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सिद्धू के इस्तीफ़े के बाद पंजाब में 3 गुटों में बंटी कांग्रेस, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

पंजाब विधानसभा के दिन नज़दीक आ रहे हैं लेकिन पंजाब कांग्रेस चुनावी तैयारियों से दूर होकर अंदरूनी कलह सुलझाने में लगी हुई है। कांग्रेस आलाकमान ने कभी नहीं सोचा था कि पंजाब में अचानक ऐसे हालात पैदां हो जाएंगे।

चंडीगढ़, सितंबर 29। 2021। पंजाब विधानसभा के दिन नज़दीक आ रहे हैं लेकिन पंजाब कांग्रेस चुनावी तैयारियों से दूर होकर अंदरूनी कलह सुलझाने में लगी हुई है। कांग्रेस आलाकमान ने कभी नहीं सोचा था कि पंजाब में अचानक ऐसे हालात पैदां हो जाएंगे। पंजाब में कांग्रेस अब तीन गुटों बंट चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का एक गुट है तो दूसरा गुट नवजोत सिंह सिद्धू का वहीं तीसरा गुट नवनियुक्त सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का है। अचानक पंजाब कांग्रेस में इतनी ज़्यादे गुटबाज़ी होने लगेगी पार्टी हाइकमान ने कभी सोचा भी नहीं था।

कांग्रेस बड़ी गुटबाज़ी का शिकार

कांग्रेस बड़ी गुटबाज़ी का शिकार

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी के सीएण बन्ने को राजनीतिक विष्लेशक मास्टर स्ट्रोक की तरह देख रहे थे। क्योंकि पंजाब में 32 फिसदी दलित मतदाओं की आबादी है। ज़्यादातर सियासी पार्टियां इन्हीं वर्ग को साधने की कोशिश में लगा हुआ था। वहीं कांग्रेस ने दलित चेहरे को सीएम बनाकर भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी जैसी सियासी पार्टियों के एक मुद्दे को लपकते हुए सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुट गई। क्योंकि ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियां दलित चुनावी प्रचार में दलित कार्ड का इस्तेमाल कर वोट बैंक साधने की कोशिश में जुटे हुए थे। चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बन्ने के बाद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता इसे सराहनीय कदम बता रहे थे। लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफ़े से पंजाब कांग्रेस में सरगर्मियां बढ़ गईं, साथ ही कांग्रेस बड़ी गुटबाज़ी का शिकार हो गई है।

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    सिद्धू ने दबाव बनाने के लिए दिया इस्तीफ़ा

    सिद्धू ने दबाव बनाने के लिए दिया इस्तीफ़ा

    पंजाब के राजनीतिक विश्लेषक की मानें तो फिलहाल नवजोत सिंह सिद्धू खलनायक के तौर पर हैं। वहीं नवनियुक्त सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के बारे में सियासी गलियारों में यही हलचल है कि वह रबर स्टांप सीएम की तरह काम नहीं करना चाहते। इसलिए सीएम चन्नी कांग्रेस आलाकमान को विश्वास में लेकर स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू की उनके सामने कुछ भी नहीं चल रही है। इसलिए नवजोत सिंह सिद्धू ने दबाव बनाने के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा देने की चाल चली है।

    कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व मज़ाक का पात्र

    कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व मज़ाक का पात्र

    पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफा देने के बाद कहा कि यह सिर्फ क्रिकेट नहीं है। इस पूरे प्रकरण में पंजाब में कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा के लिए ही पार्टी में बदलाव किए गए हैं। वहीं उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू पर तंज कसते हुए कहा कि कोई भी नवजोत सिंह सिद्धू के इस फ़ैसले को सही नहीं ठहरा सकता। वहीं सुनील जाखड़ ने कहा कि पार्टी की शीर्ष नेतृत्व भी नवजोत सिंह सिद्धू से राजनीतिक समझ, संतुलन, विश्वास कायम रखने की क्षमता जैसे सवाल कर रही है। उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू के इस तरह इस्तीफ़ा देने से कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व मज़ाक का पात्र बन रहा है।

    बयानबाज़ी कर आलाकमान को डरा रहे कैप्टन

    बयानबाज़ी कर आलाकमान को डरा रहे कैप्टन

    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भले ही पंजाब के सीएम पद से इस्तीफ़ा दे दिया है लेकिन वह लगातार अपनी बयानबाज़ी से कांग्रेस आलाकमान और नवजोत सिंह सिद्धू को भी डरा रहे हैं। ग़ौरतलब है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ की आलाकमान और सिद्धू के ख़िलाफ़ होने में पंजाब कांग्रेस के कुछ सांसद, विधायक, कार्यकर्ता के साथ कैप्टन सरकार के वक़्त में मंत्री रहे कुछ चेहरे भी साथ हैं। राजनीतिक गलियारों में तो यह भी चर्चा है कि एक तरफ कैप्टन और दूसरी तरफ बची हुई कांग्रेस है। कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर नई पार्टी बना लेंगे तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भले ही उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा लेकिन कांग्रेस के हाथ से फिसल कर सत्ता किसी और राजनीतिक दल के पास चली जाएगी। वहीं सूत्रों की मानें तो नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, कांग्रेस पार्टी के प्रभारी हरीश रावत और कांग्रेस आलाकमान समझाने में जुटा हुआ है।

    कांग्रेसी दे रहे विपक्ष को मौक़ा

    कांग्रेसी दे रहे विपक्ष को मौक़ा

    चुनावी रणनीतिकारों की मानें तो पंजाब कांग्रेस में बना बनाया खेल बिगड़ गया है। आगामी विधानसभा चुनाव तक सब कुछ ठीक हो पाएगा यह कहना मुश्किल है। पंजाब में कांग्रेस पार्टी को पहले गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। क्योंकि आए दिन कांग्रेस की खेमेबाज़ी की वजह से विपक्षी दलों को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौक़ा मिल जाता है। यह हालात कांग्रेस नताओं ने ख़ुद पैदा की है। पिछले कुछ साल में कुछ राज्यों में हुई घटनाओं से भी कांग्रेसी सबक नहीं ले रहे हैं। अभी पार्टी को ज़रूरत है कि एकजुट होकर विधानसभा चुनाव पर फोकस करे अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो पंजाब में कांग्रेस की ज़मीन खिसकती नज़र आ रही है।


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