पंजाब दी गल: पंजाब में कांग्रेस की बढ़ रही मुश्किलें, सियासी माइलेज लेने की तैयारी में भाजपा
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। एक तरफ़ जहां सभी सियासी पार्टी पंजाब की सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए पुरज़ोर प्रचार प्रसार कर रही है।
चंडीगढ़, 10 फरवरी 2022। पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। एक तरफ़ जहां सभी सियासी पार्टी पंजाब की सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए पुरज़ोर प्रचार प्रसार कर रही है। वहीं दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस के नेता पार्टी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर विपक्षी दलों को हमलावर होने का म़ौक़ा दे रहे हैं तो वहीं पार्टी के बाग़ी नेता भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने से नहीं चूक रहे हैं। पंजाब दी गल में आज हम आपको सियासी गलियारों की कुछ ऐसी ही चटपटी ख़बरों से रूबरू करवाने जा रहे हैं।

शिअद ने दिया कांग्रेस को झटका
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस में हो रहे सियासी ड्रामे के बीच राजन गिल ने शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता ले ली है। आपको बता दें कि राजन गिल खडूर साहिब लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह डिंपा के भाई हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने पार्टी में शामिल होते ही राजन गिल को तोहफ़ा दिया है। सुखबीर सिंह बादल ने राजन गिल को शिरोमणि अकाली दल पंजाब का महासचिव भी बना दिया है। सियासी जानकारों की मानें तो चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता के भाई राजन गिल के शिरोमणि अकाली दल के शामिल होने से कांग्रेस के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। क्योंकि जसबीर सिंह डीपी के भाई होने की वजह से राजन गिल की सियासी पकड़ अच्छी है। शिअद में शामिल होने के बाद वह कांग्रेस मतदाताओं को शिअद के पाले में लाने की पुरज़ोर कोशिश करेंगे।

सिद्धू खेमे के नेताओं में नाराज़गी
पंजाब के सियासी गलियारे में यह चर्चा तेज़ थी कि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो सकते हैं। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस बात से सिद्धू खेमे के नेताओँ में नाराज़गी है। वहीं सिद्धू की पत्नी भी आलाकमान के इस फ़ैसले से नाराज़ चल रही हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी की है कि शिक्षा, योग्यता और काम के आधार पर किसी को भी इतने बड़े ओहदे पर बैठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू मुख्यमंत्री पद के लिए सही उम्मीदवार हैं यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है। राहुल गांधी को नाम सीएम उम्मीदवार की की घोषणा करने के लेकर गुमराह किया गया है।

गुटबाज़ी का शिकार हो रही कांग्रेस
पंजाब के सियासी जानकारों की मानें तो पंजाब कांग्रेस में गुटबाज़ी चरम पर है। चुनाव से पहले अगर सभी नेता और कार्यकर्ताओं को एक प्लेटफॉर्म पर नहीं लाया गया तो चुनाव में पार्टी को इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अगर कांग्रेस जीत भी जाती है तो पार्टी में दरार पड़ सकती है। क्योंकि कांग्रेस के सभी नेताओं में कुर्सी की लड़ाई चल रही है। पंजाब के चुनावी सर्वे से यह बात तो साफ़ है कि कोई भी पार्टी बहुमत से सरकार नहीं बना रही है। पंजाब की सत्ता की चाभी जोड़ तोड़ की राजनीति से ही मुमकिन है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद अगर कांग्रेस के विधायक दूसरे पाले में चले गए तो कांग्रेस की सत्ता में वापसी का ख़्वाब अधूरा रह सकता है।

शेखावत के बयान से चढ़ा सियासी पारा
पंजाब के प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत के एक बयान से सियासी सरगर्मियां बढ़ गई है। उन्होंने दावा करते हुए कहा है कि पंजाब में कांग्रेस में जल्द ही बड़ा भूचाल आनेवाला है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन मामले में ईडी के बयान के बाद सारी सच्चाई पंजाब के जनता के सामने आ गई है। धीरे-धीरे कांग्रेस के नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं। सुनील जाखड़ पर पूरी चुनाव की ज़िम्मेदारी थी उन्होंने ही सक्रिय सियासत से संन्यास ले लिया, अभी असली भूचाल आना बाक़ी है। गजेंद्र सिंह शेखावत के कांग्रेस में भूचाल आने वाले बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि भाजपा पंजाब में कांग्रेस के उन नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो आलाकमान की बेरुखी का शिकार हुए हैं। सियासी जानकारों की मानें तो भाजपा इस तरह से कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में लाकर कांग्रेस को कमज़ोर कर देगी ताकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए।
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