तीन नेताओं को साथ लेकर चलने में बिगड़ सकता है कांग्रेस का खेल, समझिए सियासी गणित
पंजाब कांग्रेस विधानसभा चुनाव में नेता और कार्यकर्ताओं को एक साथ लेकर चलने की कोशिश में हैं लेकिन पार्टी में गुटबाज़ी बढ़ती ही जा रही है।
चंडीगढ़, 7 जनवरी 2022। पंजाब कांग्रेस विधानसभा चुनाव में नेता और कार्यकर्ताओं को एक साथ लेकर चलने की कोशिश में हैं लेकिन पार्टी में गुटबाज़ी बढ़ती ही जा रही है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अहम किरदार निभा रहे हैं। वहीं कांग्रेस आलाकमान सीएम चन्नी, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू और कांग्रेस के कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ को साथ लेकर चलता चाहती है। सियासी जानकारों की मानें तो तीनों नेताओं को साथ लेकर चलने की चक्कर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है।

सीएम उम्मीदवार घोषित करने की मांग
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पहले भी यह बयान दे चुके हैं कि बिना दूल्हा और दुल्हन के बारात नहीं हो सकती। सिद्धू के इस बयान से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई थी कि सिद्धू ख़ुद को सीएम पद का दावेदार घोषित करवाने के लिए इस तरह की बयानबाज़ी कर रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी लोग चाहते हैं कि सिद्धू को सीएम का चेहरा घोषित कर दिया जाए। कांग्रेस ने साल 2017 में प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनावों में सीएम का चेहरा घोषित किया था। इस बार प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू हैं उन्हें भी सीएम उम्मीदवार घोषित किया जाए। सिद्धू के समर्थकों का कहना है बेअदबी मामले सिद्धू अच्छा काम कर रहे हैं, विक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एफआईआर के मुद्दे को उठा कर उन्होंने साबित कर दिया है कि वह पंजाब के हित में सोचते हैं।

चुनाव से पहले रिस्क नहीं लेना चाहती कांग्रेस
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू लगातार मांग कर रहे हैं कि सीएम पद के दावेदार की घोषणा की जाए। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव के बाद सीएम पद की घोषणा करने की बात कही है, पार्टी आलाकमान का मानना है कि विधायकों के समर्थन के मुताबिक सीएम चुनने में आसानी होगी। सियासी जानकारों के मुताबिक कांग्रेस अलाकमान इसलिए सीएम पद के दावेदार की घोषणा नहीं करना चाहती है। क्योंकि पार्टी में गुटबाज़ी नहीं हो और जातीय समीकरण बना रहे। क्योंकि चरणजीत सिंह चन्नी दलित वोट बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू सिख मतदाताओं का नेतृत्व कर रहे हैं। 38 फ़ीसदी हिंदू वोट बैंक का नेतृत्व सुनील जाखड़ कर रहे हैं। ऐसे किसी एक को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर पार्टी में गुटबाज़ी हावी हो सकती है। कांग्रेस फिलहाल किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है।

कांग्रेस के लिए चुनौती बने अपने ही नेता
नवजोत सिंह सिद्धू अपने चुनावी दौरे के दौरान कुछ विधानसभा सीटों पर बिना किसी से चर्चा किए हुए उम्मीदवारों को टिकट दिलाने का भरोसा भी करते हुए नज़र आ रहे हैं। सिद्धू पूरी प्लानिंग के तहत सीएम चन्नी पर सवालिया निशान लगाते आ रहे है ताकि वह खुद को उनसे (चन्नी) ज्यादा काबिल बता सके। खुद को सीएम चेहरा घोषित कराने की कोशिश कर रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ज़्यादा से ज़्यादा टिकट अपने क़रीबी उम्मीदवारों को दिलाने की कोशिश में ताकि चुनाव के बाद उन्हें ज़्यादा विधायकों का समर्थन ले कर खुद को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकें। बतौर प्रदेश अध्यक्ष वह अपने क़रीबी उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए आलाकमान पर दबाव भी बना रहे हैं। हालांकि आलाकमान ने यह साफ़ कर दिया है पार्टी जीत के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन करेगी। सियासी सलाहकारों की मानें तो पंजाब कांग्रेस को तीनों नेताओं को साथ लेकर चलना चुनाव में नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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