परगट सिंह के सहारे दोआबा में सेंध मारेगी कांग्रेस, नए महासचिव पर दांव खेल सकते हैं सिद्धू
पंजाब कांग्रेस संगठन को मज़बूत और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता पर दोबारा क़ाबिज होने के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष लगातार एक पर एक नए फ़ैसले लेते जा रहे हैं।सिद्धू आज अपने लिए दो मीडिया सलाहकार की नियुक्ती की है।
चंडीगढ़, अगस्त 18, 2021। पंजाब कांग्रेस संगठन को मज़बूत और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता पर दोबारा क़ाबिज होने के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष लगातार एक पर एक नए फ़ैसले लेते जा रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने आज अपने लिए दो मीडिया सलाहकार की नियुक्ति की है। इससे पहले उन्होंने अपने लिए चार सलाहकार नियुक्त किए थे। हाल ही में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया है। वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए विधायक मदनलाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस अपनी तैयारी में जुटी हुई है।

'विपक्ष का काम है आरोप लगाना'
विधायक मदन लाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक अपने-अपने हल्के में काफ़ी सक्रिय हैं। उनसे जब ये पूछा गया कि विपक्ष आप पर रेत माफिया, नकली शराब बिकवाने का आरोप लगा रहा है। इस पर क्या कहना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि हमारा काम बोलता है हमने क्षेत्र में काफ़ी विकास किया है इसलिए विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं तो झूठे आरोप लगा रही है।
प्रोग्रेस रिपोर्ट से दिख जाएगा विकास
विधायक मदन लाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक का प्रोग्रेस रिपोर्ट देखने से अंदाज़ा मिल जाएगा कि हमलोगों ने कितना विकास किया है। विपक्षी पार्टी का काम है आरोप लगाना और हमारा काम है विकास करना, इसी सिद्धांतों पर हम लोग काम कर रहे हैं। वहीं उन्होंने कहा कि परगट सिंह काफी अच्छे नेता हैं उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाने के साथ ही पंजाब में कांग्रेस के पुनर्गठन की शुरुआत हो गई है। विधायक परगट सिंह के के महासचिव बनने से दोआबा कांग्रेस के समीकरण बदलने लगे हैं। उन्हें दोआबा के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जा रहा है।
परगट को दोआबा का इंचार्ज बनाने की तैयारी
सियासी जानकार बताते तजुर्बे के ऐतबार से अगर देखा जाए तो परगट सिंह को संगठन का तजुर्बा नहीं है, लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने विधायक परगट सिंह का कद बढ़ाकर उन्हें दोआबा का इंचार्ज बनाने की तैयारी शुरू कर ली है। आपको बता दें कि दोआबा ही ऐसा इलाका है, जिसके बलबूते पर कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है। दोआबा में होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला और जालंधर का इलाका है। दोआबा में कांग्रेस ने 2002 में प्रचंड बहुमत हासिल किया था जिसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार सत्ता में आई थी। वहीं दोआबा में 2007 और 2012 में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की लहर में कैप्टन की सरकार चली गई और बादल की सरकार सत्ता में आई।
जगबीर बराड़ की एंट्री से कांग्रेस को झटका
सिद्धू के लिए दोआबा सत्ता की कुंजी है और दोआबा में उनके पास विश्वासपात्र नेता परगट सिंह ही है, जो 2016 से उनके साथ हैं। कैप्टन सरकार के खिलाफ आवाज उठाने में सिद्धू के साथ परगट कंधे से कंधा मिलाकर चलते आए हैं। वहीं अब परगट सिंह के लिए चुनौती की बात की जाए तो कांग्रेस के सीनियर नेता रहे जगबीर बराड़ के शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लेने कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जालंधर कैंट सीट को लेकर नए समीकरण भी बनने लगे हैं।
बहुजन समाज पार्टी की अच्छी पकड़
हॉकी के पूर्व कप्तान और मौजूदा विधायक परगट सिंह के लिए जगबीर बराड़ चुनौती के तौर पर देखे जा रहे हैं। 2017 में जिस तरह से विधायक परगट सिंह ने जीत दर्ज की थी उसी तरह से उन्हें परफारमेंस को बरकरार रखते हुए 59 हज़ार के करीब वोट लाने होंगे अगर परगट सिंह पिछली बार की तरह वोट लाने से ज़रा सा भी चूके तो अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के रूप में बना गठबंधन उनके लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। बता दें कि जगबीर बराड़ पूर्व में इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी की अच्छी पकड़ है।












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