पंजाब में बिना CM चेहरे के विधानसभा चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, जानिए क्या है पार्टी आलाकमान की प्लानिंग ?
विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान की वजह पार्टी में दरार पड़ गई।
चंडीगढ़, 27 दिसंबर 2021। विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान की वजह पार्टी में दरार पड़ गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देते हुए अपनी सियासी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बना ली। वहीं कैप्टन के इस्तीफ़ा देने के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने तो ऐसा लग रहा था कि पार्टी में सब कुछ ठीक हो गया है। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बन्ने के बाद भी आज तक पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं हुआ है। इसका ही नतीजा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के ही चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ने की ज़रूरत क्यों पड़ी ? सियासी जानकारों के मुताबिक कांग्रेस ने पंजाब में बिना सीएम चेहरे का चुनाव लड़ने का मन इसलिए बनाया है ताकि पार्टी में गुटबाज़ी पर लगाम लगाया जा सके।

कांग्रेस ने खेला मास्टर स्ट्रोक
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए पंजाब में मुख्यमंत्री की कमान चरणजीत सिंह चन्नी को सौंप दी। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह फ़ैसला लिया था। लेकिन चन्नी के मुख्यमंत्री बन्ने के बाद भी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह के तेवर ढीले नहीं हुए। सिद्धू जिस तरह से कैप्टन को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे, ठीक वैसे ही चन्नी के सीएम बन्ने के बाद भी अपने ही सरकार पर निशाना साधते रहे। सियासी गलियारों में चर्चाएं ज़ोरों पर हैं कि सिद्धू सीएम पद के दावेदार हैं। अगर कांग्रेस आलाकमान सीएम पद के दावेदार की घोषणा कर देती तो इससे पार्टी चन्नी गुट और सिद्धू गुट में बंट जाती। इसलिए बिना सीएम पद के दावेदार के ही चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया है।

सिद्धू की वजह से हुआ नुकसान
पंजाब कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर की वजह से पहले ही काफ़ी नुकसान झेल चुकी है। इसलिए अब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस पंजाब में किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करते हुए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस आलाकमान की तरफ़ से लिये गए फ़ैसले से यह साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि पार्टी सिद्धू और चन्नी के मतभेद की वजह से चुनावी मैदान में अपना जनाधार नहीं खोना चाहती है। विधानसभा चुनाव होने तक दोनों नेताओं को एक ट्रैक पर रखना चाहती है। क्योंकि सिद्धू ने हाल ही एक बयान देते हुए कहा था कि कई ऐसे हैं जो मेरे खिलाफ साजिश रच रहे हैं। पहले भी दो सीएम ने मुझे खत्म करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने सत्ता खो दी। अब दूसरा वही कर रहा है और वह भी गायब हो जाएगा।

सिद्धू के मुताबिक लिए जा रहे फ़ैसले
कांग्रेस आलाकमान पर सिद्धू के तेवर का इतना असर है कि ज़्यादातर फ़ैसले उनके (सिद्धू) के मुताबिक ही लिए जा रहे हैं। अभी जो कांग्रेस आलाकमान ने एक परिवार में एक ही टिकट देने वाला नियम लागू करने जा रही है। यह सुझाव भी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने ही दिया है। अगर यह नियम लागू होता है तो कहीं न कही सीएम चन्नी को बड़ा झटका लगने वाला है। क्योंकि सीएम चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह भी विधानसभा चुनाव में दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। वह बस्सी पठाना से चुनावी रण में उतरने के लिए पुरज़ोर मेहनत कर रहे हैं। सीएम चन्नी के अलावा भी कई नेता परिवार के सदस्य को टिकट दिलवाना चाहते थे। इनमें कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत, सांसद प्रताप सिंह बाजवा, राजिंदर कौर भट्टल और ब्रह्म मोहिंद्रा का नाम शामिल है।

चन्नी को साथ लेकर चल रही कांग्रेस
कांग्रेस आलाकमान विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी नाराज़ नहीं करना चाहती है। इसलिए कांग्रेस आलाकमान ने सीएम चेहरा के बिना चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया है। वहीं पंजाब कांग्रेस ने यह भी साफ़ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। पंजाब में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू हमेशा से इसका विरोध करते रहे हैं। इसी कड़ी में 3 जनवरी को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पंजाब के मोगा में रैली करने आ रहे हैं। क़यास लगाए जा रहे हैं राहुल गांधी का यह दौरा सीएम चन्नी और सिद्धू के बीच सामंजस्य बैठाने की एक पहल होगी, ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट रहें।
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