Punjab: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से कैसे हो बचाव? IARI- क्लाइमेट ट्रेंड्स की बैठक, अहम मुद्दों पर चर्चा
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) और जलवायु परिवर्तन के दुष्रभावों पर चर्चा को बढ़ावा देने वाली रिसर्च कंसल्टिंग संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। पंजाब समेत पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए अहम चर्चा होगी। आईएआरआई की बैठक इसलिए भी अहम है,क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पंजाब, हरियाणा समेत एनसीआर से जुडे़ अन्य राज्यों वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता देखा गया।
क्लाइमेट ट्रेंड्स के एक अध्ययन के मुताबिक, 2019 से 2023 तक, हरियाणा और पंजाब में आग की घटनाओं में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। 2022 और 2023 में उल्लेखनीय कमी आई है। दोनों राज्यों को पराली जलाने से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आग की इन घटनाओं का दिल्ली के वायु स्वास्थ्य को प्रभावित करने में प्रमुख योगदान रहा है, खासकर मानसून के बाद के मौसम के दौरान। निष्कर्ष आग की घटनाओं में आशाजनक कमी और दिल्ली में वायु स्वास्थ्य में सुधार के लिए चल रही चुनौतियों पर प्रकाश डालते हैं।

आग की घटनाओं का वायु प्रदूषण पर प्रभाव को लेकर एक स्टडी में कई बड़े तथ्य समाने आए हैं-
- 2019 से 2023 तक, हरियाणा और पंजाब राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में उतार-चढ़ाव देखे गया। लेकिन वर्ष 2022 और 2023 में इन मामले में तेजी से गिरावट आई।
हरियाणा
राज्य में आग लगने की संख्या 2019 में 14,122 से घटकर 2023 में 7,959 हो गई, सितंबर से दिसंबर तक आग की गतिविधि लगातार अधिक रही। करनाल और कैथल में क्रमशः लगभग 86% और 78% की उल्लेखनीय कमी आई, जो अग्नि गतिविधि में बड़ी कमी दर्शाता है। हालाँकि, गुड़गांव, मेवात और झज्जर में आग की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
पंजाब
राज्य ने भी इसी तरह की प्रवृत्ति अपनाई, 2020 में आग की घटनाएं 95,048 पर पहुंच गईं और 2023 में घटकर 52,722 हो गईं, लेकिन मानसून के बाद की अवधि सबसे अधिक आग लगने की संभावना बनी हुई है। गुरदासपुर और मुक्तसर जैसे जिलों में आग की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी गई, जिसमें 71% तक की कमी आई। बठिंडा और फरीदकोट जैसे जिलों में 22% से 45% तक की कमी के साथ मध्यम गिरावट दर्ज की गई। अमृतसर और संगरूर सहित कुछ जिलों में न्यूनतम कटौती देखी गई। इस बीच, साहिबजादा अजीत सिंह नगर जैसे कुछ स्थानों पर आग की घटनाओं में मामूली वृद्धि देखी गई।
दिल्ली में वायु प्रदूषण का असर
पराली जलाने की घटनाओं से दिल्ली की वायु सेहत पर काफी असर पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस दिन पंजाब और हरियाण में पराली नहीं जलाई दिल्ली शहर का AQI औसत 175 रहा। लेकिन पराली जलाने की घटनाओं वाले दिन AQI बढ़कर 233 पहुंच गया। खेतों में पराली जलाने के मामलों को चलते AQI बढ़कर 337 तक पहुंच चुकी है।
पंजाब और हरियाणा में आग की घटनाओं ने दिल्ली के AQI में 103-यूनिट की वृद्धि में योगदान दिया, जो राज्यों में समन्वित अग्नि प्रबंधन और वायु गुणवत्ता हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि पराली जलाने के चलते मौसम में भी तेजी से बदलाव देखा गया।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट में पराली जलाने को कम करने और सार्वजनिक जागरूकता में सुधार लाने के साथ-साथ स्वच्छ कृषि प्रौद्योगिकियों में निवेश के उपायों का आह्वान किया गया। क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में आग की घटनाओं में कमी एक मिली जुली प्रवृत्ति है। पंजाब के कुछ जिलों में कमी महत्वपूर्ण है, हालाँकि कुल आग की संख्या अभी भी अधिक है। हरियाणा में कुछ जिलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालाँकि, तुलनात्मक गणनाओं की कुल संख्या कम है। दिल्ली खराब वायु स्वास्थ्य से जूझ रही है।
वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक-विस्तार डॉ. आरएन पदारिया ने एक बयान में कहा, "पुआल को शामिल करने की सुविधा के लिए उपयुक्त कृषि मशीनरी के साथ खेत प्रबंधन पर कम अवधि की धान की किस्मों का उपयोग करने के एक एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से पराली जलाने के प्रबंधन में किसानों की जागरूकता और भागीदारी बढ़ रही है। मिट्टी, मल्चिंग और चारा ब्लॉकों की तैयारी, माइक्रोबियल डीकंपोजर का अनुप्रयोग, साथ ही बिजली संयंत्रों को अवशेषों की आपूर्ति जैसे वैकल्पिक उपयोग करना। प्रेरक संचार, कस्टम हायर मशीनरी और उपयुक्त तकनीकी विकल्पों ने पराली जलाने के प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा दिया है।
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