पंजाब में इन तीन दिग्गज नेताओं की वजह से हो सकते हैं उपचुनाव, जानिए क्या है पूरा मामला ?
पंजाब में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद प्रेदेश में लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के आसार दिख रहे हैं।
चंडीगढ़, 3 मार्च, 2022। पंजाब में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद प्रेदेश में लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के आसार दिख रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल फिरोजपुर से सांसद हैं विधानसभा चुनाव में उन्होंने जलालाबाद सीट से चुनावी बिगुल फूंका है । वहीं आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता भगवंत मान संगरूर से सांसद हैं उन्होंने धुरी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी दांव खेला है। इसके अलावा कांग्रेस की तरफ़ से चरणजीत सिंह चन्नी ने दो विधानसभा सीटों चमकौर साहिब और भदौड़ से किस्मत आजमाई है। ऐसे में अगर वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज करते हैं तो एक सीट पर उपचुनाव होगा। ऐसे ही हालात सुखबीर सिंह बादल और भगवंत मान के भी हैं अगर वह जीत दर्ज करते हैं तो उनके लोकसभा सीट पर उपचुनाव होगा।

संगरूर लोकसभा सीट पर हो सकता है उपचुनाव
सियासी जानकारों की मानें तो अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र की सीट खाली होती है तो छह महीने के अंदर चुनाव आयोग को उन क्षेत्रों में उपचुनाव कराना जरूरी होता है। कुछ ख़ास वजह से ही उपचुनाव के नियम में बदलाव या उपचुनाव के लिए समय बढ़ाया जा सकता है। चुनाव में इन दिग्गज नेताओं के किन ख़ूबियों और ख़ामियों को देखते हुए मतदाताओं ने वोट किया होगा यह अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है, 10 मार्च को सभी स्थिती साफ़ हो जाएगी। आईए जानते हैं इन नेताओं के पिछले कार्यकाल में क्या-क्या इनकी ख़ूबियां और खामिया रही हैं। आम आदमी पार्टी की तरफ़ से भगवंत मान सीएम उम्मीदवार हैं, वह धुरी विधानसभा सीट से अपनी क़िस्मत आजमा रहे हैं। पंजाब के युवा उन्हें ज़्यादा पसंद करते हैं। अपने सियासी सफर में उन पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। उनकी गिनती पंजाब के ईमानदार नेताओं में आती है। अगर भगवंत मान जीत दर्ज करते हैं तो संगरूर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो सकता है।

एक विधानसभा सीट पर हो सकता है उपचुनाव
कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम उम्मीदवार हैं, वह इस बार पंजाब की दो विधानसभा सीटों से चुनावी मैदान में दांव आजमा रहे हैं। चमकौर साहिब विधानसभा सीट उनकी परंपरागत सीट रही है, इसके साथ ही वह भदौड़ सीट से भी किस्मत आज़मा रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री बनाए गए। अपने 111 दिनों के कार्यकाल में उन्होंने पंजाब की जनता के साथ-साथ दलित समुदाय में अपनी पकड़ काफ़ी मजबूत की है। वहीं अपने कार्यकाल के दौरान जनता से किए वादे को अमलीजामा पहनाना उन्हें सियासी फ़ायदा पहुंचा सकता है। इसके साथ ही चमकौर साहिब से लगातार तीन बार विधायक चुना जाना उनके लिए प्लस प्वॉइंट साबित हो सकता है। अगर चरणजीत सिंह चन्नी जीत दर्ज करते हैं तो दो में से एक विधानसभा सीट पर होगा उपचुनाव।

फिरोजपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के आसार
शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाजवादी पार्टी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सुखबीर सिंह बादल हैं। वह जलालाबाद विधानसभा सीट से चुनावी रण में उतरे हैं। पंजाब के दिग्गज नेताओं में इनका नाम शुमार किया जाता है। जानकारो की मानें तो उनकी छवि एक सुलझे हुए नेता की है, वह चुनावी रणनीति में एक कुशल प्रबंधक हैँ। सुखबीर सिंह बादल ने अपनी सियासी सफ़र आज तक कभी भी मात नहीं खाई है। पंजाब में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने का फ़ैसला उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। इसी के साथ ही टिकट बंटवारे में संतुलन के साथ उम्मीदवार उतारना और टिकट बंटवारे के बाद बग़ावत नहीं होना भी उन्हें सियासी फ़ायदा पहुंचा सकता है। वह जीत दर्ज करते हैं तो फिरोजपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव होगा।
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