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पंजाब: 'अब किसानों की जान की कीमत लग रही है', लखीमपुर खीरी मामले को लेकर BJP पर भड़के सुखबीर बादल

शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने यूपी की लखीमपुरी खीरी की घटना के बाद राज्य सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों असंतुष्टी ज़ाहिर की है।

चंडीगढ़, अक्टूबर 5, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र शिरोमणि अकाली दल भी सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है। आए दिन वह किसी न किसी मुद्गे पर राज्य और केंद्र सरकार को घेरते हुए सुर्खियों में बने रहते हैं। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने यूपी की लखीमपुरी खीरी की घटना के बाद राज्य सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों असंतुष्टी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि ये अस्थाई है हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार ने देश में किसान विरोधी माहौल बनाया है। ये सब किसान विरोधी माहौल बनाने का नतीजा है। किसान आंदोलन के दौरान एक साल में छह से सात सौ के क़रीब किसानों की जानें चली गई लेकिन केन्द्र सरकार हल निकालने के लिए तैयार नहीं है।

क्या एक जान की कीमत 45 लाख है ?

क्या एक जान की कीमत 45 लाख है ?

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है कि मुल्क में अमन शांति क़ायम रहे और देश कामयाबी को ओर बढ़े, देश का अन्नदाता वो परेशान हैं वह तीन कृषि कानून नहीं चाहते हैं बावजूद इसके किसानों पर कृषि कानून थोपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसानों के हक़ में सही फैसला नहीं लेगी, इस तरह के हादसे होते रहेंगे। किसानों की परेशानी का हल तब निकलेगा जब सरकार उनके मुद्दे पर फैसला लेगी। वहीं सुखबीर सिंह बादल ने लखीमपुर खीरी की घटना के बाद यूपी सरकार की तरफ से किए गए मुआवजे के एलान पर कहा कि क्या एक जान की कीमत 45 लाख है? इससे और बुरी बात क्या होगी कि अब देश में किसानों की जान की 'कीमत' लगाई जा रही है।

एक्टिव मोड में प्रकाश सिंह बादल

एक्टिव मोड में प्रकाश सिंह बादल

प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि किसानों को लेकर उनका लंबा संघर्ष रहा है। उनकी पार्टी ने जो कुछ भी किसानों के लिए किया है वह किसी दूसरी पार्टी ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब श्री हरिमंदिर साहिब पर हमला हुआ था तो देश के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह थे और गवर्नर बूटा सिंह थे, लेकिन उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया था। अब जब केन्द्र सरकार ने किसान विरोधी क़ानून लागू किए हैं तो हरसिमरत कौर बादल ने किसानों के हक़ के लिए ही मंत्री पद छोड़ा है, ऐसा कोई नहीं करता। प्रकाश सिंह बादल ने बेअदबी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता उन पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि कांग्रेस पार्टी ने ही श्री हरिमंदिर साहिब पर हमला करवाया था। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब को तोड़ दिया गया, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गोलियां चलाईं गई। क्या वह बेअदबी कम थी।

कैप्टन पर साधा निशाना

कैप्टन पर साधा निशाना

प्रकाश सिंह बादल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला करते हुए कहा कि कैप्टन ने उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया था, जिसमें वह बरी हो गए। उन्होंने कैप्टन पर मानहानि का केस भी किया मगर उसे वापस ले लिया। उन्होंन ने कहा कि वह कभी भी बदले की भावना से काम नहीं करते हैं इसलिए केस वापस ले लिया। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि सियासी पार्टियों के पीछे लगकर आपस में फूट नहीं डालें, सब साथ मिलकर कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ संघर्ष करें। अभी 3 महीने का वक़्त बचा हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की सरकार बननी तय है। उन्होंने कहा कि वह ऐलान करते हैं कि अगर इस सरकार ने मुआवज़ा नहीं दिया तो वह आते ही किसानों को उनका मुआवज़ा देंगे। चाहे वह सड़कों के लिए ली जाने वाली जमीनों का हो या फिर गुलाबी सुंडी की वजह से हुए फसल नुकसान का मुआवज़ा हो, किसानों को उनका हक़ दिया जाएगा।


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