'क्या न्याय मांगना गुनाह है?’,अनशन पर बैठे विधायक संजीव झा ने दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल
Sanjeev Jha Protest: दिल्ली की राजनीति में पांडव कुमार केस अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया है कि पांडव कुमार के परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाने पर उन्हें पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया।
संजीव झा शांतिपूर्ण अनशन पर बैठे थे और उनकी मांग थी कि पांडव कुमार के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। लेकिन मामला तब और गरमा गया, जब विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।

अनशन से गिरफ्तारी तक क्या हुआ?
संजीव झा ने कहा कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से धरने और अनशन पर बैठे थे। उनका उद्देश्य सिर्फ इतना था कि पांडव कुमार के परिवार को न्याय मिले और सरकार उनकी आर्थिक मदद करे।
लेकिन विधायक का आरोप है कि प्रशासन ने बातचीत या समाधान निकालने के बजाय पुलिस कार्रवाई का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और गिरफ्तार करने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक अधिकारों और विरोध की स्वतंत्रता से भी जुड़ गया है।
'क्या न्याय मांगना अपराध है?'
संजीव झा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कई तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी गरीब परिवार के लिए न्याय मांगना अपराध है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है। विधायक ने यह भी कहा कि क्या सिर्फ इसलिए उनकी आवाज दबाई जा रही है क्योंकि वे एक बिहारी युवक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उनके मुताबिक यह लड़ाई सिर्फ पांडव कुमार के परिवार की नहीं, बल्कि उन लाखों मेहनतकश बिहारी लोगों के सम्मान की भी है, जो देशभर में काम करते हैं और सम्मान के साथ जीना चाहते हैं।
1 करोड़ मुआवजा और नौकरी की मांग
विधायक की मुख्य मांगों में:
- पांडव कुमार के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता
- परिवार के एक सदस्य को नौकरी
- मामले में निष्पक्ष न्याय शामिल हैं।
संजीव झा का कहना है कि सरकार अगर संवेदनशील होती तो परिवार को तुरंत राहत देती, लेकिन इसके बजाय विरोध करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
बिहारी समाज का मुद्दा क्यों बना?
इस पूरे मामले में "बिहारी समाज" का मुद्दा भी तेजी से उभरकर सामने आया है। संजीव झा ने कहा कि पांडव कुमार सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उन युवाओं का चेहरा हैं जो मेहनत और संघर्ष के दम पर जिंदगी आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब बिहारी समाज के सम्मान और अधिकार की बात की जाती है, तो उसे राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली और दूसरे राज्यों में बड़ी संख्या में रहने वाले बिहारी वोटर्स को लेकर यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
सरकार बनाम विपक्ष की नई लड़ाई?
यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था या मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष इसे सरकार की "संवेदनहीनता" और "दमनकारी रवैये" के तौर पर पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और किसी भी विरोध प्रदर्शन को तय नियमों के तहत ही किया जा सकता है।
हालांकि संजीव झा ने साफ कहा है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक पांडव कुमार के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।














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