पंजाब की मान सरकार ने हरियाणा को अधिक पानी देने से किया खारिज, सर्वदलीय बैठक में लिया फैसला

Punjab Haryana Water Dispute: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शुक्रवार, 5 अप्रैल को चंडीगढ़ में बुलाई गई एक अहम सर्वदलीय बैठक में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के उस फैसले को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया, जिसमें हरियाणा को भाखड़ा डैम से 8,500 क्यूसिक पानी छोड़े जाने की बात कही गई थी।

यह बैठक दो घंटे तक चली और इसमें पंजाब के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद मीडिया से संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "हम सभी एकमत हैं कि पंजाब के जल अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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हरियाणा को एक बूंद अतिरिक्त पानी भी नहीं दिया जाएगा।" उन्होंने बताया कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की स्वीकृति के बाद सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

Punjab Haryana Water Dispute: प्रधानमंत्री से मिलने का प्रस्ताव

बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि सभी राजनीतिक दल मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलें और पंजाब के जल अधिकार का मुद्दा उनके समक्ष रखें। जब सीएम मान से पूछा गया कि क्या वे इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, तो उन्होंने कहा, "हम विधानसभा के विशेष सत्र के बाद इस पर फैसला लेंगे। जरूरत पड़ी तो प्रधानमंत्री से मिलने का समय भी लेंगे।"

मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी के इस फैसले को 'आपातकाल जैसी स्थिति' करार देते हुए कहा, "हम पहले से ही मानवीय आधार पर हरियाणा को 4,000 क्यूसिक पानी दे रहे हैं। अब और अधिक पानी की मांग की जा रही है, जिसे हम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।" उन्होंने कहा कि यह पंजाब के जीवन और अस्तित्व से जुड़ा मामला है और इसके लिए सभी दल एकजुट हैं।

Punjab Haryana Water Dispute: सभी राजनीतिक दलों ने दिखाई एकजुटता

बैठक में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भुंदर, भाजपा पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़, बहुजन समाज पार्टी के नेता अवतार सिंह करीमपुरी और कांग्रेस के त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा व राणा कंवरपाल सिंह काइपी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। सभी ने स्पष्ट किया कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि पंजाब की जीवनरेखा-जल-का मामला है।

मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट कहा कि जल वितरण का कोटा तकनीकी समिति द्वारा तय किया गया है और उसे किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, "आप चाहें तो इसे महीनों तक उपयोग करें, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि मांग बढ़ गई है, इसलिए अधिक पानी चाहिए।"

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के लोग सहृदय हैं। "अगर हमारे पास पानी होता, तो हम जरूर बाँटते। आखिर हम भाई घनैया की धरती से हैं, जो घायल सैनिकों को बिना किसी भेदभाव के पानी पिलाते थे

Punjab Haryana Water Dispute: सुनील जाखड़ ने किया मुद्दे के राजनीतिकरण पर सवाल

भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने कहा, "जल का बंटवारा तय है। हमारे पास एक बूंद अतिरिक्त नहीं है।" हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दिया गया।

उन्होंने कहा कि "ऐसे समय में हरियाणा को थोड़ा अतिरिक्त पानी देना सामान्य प्रक्रिया रही है। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि पानी नहीं है, तो इसे जबरन नहीं लिया जा सकता। यह संघीय ढांचे के खिलाफ है,"।

जाखड़ ने यह भी कहा कि सभी दलों को प्रधानमंत्री या गृहमंत्री से मिलना चाहिए ताकि यह एक गलत मिसाल न बने। उन्होंने कहा, "मैं पंजाबी हूँ, और मुझे किसी से प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। मैं पंजाब के साथ हूँ।" यह टिप्पणी संभवतः मंत्री अमन अरोड़ा की उस चुनौती की प्रतिक्रिया थी जिसमें उन्होंने जाखड़ से कहा था कि यदि वे पंजाबी हैं तो उन्हें इस मुद्दे पर पंजाब के साथ खड़ा होना चाहिए।

वहीं शिरोमणि अकाली दल के नेता बलविंदर सिंह भुंदर ने भी सभी दलों की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा, "हम सब साथ हैं। यह कोई राजनीतिक विवाद नहीं है, यह पंजाब के हित का मुद्दा है, और इस पर हम सब एकजुट हैं।"

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