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जेल से रिहाई के बाद सिद्धू मूसेवाला के घर पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू, उनके माता-पिता से करेंगे मुलाकात, VIDEO

जेल से रिहा होने के दो दिन बाद नवजोत सिंह सिद्धू दिवंगत पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के घर पहुंचे। उनके माता-पिता से मुलाकात करेंगे।

नवजोत सिंह सिद्धू
Photo Credit:

Navjot Singh Sidhu: हाल ही में जेल से रिहा हुए पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू दिवंगत पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के घर पहुंचे। उन्होंने सोमवार को दिवंगत सिंगर के माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के मनसा स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सिद्धू मूसेवाला की हत्या पर दुख जताया। मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ देखी गई। समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो साझा किया है, जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू की गाड़ी जाते हुए दिख रही है।

नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार को जेल से बाहर आ गए। नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की पटियाला जेल में बंद थे। उन्हें रोडरेज के एक मामले में कैद की सजा मिली थी। वे 20 मई 2022 से जेल में बंद थे, लेकिन 48 दिन पहले उन्हें रिहा किया गया। कानूनी तौर पर उनकी रिहाई 18 मई को होने वाली थी लेकिन उनके अच्छे व्यवहार और चाल-चलन के चलते उन्हें 48 दिन पहले रिहा किया गया।

दरअसल कैदियों के लिए Prison Rules होते हैं, जिसके तहत अगर कोई कैदी अच्छा बर्ताव करता है तो जेल प्रशासन उनकी सजा में से 5 से 7 दिन कम कर देता है। यही नहीं कैदियों को भी साप्ताहिक छुट्टी के साथ-साथ सरकारी छुट्टियां भी मिलती हैं और कैदी पैरोल पर भी बाहर आते हैं। लेकिन सिद्धू ने जेल जाने के बाद ना तो कोई वीकली ऑफ लिया और ना ही उन्होंने सरकारी छुट्टी पर आराम किया और ना ही वो पैरोल पर बाहर आए, बल्कि उन्होंने जेल की ओर से कराए जा रहे सारे कामों को वक्त पर पूरा किया।

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    रिहाई के बाद क्या बोले नवजोत सिंह सिद्धू

    1. लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं होती। लोकतंत्र बेड़ियों में है।
    2. पंजाब देश की ढाल है। लेकिन उस ढाल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
    3. पंजाब को कमजोर करोगे तो तुम भी कमजोर हो जाओगे।
    4. जब भी तानाशाही होती है, एक क्रांति आती है। इस क्रांति का नाम राहुल गांधी है।
    5. राहुल गांधी अपने पूर्ववर्तियों से प्रेरणा लेकर लोकतंत्र को उसकी बेड़ियों से मुक्त करने की कोशिश कर रहे हैं। जब एक बाघ दहाड़ता है, तो वह पूरी दुनिया में - अमेरिका, जर्मनी में गूंजता है।
    6. वाद-विवाद और असहमति इस लोकतंत्र का सार है।
    7. सभी एजेंसियां​​आज गुलाम हैं। वे रबर स्टैंप हैं। वे केवल 4-6 लोगों के लिए काम करती हैं।
    8. मैं इस चुनौतीपूर्ण समय में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ और कांग्रेस के हर कार्यकर्ता के साथ एक दीवार की तरह खड़ा रहूंगा।
    9. भगवंत मान मेरे छोटे भाई जैसे हैं लेकिन वे अखबारी मुखमंत्री बने हुए हैं।

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