पंजाब:पहले नवजोत सिद्धू और अब पत्नी ने की पार्टी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी, बिगड़ सकता है कांग्रेस का खेल
पंजाब कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा होते ही कांग्रेस नेताओं में असंतोष पनपने लगा है।
चंडीगढ़, 9 फरवरी 2022। पंजाब कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा होते ही कांग्रेस नेताओं में असंतोष पनपने लगा है। सीएम उम्मीदवार की घोषणा होने से पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अपनी बयानबाज़ी से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा रहे थे। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम उम्मीदवार की घोषणा के बाद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू की बयानबाज़ी से सियासी पारा चढ़ गया है। चन्नी के सीएम उम्मीदवार की घोषणा से कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू (सिद्धू की पत्नी) की नाराज़ी सामने आई है।

सिद्धू की पत्नी ने जताई नाराज़गी
पंजाब के सियासी गलियारे में यह चर्चा तेज़ थी कि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो सकते हैं। लेकिन लेकिन राहुल गांधी ने चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस बात से सिद्धू खेमे के नेताओँ में नाराज़गी है। वहीं सिद्धू की पत्नी भी आलाकमान के इस फ़ैसले से नाराज़ चल रही हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी की है कि शिक्षा, योग्यता और काम के आधार पर किसी को भी इतने बड़े ओहदे पर बैठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू मुख्यमंत्री पद के लिए सही उम्मीदवार हैं यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है। राहुल गांधी को नाम सीएम उम्मीदवार की की घोषणा करने के लेकर गुमराह किया गया है। हालांकि चन्नी को सीएम उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सिद्धू की तरफ़ से कोई नाराज़गी नहीं दिखी है।

परिवारवाद होने पर इस्तीफा दे दूंगा- सिद्धू
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस से परिवारवाद को खत्म कर देने वाले बयान से कांग्रेस पार्टी में गुटबाज़ी बढ़ गई है। नवजोत सिंह सिदधू ने कहा था कि किसी विधायक के बेटे को प्रधानी नहीं दी जाएगी। पार्टी के कार्यकर्ताओं को पद से नवाज़ा जाएगा। अगर परिवारवाद हुआ तो मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। सूत्रों की मानं तो सिद्धू के इस बयान के बाद से कांग्रेस के नेता अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुट गए हैं। क्योंकि अगर कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई तो वैसे नेताओं की पकड़ कमज़ोर हो सकती है जो अपने परिवार के लोगों को सियासी फ़ायदा पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस नेता पार्टी में अपना खेमा मज़बूत करने में जुटे हुए हैं ताकि सिद्धू किसी भी तरह से चुनाव जीतने के बाद प्रेशर पॉल्टिक्स नहीं कर सकें।

कांग्रेस में चरम पर गुटबाज़ी
पंजाब के सियासी जानकारों की मानें तो पंजाब कांग्रेस में गुटबाज़ी चरम पर है। चुनाव से पहले अगर सभी नेता और कार्यकर्ताओं को एक प्लेटफॉर्म पर नहीं लाया गया तो चुनाव में पार्टी को इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अगर कांग्रेस जीत भी जाती है तो पार्टी में दरार पड़ सकती है। क्योंकि कांग्रेस के सभी नेताओं में कुर्सी की लड़ाई चल रही है। पंजाब के चुनावी सर्वे से यह बात तो साफ़ है कि कोई भी पार्टी बहुमत से सरकार नहीं बना रही है। पंजाब की सत्ता की चाभी जोड़ तोड़ की राजनीति से ही मुमकिन है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद अगर कांग्रेस के विधायक दूसरे पाले में चले गए तो कांग्रेस की सत्ता में वापसी का ख़्वाब अधूरा रह सकता है।
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