Telegram से बैन हटा या रहेगा? दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, कहा- 'सरकार के पास है पूरी पावर'
Telegram Ban Verdict: री-नीट (RE-NEET) परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी बैन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 जून की सुबह एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी है। इसका मतलब है कि भारत में टेलीग्राम पर लगाया गया अस्थायी बैन फिलहाल जारी रहेगा और 22 जून तक प्रभावी रहेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि सरकार के पास बैन लगाने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने कहा है कि देश की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार के पास किसी भी ऐप या प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने की पूरी कानूनी शक्ति है। दरअसल 21 जून 2026 को होने वाली RE-NEET परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक यानी कुल 5 दिनों का अस्थाई बैन लगाया है। टेलीग्राम ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट से उसे कोई राहत नहीं मिली और सरकार का फैसला बरकरार रहेगा।

दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार की प्रक्रिया बिल्कुल सही
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि सरकार ने इस बैन को लागू करने में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। जस्टिस तेजस करिया का मानना है कि इमरजेंसी हालात को देखते हुए, सरकार के बताए कारण काफी थे और IT एक्ट के सेक्शन 69A के तहत प्रोसीजर का ठीक से पालन किया गया था। कोर्ट का कहना है कि ब्लॉकिंग और रिव्यू के ऑर्डर "अच्छी तरह से स्थापित हैं और उनके पीछे कारण हैं" और उनमें बिना सोचे-समझे काम नहीं किया गया है।
कोर्ट ने टेलीग्राम की इस बात को भी खारिज कर दिया कि प्लेटफॉर्म खुद IT एक्ट के तहत "जानकारी" के दायरे से बाहर है। अदालत के मुताबिक, परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए यह एक इमरजेंसी फैसला था और इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त और ठोस वजहें थीं।
अदालत ने टेलीग्राम की इस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया कि उन्हें इस आदेश की सही जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने माना कि केंद्र सरकार ने उपलब्ध सभी सबूतों और सामग्रियों पर गहराई से विचार-विमर्श करने के बाद ही यह कदम उठाया है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही नहीं दिखती।
सरकार के पास है पूरा राइट: आईटी एक्ट देता है अधिकार
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बहुत ही अहम कानूनी बिंदु को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि देश का आईटी एक्ट (IT Act) सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी खास कंटेंट ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरे के पूरे प्लेटफॉर्म या ऐप पर भी प्रतिबंध लगा सकती है।
अदालत ने यह भी साफ किया कि टेलीग्राम को 'सूचना' या डिजिटल प्लेटफॉर्म के दायरे से बाहर रखने की कोई वजह नहीं है। जब मामला देश के लाखों छात्रों के भविष्य और री-नीट (RE-NEET) जैसी बड़ी परीक्षा की निष्पक्षता से जुड़ा हो, तो सरकार के पास ऐसे कड़े कदम उठाने की पूरी पावर है।
फैसले से पहले टेलीग्राम का पक्ष सुना गया था
अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने बेहद अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई अचानक या एकतरफा नहीं की गई है। इस प्रतिबंध से पहले टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को बकायदा समन भेजकर बुलाया गया था और उनकी पूरी बात सुनी गई थी।
टेलीग्राम की दलीलों और उस पर हुई जांच की पूरी रिपोर्ट को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। आपको बता दें कि इस संवेदनशील मामले की समीक्षा खुद कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) की अगुवाई वाली एक हाई-लेवल कमेटी ने की थी, जिसके बाद ही 5 दिनों के डिजिटल लॉकडाउन का फैसला लिया गया।
टेलीग्राम के ये फीचर्स ही बन गए उसकी आफत (These Features Of Telegram Became Its Own Downfall)
आखिर व्हाट्सऐप (WhatsApp) को छोड़कर टेलीग्राम पर ही यह गाज क्यों गिरी? इसके पीछे टेलीग्राम के अपने कुछ खास और एडवांस फीचर्स हैं, जिनका दुरुपयोग रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। आइए जानते हैं इनके बारे में:
- विशालकाय ग्रुप साइज: जहां दूसरे ऐप्स में ग्रुप मेंबर्स की एक सीमित संख्या होती है, वहीं टेलीग्राम के एक अकेले ग्रुप में 2 लाख लोग जुड़ सकते हैं। इससे कोई भी लीक पेपर या फर्जी जानकारी कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है।
- हेवी फाइल्स शेयरिंग: इस ऐप पर बेहद भारी और बड़ी साइज की फाइल्स (जैसे पूरी बुक, क्वेश्चन पेपर के पीडीएफ या वीडियो) को आसानी से अपलोड और सेव किया जा सकता है।
- बिना मोबाइल नंबर के अकाउंट: टेलीग्राम पर प्राइवेसी के नाम पर यूजर्स को बिना मोबाइल नंबर दिखाए सिर्फ एक 'यूनिक यूजरनेम' बनाकर अकाउंट चलाने की आजादी मिलती है।
बार-बार विवादों में क्यों आता है टेलीग्राम? (Why Telegram Often Faces Scrutiny)
टेलीग्राम लंबे समय से विभिन्न जांच एजेंसियों और सरकारों की निगरानी में रहा है। कई मामलों में इस प्लेटफॉर्म पर पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों के प्रसार, साइबर धोखाधड़ी और अवैध नेटवर्क संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेलीग्राम के कुछ फीचर्स इसे अन्य मैसेजिंग ऐप्स से अलग बनाते हैं। उदाहरण के लिए:
- एक ग्रुप में लाखों तक यूजर्स को जोड़ने की क्षमता
- बड़ी फाइलें शेयर और स्टोर करने की सुविधा
- यूजरनेम आधारित पहचान
- कुछ परिस्थितियों में मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए बिना इस्तेमाल की सुविधा
इन्हीं फीचर्स के चलते इस प्लेटफॉर्म पर पहले भी कई बार पेपर लीक करने और फर्जी खबरें फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। यहां तक कि साइबर ठग और जालसाज भी अपनी पहचान छिपाने के लिए इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल, 22 जून तक भारत में टेलीग्राम पर यह पाबंदी जारी रहेगी ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से निपट सके।














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