हमारा जिस्म तो स्वतंत्र हो गया लेकिन रूह अब भी अंग्रेज़ों की गुलाम है- लक्ष्मी कांता चावला
पूर्व कैबिनेट मंत्री ने शहीदों को याद करते हुए कहा कि देश की मिट्टी के एक-एक कन में शहीदों का खून मिला है, तब जाकर भारत के लोगों को अंग्रेज़ों से आज़ादी मिली है। बिना खडग और बिना ढाल हम लोगों को यह आज़ादी नहीं मिली है।
चंडीगढ़, अगस्त 14, 2021। शनिवार को पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्ष गांठ मनाने जा रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने भी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि हम भारत के लोग बहुत शान के साथ स्वतंत्रता दिवस को मना रहे हैं, सभी लोगों को स्वतंत्रा दिवस की हार्दिक बधाई। हम लोगों को शहीदों की शहादत को नहीं भूलना चाहिए। शहीदों के ख़ून से रंगने के बाद हम लोगो को अंग्रेज़ों के चंगुल से छूट कर ये आज़ादी मिली है।
Recommended Video

'शहीदों को भूल चुकी है युवा पीढ़ी'
पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि एक बात बहुत ही तकलीफ़ देती है कि नई पीढ़ी हमारे देश के लिए क़ुर्बान हुए शहीदों को भूल चुकी है। यह बहुत अफसोस की बात है कि शिक्षा जगत में ऐसा कोई पाठ्यक्रम नहीं है जहां हमारे बच्चे शहीदों के बारे में जान सके उन्हें पहचान सकें। शिक्षा जगत में एक ऐसा पाठ्यक्रम होना चाहिए जिसमें नई पीढ़ी को देश के लिए शहीद हुए जवानों के बारे में बताया जाए। जिससे आने वाली पीढ़ी भी देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के बारे में जान सकें।
'अपनी परंपरा भूल रहे भारतवासी'
पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि हम लोग आज़ाद तो हो चुके हैं लेकिन हमारी रूह अभी भी अंग्रेज़ों की गुलाम है। आज़ादी से पहले हम अपनी भाषा का इस्तेमाल किया करते थे। आज के दौर में हम लोग अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करने में गौरव महसूस करते हैं। हम लोग अब विदेशी परंपराओं के पालन करने लगे हैं। अंग्रेज़ों की तरह मोमबत्तियां बुझा कर अंधेरा कर के जन्मदिन मनाते हैं। भारत के लोग ज्योति की पूजा करते हैं, दीपक जला कर त्योहार मनाते हैं लेकिन अंग्रेज़ों की नकल में अब दीपक बुझा कर हमलोग त्योहर मनाते हैं। आधी रात के अंधेरे में अंग्रेज़ों की तरह नव वर्ष का दिन मनाते हैं। हमारे यहां तो सुरज की किरणों से दिन की शुरूआत होती है। अंग्रेज़ लंदन में नव वर्ष के जश्न में रात के 12 बजे नाचते हैं और हम यहां गुड मॉर्निंग कह कर रात के 12 बजे नाचने लग जाते हैं।
'भारतीय परंपरा हमारी शान है'
पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि भारतीय परंपरा हमारी शान है। आज़ादी से पहले हम कहते थे कि 'अपनी भाषा है भली, भलो आपणों देश, जो कछु है आपणो भलो यही राष्ट्र संदेश'। धीर-धीरे हम लोग अपनापन भूलते जा रहे हैं, अपनी संस्कृति भूलने के साथ-साथ देश की महिमा भी भूलते जा रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री ने शहीदों को याद करते हुए कहा कि देश की मिट्टी के एक-एक कन में शहीदों का खून मिला है, तब जाकर भारत के लोगों को अंग्रेज़ों से आज़ादी मिली है। बिना खडग और बिना ढाल हम लोगों को यह आज़ादी नहीं मिली है। देश के वीर जवानो ने देश के लिए क़ुर्बानियां दी तब जाकर हम लोगों को आज़ादी मिली है। आज़ादी का जश्न मनाओ और उन्हें याद करो जिसकी वजह से हम लोगों को आज़ादी मिली है।
'पीएम मोदी दें देश की जनता को संदेश'
पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी से हिंदी भाषा को बचाने के लिए देश के नाम संदेश की अपील की है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संदेश में उन्होंने कहा है कि हमारे देश की में हिंदी भाषा की मह्त्व ख़त्म होते जा रही है। अमेरिका के बाज़ारों और हिन्दुस्तान के बाज़ारों में कुछ फ़र्क़ नहीं लगता है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ जैसे शहरों में दुकानों के बाहर डायर की भाषा (अंग्रेजी) में नेमप्लेट और बैनर लगे हुए हैं। अमृतसर की तरफ़ से जालिया वाला बाग की तरफ़ हाल गेट जो सड़क जाती है उसमें राष्ट्रीय भाषा को पूरी तरह से मिटा दिया गया है। वहां अंग्रेजी भाषा को वह दर्जा दिया गया जो मां को मिलता है। उन्होंने ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आप देश के लोगों को संदेश दें कि वह अपने देश की भाषा का इस्तेमाल करें। अपने घरों, दुकानों पर कम से कम अपने देश की भाषा में टेमप्लेट लगाना चाहिए। हम लोगों को क्या हो गया है कि सरकारी सर्किल, जय हिंद, नमस्ते और वन्दे मातरम नहीं कहते है। अंग्रेज़ों के वक़्त में वन्दे मातरम कहने पर कोड़े मारे जाते थे। स्कूल, कॉलेज, और सरकारी तंत्रों से जय हिंद, नमस्ते, वन्दे मातरम पूरी तरह से ग़ायब ही हो गया है। अभी तो हम आज़ाद हैं फिर भी लोग गुड मॉर्निंग और गुड इवनिंग से सम्बोधित करते हैं और ख़ुद को सभ्य समझते हैं। स्कूलों में गुड मॉर्निंग कहना जरूरी हो गया है, तथाकथित जो पब्लिक स्कूल है वहां नमस्कार का बहिष्कार कर दिया गया है। जय हिंद और वन्दे मातरम तो बहुत दूर की बात है।
स्मार्ट स्कूल क्या है ?
लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि हमारे देश के खास तौर से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब जम्मु कश्मीर और आस पास के प्रांतों के हलवाई ने तो अंग्रेज़ी में लिखे हुए डिब्बे का चलन ला दिया है। ऐसा लगता है जैसे की किसी दूसरे भाषा के डिब्बों में मिठाई देने से उनकी बिक्री नहीं होगी। हिन्दुस्तानी मिठाई को अंग्रेजी लिखे डिब्बे में देने से उसकी क़ीमत ज़्यादा हो जाती है। अंग्रेजी में पढ़ाने वाले स्कूलों की फ़ीस ज्यादा है। पंजाब सकार से मैंने पूछा कि स्मार्ट स्कूल कहां हैं क्या हैं, तो जवाब मिला जिस स्कूलों में अंग्रेज़ी पढाई जाए वो स्मार्ट स्कूल हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के स्कूलों में 10वीं तक हिंदी ज़रूरी नहीं है लेकिन अंग्रेजी 10वीं तक ज़रूरी है।
'विदेशियों को नहीं देंगे अपनी भाषा का स्थान'
पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस के 75वीं वर्षगंठ पर देश के नाम एक संदेश दीजिए कि देशवासी एक शपथ लें कि अपनी भाषा का स्थान विदेशियों को नहीं देंगे। चाहे दुनिया भर के भाषा को पढकर उनके विद्वान बन जाएं। अटल बिहारी वाजपेयी 14 भाषाएं जानते थे लेकिन अपनी भाषा में बात वो विदेशों में भी करते थे। आज अपने देश के बाज़ारों से देश की भाषा गयायब हो गई। कुछ कुछ इदारों थोड़ी बहुत अपने देश की भाषा दिख जाती है। जालियां वाला बाग़ तक के संदेश हम भूल चुके हैं। आज़ादी से पहले शराब के ठेके बंद करवाते थे अब शराब को घर में सजाते है। आज हिंदुस्तान के सिरफ़ दो प्रांतों को छोड़कर सारे शराब की कमाई से चलते हैं। हमलोग शरीर से आज़ाद हो गए लेकिन आत्मा अब भी अंग्रेजों और अंग्रेज़ियत की ग़ुलाम है।












Click it and Unblock the Notifications