पंजाब: कांग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दावेदारों के लिए बना नियम, पढ़िए क्या है पूरा मामला
पंजाब में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। सभी सियासी पार्टियां अपने तरीक़े से चुनावी रणनीतियों को तैयार करने में जुट चुकी हैं।
चंडीगढ़, सितंबर 11, 2021: पंजाब में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। सभी सियासी पार्टियां अपने तरीक़े से चुनावी रणनीतियों को तैयार करने में जुट चुकी हैं। इस कड़ी में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी चुनावी प्रचार प्रसार में काफ़ी एक्टिव नज़र आ रहे हैं। उन्होंने पंजाब कांग्रेस के संगठन को मज़बूत करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में नवजोत सिंह सिद्धू ने सांसदों, विधायकों और बड़े नेताओं से प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल करने और जिला अध्यक्ष बनाने के लिए नामों के सुझाव मांगे हैं।

टिकट दावेदारों के लिए नियम
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब प्रभारी हरीश रावत, कार्यकारी प्रधानों के अलावा नज़दीकी नेताओं के साथ सलाह मशवरा किया। जिसके बाद उन्होंने फ़ैसला लिया कि जिला अध्यक्ष बनने वाले नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए आवेदन की इजाज़त नहीं होगी। वहीं उनका नाम हाईकमान को भेजे जाने वाले पैनल में भी शामिल नहीं किया जाएगा। नवजोत सिंह सिद्धू ने इसके पीछे यह दलील दी है कि चुनाव के दौरान जिला अध्यक्ष को टिकट देने का असर पूरे शहर के प्रचार अभियान पर पड़ता है।
नए चेहरों के लिए रास्ता साफ़
नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि ज्यादातर मामलों में पुराने अध्यक्ष की तरफ़ से नियुक्त किए गए पदाधिकारी नए कार्यकारी अध्यक्ष के साथ क़दम से क़दम मिला कर काम नहीं करते हैं। आपको बता दें कि इस फ़ैसले के तहत पार्टी के नेताओं को ज़िला अध्यक्ष बनाने के लिए नाम का सुझाव देने के लिए बोला गया है। इसकी वजह से विधानसभा चुनाव लड़ने की ख़्वाहिश रखने वाले लोगो जिला अध्यक्ष बनने की दावेदारी से किनारा कर सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि नवजोत सिंह सिद्धू के इस फ़ैसले से नए चेहरे को आगे लाने का रास्ता साफ़ हो जाएगा।
4 सदस्यीय कमेटी का गठन
वहीं पंजाब के सीएम कैप्टन अमंरिदर सिंह ने राजनीतिक मामलों पर फैसला और राजनीतिक समस्याओं के हल के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की कमान मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह को सौंपी गई है। यह कमेटी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर रहेगी और राजनीतिक समस्याओं का हल निकालेगी। पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह और विधानसभा चुनाव से पहले इस कमेटी का गठन काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के साथ भले ही 15 सलाहकार और ओएसडी जुड़े हुए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी राजनीति पृष्ठभूमि से नहीं है। शायद यही वजह है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों की हमेशा से शिकायत रहती है कि उनकी शिकायतें सीएम तक नहीं पहुंच पाती हैं। कांग्रेस में चल रहे कलह को सुलझाने के लिए पार्टी हाईकमान की तरफ़ बनाई गई कमेटी के पास भी यह मुद्दा रखा गया था।
ढिल्लों की कैप्टन खेमे में वापसी
ग़ौरतलब है कि लुधियाना सेंट्रल के विधायक सुरेंदर डाबर, चब्बेवाल के विधायक डॉ. राजकुमार चब्बेवाल और फरीदकोट के विधायक कुशलदीप ढिल्लों इस कमेटी के सदस्य होंगे। खास बात यह है कि कमेटी के गठन के साथ कुशलदीप ढिल्लों की कैप्टन खेमे में वापसी हो गई है। बीते कई दिनों से कुशलदीप ढिल्लों के मुख्यमंत्री से नाराज होने की खबरें सामने आ रही थीं। इसी वजह से वह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के खेमे में चल रहे थे। राजनीतिक जानकारों का ये भी कहना है कि इसकी वजह नवजोत सिंह सिद्धू के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने की रेस में पीछे रह जाने का भी डर है।
कांग्रेस भवन में पहुंच रहे लोग
आपको बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा कांग्रेस भवन में सप्ताह में पांच दिन एक मंत्री के बैठने का कार्यक्रम शुरू किया था। जिसमें बड़ी तादाद में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि इस कमेटी की कमान लाल सिंह के हाथों में सौंपी गई है। वह न सिर्फ पूर्व मंत्री हैं, बल्कि कांग्रेस का कार्यकारी प्रधान भी रह चुके हैं। राज्य में चाहे विधानसभा चुनाव, निकाय चुनाव या फिर पंचायत चुनाव हो लाल सिंह को राजनीति मामलों का खासा अनुभव है।
ये भी पढ़ें: पंजाब: सिद्धू के बाद अब 'यूथ कांग्रेस' ने बढ़ाया अमरिंदर का सिरदर्द, चुनाव से ठीक 6 महीने पहले दिया बड़ा झटका












Click it and Unblock the Notifications