Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

पंजाब के राज-काज में ये ‘लाल डायरी’ भला क्या बला है ?

चंडीगढ़, 21 मार्च। क्या पंजाब सरकार की ऐसी कोई 'लाल डायरी' होती थी जिसमें वैसे लोगों का नाम दर्ज होता था जिनसे बदला लिया जाना हो ? अगर पंजाब के नये मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 'लाल डायरी' की चर्चा नहीं की होती तो शायद इस बात का पता नहीं चलता।

what is red diary in the governance of Punjab discussed by CM Bhagwant Mann

पंजाब में नौकरशाही की राजनीतिक प्रतिबद्धता शासन की एक प्रमुख समस्या रही है। जब जिस दल की सरकार होती है कुछ बड़े अफसर अपनी स्वामीभक्ति उसके मुताबिक बदल लेते हैं। वे तटस्थ नहीं रहते। इसकी वजह से पक्षपात शुरू होता है। तब जख्मों का हिसाब करने के तैयार होती एक लाल डायरी।

भगवंत मान ने अफसरों को हड़काया

भगवंत मान ने अफसरों को हड़काया

यहां तक कि एक ही दल के मुख्यमंत्री को अपने पूर्ववर्ती सीएम के अफसरों पर भरोसा नहीं होता। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी सीएम बने थे तब उन्होंने मुख्यसचिव को बदल दिया था। लेकिन अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसी दल विशेष के लिए स्वामीभक्ति रखने वाले अफसरों को सख्त चेटावनी दी है। उन्होंने कहा है, मैं पहले के शासनों की तरह लाल डायरी नहीं रखता। मेरे पास केवल एक हरी डायरी है जिसमें सरकार की नयी कार्ययोजनाओं का ब्योरा है। लाल डायरी रखने वालों की तरह मैं राजनीतिक बदले की भावना से कोई काम नहीं करूंगा। सभी अफसर बिना किसी दबाव के ईमानदारी से काम करें। लोकसेवक के रूप में ईमानदारी पहली शर्त है। इस सरकार में भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं। उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई होगी। वह इसलिए क्यों कि जनता ने अपनी उम्मीदों को पूरा करने के लिए ही आम आदमी पार्टी की सरकार को चुना है। इसलिए सरकार की पहली प्रथामिकता जनता की सेवा करना है। ईमानदार नौकरशाही इसलिए जरूरी है कि क्योंकि सरकार जो भी योजनाएं बनाएगी उसको लागू करने की जिम्मेवारी अफसरों पर ही रहेगी। उनकी कार्यकुशलता पर ही सरकार की नीतियों की सफलता निर्भर करती है। इसलिए सिविल सेवा और पुलिस सेवा के अफसरों को जनहित का सम्मान करना होगा।

ये ‘लाल डायरी’ क्या है ?

ये ‘लाल डायरी’ क्या है ?

मार्च 2018 में सुखबीर सिंह बादल ने एक रैली की थी। इस रैली में उन्होंने एक लाल डायरी लहरा कर कहा था, ये लाल डायरी देखिए, मैं इसमें उन अफसरों के नाम लिख रहा हूं जो अकाली दल के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से प्रताड़ित कर रहे हैं। सरकारें आती हैं, जाती हैं। पांच साल में राजनीतिक बदलाव होते रहा है। लेकिन अफसर अपने सेवाकाल तक हमेशा कार्यपालिका का हिस्सा रहते हैं। इसलिए अफसरों को राजनीतिक भेदभाव से दूर रहना चाहिए। उन्हें किसी सरकारी दल के दबाव में काम नहीं करना चाहिए। वह इसलिए क्यों कि पांच साल बाद उन्हें अपने किये जवाब देना होगा। इस संदर्भ उन्होंने भटिंडा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम भी लिया था। उस पुलिस अधिकारी पर आरोप था कि उसने कांग्रेस सरकार के इशारे पर एक अकाली कार्यकर्ता के खिलाफ झूठा केस दर्ज किया था। यानी पंजाब में राजनीतिक प्रतिबद्धता वाले अफसरों से बदला लेने के लिए एक रेड डायरी हुआ करती थी। जैसा कि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा था।

पंजाब पुलिस में भ्रष्टाचार

पंजाब पुलिस में भ्रष्टाचार

2019 में एक सर्वे के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब का भारत में छठा स्थान है। लालबहादुर शास्त्री नेशनल एकैडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व निदेशक एम सी सक्सेना ने कहा था, पंजाब और उत्तर पूर्वी राज्यों के लोकसेवक देश भर में सबसे भ्रष्ट हैं। आरोप है कि पंजाब में ड्रग और रेत माफिया के तार अफसरों से जुड़े हैं। 2021 में खन्ना ड्रग केस में पंजाब पुलिस के आइजी परमराज सिंह उमरानंगल समेत चार पुलिस अफसरों को निलंबित किया गया था। 2017 से 2020 के दौरान ड्रग मामले में 47 पुलिसकर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया था। 17 को सस्पेंड किया गया था। पंजाब में ड्रग माफिया का जाल कितनी मजबूती से फैला हुआ है, यह एक और उदाहरण से समझा जा सकता है। पंजाब के जगदीश सिंह भोला ने कुश्ती में बड़ा नाम कमाया था। उसने भारत केसरी और रुस्तमे हिंद का खिताब जीता था। कुछ फिल्मों में उसने अभिनय भी किया था। कुश्ती में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1998 में उसे अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया था। खेल कोटा से उसकी पंजाब पुलिस में डीसपी के पद पर बहाली हुई। लेकिन जल्द ही ड्रग तस्करों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया।

अर्जुन पुरस्कार विजेता पुलिस अफसर बना ड्रग तस्कर

अर्जुन पुरस्कार विजेता पुलिस अफसर बना ड्रग तस्कर

जिस साल उसे अर्जुन पुरस्कार मिला उसी साल उसकी इज्जत मिट्टी मिल गयी। 1998 में ही जगदीश भोला को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के कारण नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। फिर वह गलत रास्ते पर चल पड़ा। 2013 में पंजाब पुलिस ने जब उसके घर पर छापा मारा तो वहां से 20 करोड़ रुपये की हेरोइन बरामद हुई। जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो करीब 6 हजार करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट का पर्दाफाश हुआ। इस मामले में पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह भोला को 12 साल की सजा हुई थी। भोला ड्रग केस में अकाली नेता और पूर्व मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया का नाम भी उछला था। घटना के आठ साल बाद दिसम्बर 2021 में विक्रम मजीठिया के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी थी। 2022 के चुनाव में मजीठिया ने अकाली दल के टिकट पर अमृतसर पूर्वी से चुनाव भी लड़ा था। नवजोत सिंह सिद्दू भी यहीं थे। लेकिन आप की जीवनजोत कौर ने दोनों को हरा दिया। अब पंजाब में राजनीति नयी करवट ले चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नौकरशाही को नये ढर्रे पर चलने का हुक्म सुना दिया है।

यह भी पढ़ें: पंजाब: CM भगवंत मान ने किया विभागों के बंटबारा, जानिए किसे कौन सा मंत्रालय मिला?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+