Punjab: कैसे चुनावों से पहले अवैध खनन और रेत माफिया के बीच फंस गई है कांग्रेस ?
चंडीगढ़, 25 जनवरी: पंजाब में पिछली बार चुनावों में कांग्रेस ने नशे के कारोबार के साथ-साथ अवैध खनन को लेकर जमकर बवाल काटा था। इस चुनाव में वही मुद्दा उसके गले की फांस बन चुका है। पांच साल बाद प्रदेश में अवैध खनन का मामला खत्म तो नहीं ही हुआ है, रेत माफियाओं की वजह से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी आरोपों के घेरे में आ चुके हैं। चन्नी पर सीधे आलाकमान का आशीर्वाद है, इसलिए विपक्ष के लिए यह मामला चुनाव के मौसम में और भी मजेदार बनता जा रहा है। इसकी शुरुआत आम आदमी पार्टी ने की थी और भाजपा शासित केंद्र सरकार के मातहत आने वाले प्रवर्तन निदेशालय ने करोड़ों रुपये की बरामदगी करके इसमें पूरी तरह से उबाल ला दिया है।

अवैध खनन की वजह से आरोपों के घेरे में कांग्रेस सरकार
2017 में कांग्रेस पंजाब में रेत माफियाओं की गुटबंदी, इसके खनन पर एकाधिकार और खनन माफियाराज खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। तब कांग्रेस दावे कर रही थी कि रेत माफियाओं की वजह से प्रदेश में आटे से महंगा रेत हो चुका है। पांच साल बाद पूरी कांग्रेस सरकार ही उन्हीं आरोपों से घिर चुकी है। इस बार उंगलियां सीधे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की ओर भी उठ रही हैं, जो आलाकमान के आशीर्वाद से कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह पर सीएम बने हैं। क्योंकि, 2018 में दर्ज एक केस के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने जो छापे डाले हैं, उसने रेत के अवैध खनन की भयानकता को जगजाहिर कर दिया है। अवैध खनन के इस मामले में छापेमारी सीएम चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह हनी के ठिकानों पर पड़ी हैं, जिसमें केंद्रीय एजेंसी ने 10 करोड़ रुपये कैश, 21 लाख रुपये का सोना और 12 लाख रुपये की एक हाथ की घड़ी बरामद की है।

मुख्यमंत्री चन्नी पर भी लग रहे हैं आरोप
इस मामले में सीएम चन्नी ने अभी तक उनके खिलाफ लग रहे सभी आरोपों को यह कहकर खारिज किया है कि ये रुपये उनके घर से नहीं बरामद हुए हैं और इसे विधानसभा चुनावों की वजह से उछाला जा रहा है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि रेत माफियाओं के कारनामों के चलते कांग्रेस को सिर्फ विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। होशियारपुर जिले के उर्मर टांडा से पार्टी एमएलए संगत सिंह गिलजियां ने 2020 के बजट सत्र में ही अपने चुनाव क्षेत्र में ब्यास नदी के किनारे अवैध खनन का मामला उठाया था। वो अब चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जा चुके हैं। सीएम चन्नी ने सितंबर, 2021 में अपने कैबिनेट से पूर्व के पांच मंत्रियों को बाहर रखा था, लेकिन जल संसाधन मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया को फिर से शामिल कर लिया था। उसी बजट सत्र में सरकारिया और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी विधायक की ओर से तेलंगाना रेत खनन मॉडल अपनाने के प्रस्ताव को सदन में खारिज कर दिया था। यही नहीं राणा गुरजीत सिंह को 2017 में इसलिए कैबिनेट से बाहर होना पड़ा था, क्योंकि खनन मामले में कथित रूप से उनके कर्मचारी शामिल पाए गए थे। लेकिन, जब दिल्ली के आशीर्वाद से चन्नी को कुर्सी मिली तो राणा भी वापस कैबिनेट मंत्री बन गए।

कैप्टन भी फोड़ रहे हैं 'रेतीले बम'
रविवार को पूर्व सीएम और पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर से ने मीडिया के सामने यह कबूल किया है कि 2018 के मार्च में अपने चॉपर से उन्होंने सतलुज नदी के किनारे अवैध खनन होते देखा और कार्रवाई शुरू की तो उस दौरान तत्कालीन कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का नाम भी सामने आया था। हालांकि, कैप्टन ने उन करीब 40 कांग्रेसियों का नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया, जो उनके मुताबिक अवैध खनन समेत भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल थे और जिनका नाम वह मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा था। वैसे अब कांग्रेस यह कहकर अपना बचाव कर रही है कि उस समय मुख्यमंत्री रहते हुए कैप्टन के पास अगर सबूत थे तो उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की। हालांकि, कैप्टन ने पिछले साल 3 नवंबर को कांग्रेस छोड़ते वक्त सोनिया को लिखी चिट्ठी में अवैध रेत खनन का जिक्र किया था और यह भी कहा था कि इसमें कांग्रेस के कई एमएलए और मंत्री भी शामिल हैं। उन्होंने अपने पास पूरी लिस्ट होने की भी बात कही थी।
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अवैध खनन में अबतक हुई कार्रवाई
पंजाब सरकार की एजेंसियों ने पिछले साल 1 अप्रैल से लेकर अबतक अवैध खनन के मामले में 711 एफआईआर दर्ज किए हैं। इन मामलों में 1,068 आरोपी बनाए गए हैं, जिनमें से 809 पंजाब पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। इस दौरान अवैध खनन में लगे 988 विभिन्न तरह के वाहन भी जब्त किए गए हैं। जिन जिलों में ज्यादातर एफआईआर दर्ज हैं, वे हैं- मोहाली, फिरोजपुर, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, नवांशहर, होशियारपुर, फाजिल्का और रोपड़। राज्य कैबिनेट ने पिछले साल मार्च में प्रवर्तन निदेशालय-खनन गठित करने को मंजूरी दी थी, जिसकी अगुवाई पुलिस के एडिश्नल डीजीपी रैंक के अधिकारी को दी गई है और यह पिछले साल 1 अप्रैल से यह कार्यरत है। लेकिन, इस निदेशालय के पास अपना पुलिस फोर्स नहीं है और इसे जिला पुलिस और खनन विभाग के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन, इसे जिम्मेदारी खनन और खनिजों के उत्पादन और बिक्री से लेकर उसके परिवहन तक सबपर निगरानी रखने की दी गई है।

पंजाब में रेत माफिया का राज ?
वैसे कहने के लिए तो पंजाब की कांग्रेस सरकार ने रेत के दाम दो बार तय किए हैं, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि यह तय कीमत से कहीं ऊंचे दाम पर बिकती हैं। पहले अक्टूबर, 2019 में इसकी कीमत तय की गई, जिसके मुताबिक ठेकेदार 9 रुपये प्रति क्यूबिक फीट से ज्यादा पर इसे नहीं बेच सकते, जिसमें की ढुलाई भी शामिल थी। जब चन्नी को राज्य का ताज मिला तो उनकी कैबिनेट ने रेत और बजरी की कीमत सिर्फ 5.50 रुपये प्रति क्यूबिक फीट तय की। लेकिन, आम आदमी के पॉकेट पर से कोई भार कम नहीं हुआ और पंजाब में रेत माफिया का राज कायम है। (रेत खनन की तस्वीरें प्रतीकात्मक)
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