पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की सूची रवनीत बिट्टू और मनीष तीवारी का नाम आगे, जानिए दोनों की ख़ूबियां

पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन करीब आ रहे हैं वहीं पंजाब कांग्रेस में कलह पर वीराम नहीं लग पाया है। कांग्रेस आलाकमान एक बार फिर पंजाब कांग्रेस में बदलाव कर सकती है।

चंडीगढ़, अक्टूबर 6, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन करीब आ रहे हैं वहीं पंजाब कांग्रेस में कलह पर वीराम नहीं लग पाया है। कांग्रेस आलाकमान एक बार फिर पंजाब कांग्रेस में बदलाव कर सकती है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफ़ा मंज़ूर कर सकती है। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की सूची में रवनीत सिंह बिट्टू,मनीष तीवारी और प्रताप सिंह बाजवा का नाम शामिल है। नवजोत सिंह सिद्धू ने 28 सितंबर को चन्नी सरकार के नियुक्ति के फ़ैसले पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था। उसके बाद सीएम चन्नी ने सिद्धू के साथ बैठक भी की थी, कुछ मुद्दों पर सहमती भी बनी लेकिन सिद्धू एडवोकेट जनरल की नियुक्ती के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ट्वीट के ज़रिए लगातार अपने ही सरकार पर हमलावर रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान सिद्धू का इस्तीफ़ा मंजूर कर सकता है।

सिद्धू का इस्तीफ़ा हो सकता है मंज़ूर

सिद्धू का इस्तीफ़ा हो सकता है मंज़ूर

कांग्रेस आलाकमान कई दिनों से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की कमान नवजोत सिंह सिद्धू को सौंपने का मन बना रही थी लेकिन सिद्धू की तल्ख तेवर की वजह से अब कांग्रेस हाईकमान विकल्प की तलाश में जुट गई है। सियासी गलियारों में यह क़यास लगाए जा रहे हैं कि रवनीत सिंह बिट्टू, मनीष तिवारी और प्रताप सिंह बाजवा पर कांग्रेस आलाकमान विचार कर रही है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष में सबसे पहले रवनीत सिंह बिट्टू का नाम आ रहा है। आइए जानते हैं रवनीत सिंह बिट्टू का सियासी इतिहास कैसा रहा है। रवनीत सिंह बिट्टू शुरुआती दौर में किसानी करते थे।

रवनीत बिट्टू का इतिहास

रवनीत बिट्टू का इतिहास

रवनीत सिंह बिट्टू ने 2009 में पहली बार आनंदपुर साहिब से 15 वीं लोकसभा चुनाव लड़ा और एसएडी के उम्मीदवार डॉ. दलजीत सिंह चीमा को 60 हज़ार से ज़्यादा वोटों से मात देकर जीत हासिल की। वहीं उन्होंने 2009 में पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पंजाब के युवाओं में मादक पदार्थों की लत के खिलाफ अभियान भी शुरू किया। 2014 में लुधियाना से दूसरी बार उन्होंने 16वीं लोकसभा चुनाव में एएपी के हरविंदर सिंह फूलका को 20 हज़ार वोटों से हराकर जीत दर्ज की। 2019 फिर से उन्होंने लुधियाना से 17वीं लोकसभा चुनाव में चुनाव में जीत दर्ज की और 70 हज़ार से ज़्यादा मतों के एलआईएसपी के सिमरजीत सिंह बैंस को हराया।

मनीष तिवारी का इतिहास

मनीष तिवारी का इतिहास

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की सूची में मनीष तिवारी का नाम दूसरे नंबर पर है। आइए उनके सियासी सफ़र के बारे में भी आपको रूबरू करवाते हैं। पेशे से वकील मनीष तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय से बाहर प्रैक्टिस करते थे। मनीष तिवारी छात्र जीवन से ही सियासत में सक्रिय थे। उन्होंने सियासी सफ़र की शुरुआत एनएसयूआई से की और बाद में कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय समिति के सदस्य बने। पहली बार वह 2009 में अकालीदल के गुरचरण सिंह को हराने के बाद लोकसभा लिए चुने गए थे। 2009 से 2014 तक उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सूचना और प्रसारण के तौर पर में भी काम किया। बीमारी की वजह से उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 2019 में कांग्रेस ने उन्हें आनंदपुर साहिब से मैदान में उतारा जिसके बाद उन्होंने 46 हज़ार से ज़्यादा वोटों से शिरोमणि अकाली दल के प्रोफ़ेसर प्रेम सिंह चंदुमाजरा को हराकर जीत का सेहरा अपने नाम किया।

पंजाब कांग्रेस में कलह

पंजाब कांग्रेस में कलह

पंजाब कांग्रेस लंबे वक़्त से अंदुरूनी कलह से जूझ रही है, राजनीतिक सलाहकारों की मानें तो नवजोत सिंह सिद्धू की वजह से ही पंजाब कांग्रेस में खेमेबाज़ी शुरू हुई है। हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू का जब भी पार्टी में किसी से विवाद हुआ तो उन्हें हाईकमान का साथ मिला। लेकिन इस बार जो सिद्धू ने इस्तीफ़ा दिया तो उन्हें आलाकमान का समर्थन नहीं मिला और वह कमज़ोर पड़ गए। सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सिद्धू हर किसी से उलझने में लगे हुए हैं। वह सिर्फ़ और सिर्फ़ कुर्सी की वजह से सब से पंगे ले रहे हैं। चर्चा तो यह भी हो रही थी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह पर नवजोत सिंह सिद्धू सीएम बनना चाहते थे। इसलिए सुखजिंदर सिंह रंधावा की ताजपोशी रुकवा दी। लेकिन जब चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर सहमति बनी तो उनके कामकाज में दखल देना शुरू कर दिया। क्योंकि वह ख़ुद को सुपर सीएम साबित करना चाहते थे।


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