जालंधर में कांग्रेस को बड़ा झटका, जगबीर सिंह बराड़ की हुई अकाली दल में वापसी

सुखबीर सिंह बादल का जगबीर बराड़ को राजनीति में लाने में अहम किरदार रहा है। साल 2007 में जगबीर बराड़ ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पहली बार जालंधर कैंट हलके से शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर ही चुनाव लड़े और जीते भी

चंडीगढ़, अगस्त 16, 2021। पंजाब विधनासभा चुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टिया चुनावी तैयारियों में जुट चुकी हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी अपनी सियासी पकड़ मज़बूत बनाने के लिए पार्टी के उम्मीदवार चुनने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में सुखबीर सिंह बादल ने जालंधर कैंट विधानसभा सीट से जगबीर सिंह बराड़ को शिरोमणि अकाली दल का उम्मीदवार घोषित किया है। सोमवार को सुखबीर सिंह बादल ने जगबीर बराड़ को सिरोपा पहनाकर विधिवत तरीक़े से शिरोमणि अकाली दल में शामिल किया।

sukhbir singh badal

2007 में पहली बार जीते थे बराड़
सुखबीर सिंह बादल का जगबीर बराड़ को राजनीति में लाने में अहम किरदार रहा है। साल 2007 में जगबीर बराड़ ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पहली बार जालंधर कैंट हलके से शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर ही चुनाव लड़े और जीते भी थे। उससे पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। बराड़ की 20 साल तक इसी हलके में बतौर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) तैनाती रही थी। इसके चलते बराड़ की कैंट हलके के तमाम गांवों में अच्छी पैठ थी। उनका वहां के पंच तथा सरपंचों के साथ अच्छा तालमेल भी था। इसका फायदा 2007 के चुनाव में बराड़ को मिला था। साल 2012 के चुनाव में अकाली दल ने परगट सिंह को यहां से उम्मीदवार घोषित किया था। अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद परगट चुनाव जीते थे और बराड़ का पत्ता कट गया था।

2014 में कैप्टन और बराड़ थे साथ
जगबीर बराड़ ने साल 2014 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हाथ मिलाया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहली जगबीर बराड़ ने जालंधर कैंट में करवाई थी। इसी रैली के बाद जगबीर बराड़ की सियासत में नया मोड़ आया। उस वक़्त पंजाब कांग्रेस में प्रधान को लेकर कैप्टन वर्सेस प्रताप सिंह बाजवा जंग चल रही थी। कैप्टन को पार्टी ने साइडलाइन कर रखा था। जगबीर बराड़ के कैप्टन के पक्ष में आने के बाद पहली सफल रैली जालंधर कैंट हलके में हुई थी। रैली के बाद तो यह भी कहा जा रहा था कि कैप्टन ने हाईकमान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2017 में हाथ से जा रही सूबे की सत्ता को हासिल किया ए। लेकिन जगबीर बराड़ के समीकरण फिर खराब हो गए और परगट सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ कांग्रेस में शामिल होकर कैंट की सीट से दावा ठोक दिया। हाईकमान के इशारे पर कैप्टन भी कुछ नहीं कर पाए और बराड़ को अपना घर छोड़ना पड़ा।

शिअद में शामिल हुए बराड़
जगबीर बराड़ ने 5 साल बाद फिर से घर वापसी की है। जगबीर बराड़ के उम्मीदवार घोषित होने के बाद जालंधर कैंट की राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। वहीं कहा जा रहा है जगबीर बराड़ के घर वापसी से अब परगट की राजनीतिक स्थिति पर काफ़ी असर पड़ सकता है। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ से परगट को महासचिव बनाए जाने के बाद पार्टी में परगट और मजबूत हुए हैं। लेकिन कैंट हलके में उनकी यह मजबूती कितनी कामयाब होगी। यह तो आने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम ही बताएंगे। हालांकि यह भी कयास लगाया जा रहा है कि कुछ दिनों बाद परगट भी बडा सियासी उलट फेर कर सकते हैं।

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