पंजाब: आंदोलन बढ़ाने को लेकर किसान संगठनों की एक राय नहीं, घर वापस लौट रहे किसान
पंजाब में एक ओर विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। दूसरी ओर किसान संगठन अपनी आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।
चंडीगढ़, 30 नवम्बर, 2021। पंजाब में एक ओर विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। दूसरी ओर किसान संगठन अपनी आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। पीएम मोदी के तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के फैसले के बाद किसानों की एक राय नहीं है, कुछ किसान घर वापस लौट रहे हैं तो कुछ किसान अपनी पूरी मांगे मनवाने की बात कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो किसान आंदोलन में जो फंड आ रहे थे लगभग वह भी बंद हो चुके हैं। नुकसान काफ़ी होने का हवाला देते हुए कई स्पॉंसर्स ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ठंड आ गई है किसानों को परेशानी हो रही है इसलिए कुछ किसान घर वापसी कर रहे हैं तो कुछ किसान सरकार के फ़ैसले के इंतज़ार में हैं।

घर वापसी पर पंजाब के संगठन का ज़ोर
पंजाब के 32 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों की वापसी के बाद बैठक की जिसमें इस बात पर चर्चा हुई कि एमएसपी कानून बनने की प्रक्रिया में वक़्त लगेगा इसलिए सरकार को एक समय सीमा देकर वापस लौट जाना चाहिए। वहीं आम सहमति बनी कि संसद से कृषि कानूनों की वापसी के बाद मुख्य मांग पूरी हो गई है। इसलिए सरकार को समय देकर घर वापसी कर लेना चाहिए। घर वापसी के प्रस्ताव पर उन 40 नेताओं की बैठक होगी जो सरकार के साथ बातचीत में शामिल थे। इस बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक होगी जिसमें किसानों के लौटने को लेकर चर्चा की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा किसान आंदोलन खत्म करने या नहीं करने को लेकर आखिरी फैसला लेगा।

किसान संगठनों की एक राय नहीं
एमएसपी कानून की रूपरेखा तय होने तक घर वापस नहीं जाने पर कुछ किसान नेता राजी हैं। वहीं कुछ का कहना है कि सरकार को वक्त देकर घर वापस लौट जाना चाहिए। आपको बता दें कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद आंदोलन खत्म करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा की 5 मांगों हैं। एमएसपा क़ानून, आंदोलन के दौरान मृत किसानों के परिवारों को मुआवजा, किसानों पर हुए मुकदमा को वापस लिया जाए, पराली जलाने के मुद्दे पर संशोधन, गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी। इन मुद्दों पर संयुक्त किसान मोर्चा और पंजाब के किसान संगठनो की एक राय नहीं है।

किसानों की मांग पर चर्चा
पंजाब के किसान संगठनों का कहना है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में वक़्त लगेगा इसलिए सरकार को एक समय सीमा देकर घर वापस लौट जाना चाहिए। वहीं दूसरे राज्यों के किसान नेताओं का कहना है कि एमएसपी कानून बनने तक वापसी ठीक नहीं है। पंजाब के जिन किसानों की मौत हुई उनके परिजनों के लिए पंजाब सरकार 5 लाख के मुआवजे और एक सदस्य को सरकारी नौकरी का एलान कर चुकी है। लेकिन पंजाब के बाहर जैसे हरियाणा के जिन किसानों की मौत हुई उनके परिजनों को मुआवजा नहीं मिला है। इस मामले को लेकर भी किसान नेताओं की आपस में राय शुमारी नहीं हो पा रही है।
Recommended Video

हर राज्य के हैं अलग मुद्दे
किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुए मुकदमे पंजाब सरकार वापस ले चुकी है लेकिन बाकी राज्यों में ऐसा नहीं हुआ है। वहीं पराली के मुद्दे और बिजली संशोधन बिल पर भी केंद्र सरकार के आश्वासन से पंजाब के ज्यादातर संगठन सहमत हैं लेकिन कुछ किसान नेता आश्वासन पर राज़ी नहीं है। वहीं किसान नेता लखीमपुर कांड मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग कर रहे है फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा (अजय मिश्रा के बेटा) की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर किसान संगठनों की एक राय नहीं बन पा रही है।
ये भी पढ़ें: पंजाब: SAD अध्यक्ष सुखबीर बादल ने AAP संयोजक पर लगाए आरोप, अरविंद केजरीवाल ने कही ये बात












Click it and Unblock the Notifications