मान और केजरीवाल के बीच हुए 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' पर फंस सकता है पेंच, जानिए क्या है पूरा मामला

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद नए प्रयोगों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कुठ दिनों पहले पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' भी किया था।

चंडीगढ़,4 मई 2022। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद नए प्रयोगों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कुछ दिनों पहले पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' भी किया था। जो कि अब कानूनी पेंच की वजह से फंस सकता है। 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' रद्द करवाने के लिए पिछले दिनों पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित से मुलाक़ात की थी। उन्होंने दिल्ली के साथ 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' को रद्द करने के साथ ही राज्य में बिगड़ रही कानून और व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए दो ज्ञापन भी सौंपा।

'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' रद्द करवाने की मांग

'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' रद्द करवाने की मांग

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग और नेता विपक्ष बाजवा ने कहा कि गवर्नर ने शिष्टमंडल को बताया कि वह सरकार की कार्यप्रणाली में दखल नहीं देते, लेकिन यदि सविधान का किसी तरह से उल्लंघन होता है, तो वह जरूरी कदम उठाएंगे। ज्ञापन में कहा गया है कि पंजाब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की सरकारों के मध्य संबंधित मुख्यमंत्रियों भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के द्वारा हस्ताक्षर किया गया 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' पूरी तरह से गैर कानूनी और निराधार है, क्योंकि इस पर हस्ताक्षर करने वाले दोनों अथॉरिटीज के पास संविधान के अनुसार मंत्रिमंडल में विचार के बगैर और पंजाब राज्य के राज्यपाल सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर की मंजूरी के बगैर समझौता करने की कोई ताकत नहीं है। ऐसे में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच अपने स्तर पर किया गया समझौता कानूनी रूप से जायज नहीं ठहराया जा सकता।

धारा 154 के तहत CM ने ग़ैर कानूनी काम किया है- वड़िंग

धारा 154 के तहत CM ने ग़ैर कानूनी काम किया है- वड़िंग

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने संविधान की धारा 154 के तहत यह गैरकानूनी कार्य किया है, जिसमें कहा गया है कि राज्य की कार्यकारी ताकत राज्यपाल में निहित है और उनके द्वारा सीधे या सबऑर्डिनेट अधिकारियों के जरिए संविधान के तहत इसे इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह, ज्ञापन ने 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' के कानूनी आधार को चुनौती देते कई कानूनों का जिक्र किया गया है। इस तरह दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने का कोई अधिकार नहीं है जिस संबंध में ज्ञापन में बताया गया है कि भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से 28 मार्च, 2021 को जारी अधिसूचना के जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार के कानून, 1991 में संशोधन किया गया है, जिसमें सब-सेक्शन-3 भी जोड़ा गया है।

पंजाब में अपराधियों को क़ानून का कोई डर नहीं- वड़िंग

पंजाब में अपराधियों को क़ानून का कोई डर नहीं- वड़िंग

दिल्ली की सरकार के कानून में 1991 हुए संशोधन के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास एनसीटी दिल्ली की सरकार के स्तर पर किसी भी एग्रीमेंट या मामले पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं है। जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार का अर्थ दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर है। जिसके चलते प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की गई है कि वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पंजाब कांग्रेस विधायक दल की ओर से आपको उपरोक्त गैरकानूनी 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' को रद्द करने हेतु दखल देने की अपील करते हैं। एक अन्य ज्ञापन में राज्यपाल का ध्यान पंजाब में बिगड़ रही कानून और व्यवस्था की स्थिति की ओर आकर्षित किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हत्या, लूट और डकैती रोजमर्रा की बात बन चुके हैं। अपराधी आजाद घूम रहे हैं और उन्हें कानून का कोई डर नहीं।

मान सरकार को राज्य की स्थिति का कोई ज्ञान नहीं- वड़िंग

मान सरकार को राज्य की स्थिति का कोई ज्ञान नहीं- वड़िंग

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को राज्य की स्थिति का कोई ज्ञान नहीं। वह कहीं और व्यस्त हैं व उन्हें हालातों की कोई चिंता नहीं। जिन्होंने ज्ञापन में 29 अप्रैल को पटियाला में बनी अराजकता की स्थिति का जिक्र किया। जहां लोगों के दो समूह खुली तलवारों और अन्य हथियारों के साथ आमने-सामने हो गए थे। एक धार्मिक स्थल को घेर लिया गया था। यह सब अथॉरिटीज की लापरवाही के चलते हुआ था बावजूद इसके कि राज्य सरकार को पहले ही खुफिया जानकारी मिल चुकी थी कि शहर में लोगों के दो समूहों के बीच हालात बिगड़ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कहा कि कुछ अधिकारियों को बदलना बहुत छोटा और देरी से उठाया गया कदम था, जो सरकार की ओर से अपना चेहरा छिपाने के लिए लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश थी।

पंजाब सरकार कानून व्यवस्था क़ायम करने में नाकाम

पंजाब सरकार कानून व्यवस्था क़ायम करने में नाकाम

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आप सरकार की ओर से पुलिस के दुरुपयोग को लेकर भी राज्यपाल को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पुलिस का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने हेतु दुरुपयोग किया जा रहा है और नामी कवि डॉ कुमार विश्वास व प्रमुख कांग्रेसी नेता श्रीमती अलका लांबा पर दर्ज किया गया केस मात्र एक उदाहरण है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि आप राज्य के हितों की रक्षा और इसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं। यह महत्वपूर्ण है कि लोगों में कानून के शासन के प्रति विश्वास पुनः बहाल किया जाए, जो भगवंत मान के नेतृत्व में यह सरकार करने में नाकाम रही है। शिष्टमंडल में प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुंदर शाम अरोड़ा, महासचिव कैप्टन संदीप संधू और विधायक दल के उप नेता राजकुमार चब्बेवाल भी मौजूद रहे।

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