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पंजाब: राम रहीम की फरलो पर गरमाई सियासत, भाजपा ने बढ़ाई विपक्षी दलों की चिंता

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक 13 दिन पहले गुरमीत राम रहीम को फरलो मिलने से सियासा पारा चढ़ गया है।

चंडीगढ़, 10 फरवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गुरमीत राम रहीम को फरलो मिलने से सियासा पारा चढ़ गया है। सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि गुरमीत राम रहीम को चुनाव से पहले जेल से बाहर लाकर भाजपा इसका सियासी माइलेज ले सकती है। हरियाणा के सिरसा जिले में डेरा सच्चा सौदा स्थित है। लेकिन इसका प्रभाव पंजाब के मालवा रीजन की 69 सीटों पर है। वहीं डेरा समर्थकों का झुकाव किस पार्टी की तरफ़ है इससे अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है। सभी राजनीतिक दलों को चिंता बढ़ी हुई। इसके साथ ही पंजाब के विभिन्न सियासी दल राम रहीम की फरलो को सियासी मुद्दा बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी को साधने से नहीं चूक रहे हैं।

राम रहीम की फरलो पर गरमाई सियासत

राम रहीम की फरलो पर गरमाई सियासत

राम रहीम की फरलो को भाजपा की चाल बता उस सियासी माइलेज लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगा रही है। पंजाब के सभी सियासी दलों का यह आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने सियासी फ़ायदे के राम रहीम को फरलो दिलवाई है। वहीं इस मामले में आम आदमी पार्टी की तरफ़ से कोई भी बयान नहीं आया है। आम आदमी पार्टी की तरफ़ किसी भी तरह की प्रक्रिया नहीं आने पर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रहीं हैं। सियासी जानकारों की मानें तो अमित शाह की सियासी रणनीति का एक हिस्सा राम रहीम की फरलो का भी हो सकता है। उन्हीं के दिशा निर्देशों के मुताबिक पंजाब में भाजपा राजनीतिक चाल चल रही है।

मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व

मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व

पंजाब के मालवा क्षेत्र में डेरा समर्थकों का वर्चस्व है उनके रुख को देखते हुए ज़्यादातर सीटों पर बने बनाए समीकरण बदल सकत हैं। चुनाव सलाहकारों की मानें तो इनके प्रभाव से कडे़ मुकाबले वाली सीटों पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। डेरा सिरसा के लाखों की तादाद में अनुयायी हैं जो मालवा के मानसा, संगरूर, बरनाला, बठिंडा, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब समेत पंजाब के अन्य जिलों से ताल्लुक रखते हैं। डेरा समर्थकों के लिए कोई भी चुनावी मुद्दा मायने नहीं रखता है। डेरे के सियासी विंग जिस पार्टी की तरफ इशारा कर दें उसकी सियासी मैदान मजबूत हो जाती है। सियासी गलियारों में यहां तक कहा जाता है कि डेरे के सियासी विंग के इशारे से पूरी सियासी फ़िज़ा बदल सकती है। डेरा समर्थकों का झुकाव बने बनाए समीकरण को पूरी तरह से पलट सकता है। डेरा समर्थकों का दावा है कि हर विधानसभा सीट क़रीब 40 हज़ार वोट को प्रभावित कर सकते हैं।

डेरा मुखी के आदेश का इंतज़ार

डेरा मुखी के आदेश का इंतज़ार

गुरमीत राम रहीम की फ़रलो से डेरा सिरसा से जुडे़ श्रद्धालुओं और अनुयायियों में हलचल तेज हो गई है। डेरा सिरसा से जुड़े अधिकारियों की मानें तो अभी सियासी तौर पर किसी पार्टी को समर्थन देने का कोई फैसला नहीं किया गया है। लेकिन डेरा मुखी के आदेश का सभी लोग पालन करेंगे। मतदान से कुछ वक़्त पहले यह फैसला किया जा सकता है कि किसे समर्थन देना है। आपको बता दें कि राम रहीम अपने दो महिला अनुयायियों से बलात्कार मामले में सज़ा याफ़्ता है। अगस्त 2017 में उसे पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषि करार देते हुए 20 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है।


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