चन्नी-वड़िंग टकराव के बीच 66 नेताओं की दिल्ली परेड, क्या Punjab Congress में होने वाला है बड़ा बदलाव?
Punjab Congress Crisis: पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव में समय बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने अभी से अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व में हलचल है कि अगर अंदरूनी गुटबाजी और संगठन की कमजोरियों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो 2022 जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है।
यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के 66 वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया है। राज्य की राजनीतिक स्थिति और संगठन की हालत पर फीडबैक लेना शुरू कर दिया है।

यह बैठक पंजाब कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रहे हैं। आने वाले दिनों में पार्टी के संगठन और नेतृत्व में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Charanjit Singh Channi vs Raja Warring: क्यों हरकत में आया कांग्रेस हाईकमान?
पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझ रही है। पार्टी के अलग-अलग नेता अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने में लगे हुए हैं, जिससे संगठन कमजोर होता दिखाई दे रहा है। 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी। अब पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि अंदरूनी विवाद फिर चुनावी नुकसान का कारण बने।
अजय माकन की अगुवाई में 3 सदस्यीय 'कमेटी
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक- पंजाब कांग्रेस के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और अंदरूनी कलह को सुलझाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने तीन वरिष्ठ नेताओं का एक विशेष पैनल (कमेटी) बनाया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष अजय माकन इस पैनल के अध्यक्ष हैं। उनके साथ मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को इस कमेटी में शामिल किया गया है।
यह कमेटी दिल्ली में पंजाब के नेताओं से वन-टू-वन मुलाकात कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अजय माकन का यह पैनल 20 जून तक अपनी फाइनल रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप देगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि पंजाब कांग्रेस का बॉस बदला जाएगा या नहीं।
पहले दिन बंद कमरे में बनी प्लानिंग
गौरतलब है मंगलवार, 17 जून को दो दिवसीय समीक्षा के पहले दिन अजय माकन के पैनल ने 33 प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली और राज्य के मौजूदा हालात पर अपनी राय रखी।
बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य अंबिका सोनी, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला शामिल थे। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल, शमशेर सिंह डुल्लो और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी मौजूद रहे।
चन्नी VS राजा वड़िंग: पंजाब कांग्रेस के दो ध्रुव
इस समय पंजाब कांग्रेस में असली लड़ाई दो बड़े नेताओं के बीच वर्चस्व को लेकर है -एक तरफ हैं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और दूसरी तरफ हैं वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग। पार्टी के अंदर दोनों नेताओं को अलग-अलग गुटों का समर्थन प्राप्त है।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग फिलहाल पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, लेकिन पार्टी का एक वर्ग उनके कामकाज और संगठन को संभालने के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व में बदलाव किया जाए और चन्नी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। यही वजह है कि पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चर्चा और गुटबाजी दोनों तेज हो गई हैं, जिसके चलते हाईकमान भी नेताओं की राय जानकर आगे की रणनीति तय करने में जुटा है।
दिल्ली की बैठक में तीखी नोकझोंक
कांग्रेस पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मई महीने में दिल्ली में हुई एक सिक्रेट मीटिंग में इन दोनों नेताओं के बीच सीधी और तीखी बहस हो गई थी। चन्नी ने राजा वड़िंग की लीडरशिप पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा था कि जब राजा वड़िंग के गढ़ रहे 'गिद्दड़बाहा' के निकाय चुनावों में AAP ने क्लीन स्वीप कर दिया ऐसी कमजोर स्थिति में कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कैसे कर सकती है?
क्या दोहराया जाएगा 2021 का इतिहास?
कांग्रेस के इस कदम को देखकर हर किसी को साल 2021 का वह दौर याद आ रहा है। तब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच ऐसी ही गुटबाजी चरम पर थी। उस कलह को सुलझाने के लिए कांग्रेस ने मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में 3 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी के दखल के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया, सिद्धू अध्यक्ष बने रहे और अंत में चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया गया।
इस कलह का खामियाजा कांग्रेस को 2022 के चुनावों में भुगतना पड़ा, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस आलाकमान 2021 की अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेगा या फिर एक बार फिर पंजाब कांग्रेस में 'वही पुराना इतिहास' खुद को दोहराएगा? इसका फैसला अजय माकन की रिपोर्ट के बाद आने वाले कुछ दिनों में हो जाएगा।














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