वैक्सीन डोनेशन क्या है और पंजाब में किन्हें मिल रहा है फायदा ? जानिए

चंडीगढ़, 30 मई: पंजाब सरकार ने वैक्सीनेशन के खर्च का बोझ कम करने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इसने 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन की रकम जुटाने के लिए अमीरों से दान जुटाने शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरुआत मोहाली जिले से हुई है और अबतक 40 लाख रुपये से ज्यादा की रकम इसी तरह से जुटा ली गई है। कई उद्योगपति किसी एक गांव की पूरी आबादी के लिए वैक्सीन दान में दे रहे हैं। धीरे-धीरे पंजाब के बाकी जिलों में भी यह स्कीम रफ्तार पकड़ रही है। सरकार को उम्मीद है कि वैक्सीन की रकम जितनी जल्दी दान के जरिए जुटाई जा सकेगी, वैक्सीनेशन ड्राइव को तेज करने में उतनी ही आसानी रहेगी।

वैक्सीन डोनेशन कैसे हो रहा है ?

वैक्सीन डोनेशन कैसे हो रहा है ?

पंजाब सरकार सभी सक्षम डोनरों से जरूरतमंदों को वैक्सीन की डोज देने के लिए दान में रकम देने की गुजारिश कर रही है। मसलन, कोई भी डोनर चंडीगढ़ के सेक्टर-17 के एक एचडीएफसी बैंक अकाउंट में दान की रकम डाल सकता है। इसके लिए विभिन्न जिलों के लिए वहां के डिप्टी कमिश्नर से जुड़ा एक अपना ऑनलाइन लिंक उपलब्ध है। जैसे कि मोहाली के डीसी गिरिश दयालन इसके लिए sasnagar.nic.in/वैक्सीनेशन लिंक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस लिंक पर दान देने वाले और उसके बदले जिसको वैक्सीन लगाने के लिए रकम दान की जा रही है, उसकी सारे डिटेल दी जाती है।

वैक्सीनेशन के लिए दान में कितनी रकम निर्धारित है ?

वैक्सीनेशन के लिए दान में कितनी रकम निर्धारित है ?

पंजाब में फिलहाल यह व्यवस्था सिर्फ कोवैक्सिन के लिए शुरू की गई है। गौरतलब है कि राज्य सरकारों को भारत बायोटेक कोवैक्सिन की दो डोज 430 रुपये में उपलब्ध करा रही है। लेकिन, इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक वैक्सीन डोनेशन की व्यवस्था में दानकर्ता को एक व्यक्ति को कोवैक्सिन की सिंगल डोज दिलाने के लिए 430 रुपये बतौर दान जमा करना है। यहां बता दें कि प्राइवेट अस्पतालों को कोवैक्सिन की सिंगल डोज के लिए 1,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं।

सिर्फ कोवैक्सिन के लिए दान क्यों मांग रही है पंजाब सरकार ?

सिर्फ कोवैक्सिन के लिए दान क्यों मांग रही है पंजाब सरकार ?

कोवैक्सिन की दो डोज के बीच अंतर सिर्फ 4 हफ्तों या 28 दिनों का है। इसीलिए राज्य सरकार इतने कम समय में दो डोज की भुगतान में अपना बोझ कुछ हल्का करना चाहती है। हालांकि, वैक्सीनेशन के नोडल ऑफिसर विकास गर्ग के मुताबिक, '3 महीने का रिकॉर्ड मेंटेन करना मुश्किल है। 4 हफ्ते का रिकॉर्ड रखना आसान है और कोवैक्सिन का विंडो पीरियड सिर्फ 4 हफ्तों का ही होता है।' जबकि, कोविशील्ड के लिए फिलहाल यह अंतर 12 से 16 हफ्तों का रखा गया है।

कौन कर रहे हैं वैक्सीन डोनेशन और किन्हें मिल रहा है फायदा ?

कौन कर रहे हैं वैक्सीन डोनेशन और किन्हें मिल रहा है फायदा ?

पंजाब सरकार का कहना है कि इस स्कीम को अच्छी कामयाबी मिल रही है। गर्ग कहते हैं, 'हमारे पास कई सारे उद्योगपति आ रहे हैं और अपने मजदूरों और दूसरे कर्मचारियों की वैक्सीन के लिए पैसे दान दे रहे हैं। गांवों में भी वैक्सीनेशन में तेजी आ गई है, क्योंकि कई उद्योगपति अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत वैक्सीन डोनेट कर रहे हैं। उनके मुताबिक क्योंकि यह व्यवस्था 4 मई से शुरू की गई है, इसलिए वो उम्मीद कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग सामने आएंगे। '

दान में मिली वैक्सीन कहां लगाई जा रही है?

दान में मिली वैक्सीन कहां लगाई जा रही है?

दान में मिली वैक्सीन सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर उपलब्ध है, लेकिन अब राज्य सरकार इसे निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध करवाने की तैयारी में है, ताकि लोग वहां जाकर भी मुफ्त में कोविड-19 के टीके लगवा सकते हैं। मोहाली के डीसी और उनके पांच सहयोगियों ने इसकी शुरुआत करके इस योजना में बढ़त बना रखी है। ये पैसों वालों से अपील कर रहे हैं कि वह पूरी गांव के लिए वैक्सीन डोनेट करें, ताकि टीकाकरण अभियान रफ्तार पकड़ सके। मसलन, मसोल गांव की पूरी आबादी को 1.78 लाख की दान में मिली रकम से वैक्सीनेशन कर दिया गया है। अभी तक सिर्फ मोहाली जिला ही इस डोनेशन ड्राइव से 40 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटा चुका है।

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