'पत्नी की जानकारी के बिना फोन पर बातचीत रिकॉर्ड करना उसकी निजता का हनन'
चंडीगढ़, 13 दिसंबर। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी की टेलीफोन पर बातचीत को उसकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड करना उसकी निजता का उल्लंघन है। बता दें कि न्यायमूर्ति लिसा गिल की अदालत ने पिछले महीने बठिंडा फैमिली कोर्ट के 2020 के आदेश के खिलाफ महिला द्वारा दायर याचिका पर अपना अहम फैसला सुनाया है। बठिंडा फैमिली कोर्ट ने महिला के पति को उसके और उसकी पत्नी के बीच रिकॉर्ड की गई बातचीत से संबंधित सीडी को पेश करने की अनुमति दी थी, हालांकि कोर्ट ने कहा था कि यह रिकॉर्डिंग असली होनी चाहिए।

फोन कॉल रिकॉर्ड करना नितजा का हनन
बठिंडा फैमिली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया, जहां से अब उसे बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने कहा, 'पत्नी की जानकारी के बिना फोन पर बातचीत को रिकॉर्ड करना उसकी निजता का स्पष्ट उल्लंघन है।' इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा कि यह नहीं कहा या पता लगाया जा सकता है कि जिन परिस्थितियों में बातचीत हुई थी, या किस प्रतिक्रिया के लिए बातचीत को रिकॉर्ड किया गया। क्योंकि यह स्पष्ट है कि इन वार्तालापों को अनिवार्य रूप से एक व्यक्ति द्वारा गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया होगा।

4 साल पुराना है मामला
बता दें कि पति-पत्नी के बीच ये कानूनी लड़ाई 4 साल पुरानी है। शख्स ने साल 2017 में अपनी पत्नी से तलाक मांगते हुए एक याचिका दायर की थी। उनकी शादी 2009 में हुई थी और दंपति की एक बेटी है। कोर्ट में जिरह के दौरान, पति द्वारा जुलाई, 2019 में एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें मोबाइल फोन के मेमोरी कार्ड या चिप में रिकॉर्ड की गई सीडी और बातचीत के टेप के साथ एग्जामिनेशन-इन-चीफ के माध्यम से अपना पूरक हलफनामा जमा करने की अनुमति मांगी गई थी।

सबूत के तौर पर पति ने पेश की रिकॉर्डिंग
इस मामले पर सुनवाई कर रही बठिंडा फैमिली कोर्ट ने 2020 में पति को सीडी को सही होने की शर्त के अधीन साबित करने की अनुमति दी। कोर्ट ने उस बातचीत को आधार बनाया था। इस मामले में यह भी देखा कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 और 20 को ध्यान में रखते हुए पति द्वारा पेश किए गए सबूत कार्यवाही पर लागू नहीं थे। इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि पति के नेतृत्व में मांगा गया सबूत पूरी तरह से दलीलों से परे है, इसलिए, पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

महिला ने कोर्ट में दिया ये तर्क
महिला के वकील ने कहा कहा कि वाद-विवाद ऐसी किसी भी बातचीत का उल्लेख नहीं करते हैं जिन्हें साबित करने की मांग की जाती है। इसलिए, इस सबूत को गलत तरीके से स्वीकार कर लिया गया है। इसके अलावा, उक्त सीडी पत्नी की निजता का एक स्पष्ट उल्लंघन और हर तरह से हमला है। इस प्रकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, क्योंकि बातचीत को याचिकाकर्ता की सहमति और बिना जानकारी के रिकॉर्ड किया गया है।
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