीं करें जिससे चुनाव में पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हों। क्योंकि कोरोना के मद्देनज़र सभी सियासी दल डिजिटल मोड में चुनावी अभियान पर ज़ोर दे रहे हैं। पार्टी की तरफ़ से सिद्धू को निर्देश दिया गया है कि चुनाव के मद्देनज़र या फिर किसी भी तरह का पोस्ट करने से पहले सलाह मशवरा कर लें।

चुनावी मोड में सक्रिय हुए सिद्धू
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू चुनाव की तारीख का ऐलान होने के बाद से ही चुनावी मोड में सक्रिय हो गए है। उन्होंने मीडिया से रूबरू होते होते हुए कहा कि डोर टू डोर कैंपेन के मुकाबले डिजिटल अभियान ज़्यादा कारगर है। क्योंकि छोटे से छोटे लोगों तक डिजिटल मीडिया की पहुंच है। चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस डिजिटल चुनावी अभियान चलाएगी। 15 जनवरी के बाद चीजें बदलने की उम्मीद है। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की, महिला सशक्तिकरण पर ज़ोर देते हुए उन्होंने के कहा कि महिलाओं की बेहतरी के लिए हमारे पास कई प्लान्स हैं। महिलाओं और छात्राओं से संबंधित जो भी घोषणाएं की गई है वह उन्हें सशक्त बनाने के लिए एक कारगर क़दम है।

डिजिटल अभियान के लिए कांग्रेस तैयार
नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया कि कांग्रेस जिला, विधानसभा और बूथ स्तर पर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर ऑनलाइन चुनावी अभियान के लिए तैयारी कर रहे हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप्प और अन्य डिजिटल माध्यम के ज़रिए कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बूथ लेवल पर चुनावी अभियान चला रहे है। इन सब मामलों मे सियासी जानकारों का कहना है कि सभी सियासी दलों के लिए डिजिटल रूप से चुनावी अभियान चलाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। आजकल सभी लोग इंटरनेट के ज़रिए डिजिटल मीडिया में सक्रिय है लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें स्मार्टफोन चलाने में असमर्थ हैं और वा आज भी साधारण हैंडसेट का इस्तेमाल करते हैं। चुनाव प्रचार प्रसार के लिए सभी तबकों के मतादाताओं से जुड़ना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल तौर पर सभी मतदाताओं से जुड़ना मुमकिन नही है फिर भी जिस पार्टी का वार रूम मज़बूत होगा वह डिजिटली चुनावी अभियान चलाने में सफल हो पाएगा।

सोशल मीडिया पर चुनावी अभियान
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के रवैये पर सियासी जानकारों का कहना है कि नवजोत सिंह सिद्धू अपनी बयानबाज़ी के लिए ज़्यादातर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। सिद्धू के सोशल मीडिया पर सभी सियासी दलों की निगाहें टिकी रहती हैं कि कब कौन सा हमला बोल दें। अकसर यह देखा गया है कि नवजोत सिंह सिद्धू दूसरी पार्टी के नेताओं पर कम और अपनी ही पार्टी के नेताओं पर हमलावर रहते हैं। अब कोरोना के चलते सभी सियासी दल डिजिटल मोड में चुनावी अभियान चला रही हैं। ऐसे में सिद्धू को सोशल मीडिया पर संभल को कोई भी पोस्ट डालना चाहिए। अगर सिद्धू ने अपने तेवर ढीले नहीं किए तो इसका ख़ामियाज़ा कांग्रेस को आगामी चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि सभी सियासी दल चुनावी एजेंडा अब सोशल मीडिया के ज़रिए ही मतदाताओं तक पहुंचाने की कोशिश में है। सिद्धू ने अगर थोड़ी सी भी चूक की तो विपक्षी दल उसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर कांग्रेस के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकते हैं।
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