Gurdaspur News: 'सरपंच' के लिए 'नीलामी' में 2 करोड़ की लगी बोली, नेताओं में मनमुटाव!
Punjab Gram Panchayat Chunav 2024: पंजाब के गुरदासपुर जिले के हरदोवाल कलां गांव में सरपंच पद के लिए हुई नीलामी ने राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। इस नीलामी में सरपंच पद के लिए 2 करोड़ रुपये की बोली लगाई गई, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ मानी जा रही है। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हरदोवाल कलां गांव में 50 लाख रुपये से शुरू हुई बोली में स्थानीय भाजपा नेता आत्मा सिंह ने 2 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई। आत्मा सिंह ने चेक के माध्यम से यह राशि जमा की और दावा किया कि उनका लक्ष्य गांव के विकास के लिए अधिकतम धनराशि जुटाना है। उनका कहना था कि गांव की एक समिति यह तय करेगी कि इन फंड्स का आवंटन कैसे किया जाएगा।

यह नीलामी अकेले हरदोवाल कलां गांव तक सीमित नहीं है। इसी तरह की घटना बठिंडा के गेहरी बुत्तर गांव में भी हुई, जहां 60 लाख रुपये की बोली लगी थी, हालांकि अभी वहां कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस नीलामी को लेकर राजनीतिक नेताओं ने कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता परताप सिंह बाजवा ने इस बोली प्रक्रिया को "खुला भ्रष्टाचार" कहा और इसे तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने सतर्कता ब्यूरो से 2 करोड़ रुपये की बोली के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया और दोषियों को जेल भेजने की मांग की। बाजवा का कहना है कि इस तरह की बोली प्रक्रिया का कोई उदाहरण पहले कभी नहीं देखा गया।
कब होने हैं ग्राम पंचायत चुनाव?
पंजाब में 15 अक्टूबर 2024 को ग्राम पंचायत चुनाव होने हैं, जिसमें 13,237 सरपंचों और 83,437 पंचों का चुनाव किया जाएगा।
- नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि- 4 अक्टूबर
- नामांकन की जांच- 5 अक्टूबर
- नाम वापस लेने की अंतिम तिथि- 7 अक्टूबर
- मतदान दिवस- 15 अक्टूबर (चुनाव मतपत्र के माध्यम से होंगे)
- मतगणना- 15 अक्टूबर
चुनावी पारदर्शिता पर सवाल
इस नीलामी ने चुनावी पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में सरपंच पद के लिए इस तरह की नीलामी लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो गया है कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और लोकतांत्रिक रूप से संपन्न हो। स्थानीय शासन और चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है।
सरपंच पद के लिए इस तरह की नीलामी ने चुनावी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और शक्ति के गलत इस्तेमाल के गंभीर आरोपों को जन्म दिया है। स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य के चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हों।












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