पंजाब: PM मोदी की रैली क्यों हुई रद्द, कैसे हुई प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक ? पढ़िए इनसाइड स्टोरी
पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टिंयां चुनावी अभियान तेज़ कर रही हैं। इसी क्रम में पंजाब के फिरोज़पुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली होने वाली थी लेकिन रद्द करना पड़ा।
चंडीगढ़, 6 जनवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी सियासी पार्टिंयां चुनावी अभियान तेज़ कर रही हैं। इसी क्रम में पंजाब के फिरोज़पुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली होने वाली थी लेकिन रद्द करना पड़ा। मौसम खराब होने की वजह से पीएम मोदी हवाई मार्ग के बजाए सड़क मार्ग से रैली स्थल के लिए रवाना हुए। पीएम मोदी का काफिला भटिंडा एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से निकला एक फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री का काफिला फंस गया, क्योंकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रोड जाम कर दिया था। पीएम मोदी को रैली स्थल से पहले हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक पहुंचना था, लेकिन वह नहीं पहुंच सके और उनकी रैली को रद्द करना पड़ा। पीएम मोदी की रैली रद्द होने के बाद से तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

रैली रद्द होने के बाद चढ़ा सियासी पारा
पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली रद्द होने के बाद सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक हुई जिसकी वजह से रैली को रद्द करना पड़ा। सूत्रों की मानें तो पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी जानबूझकर काफिले के साथ नहीं गए थे। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के साथ चाय पी रहे थे। अब सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक कैसे हुई। फिरोज़पुर में जिस फ़्लाईओवर के नीचे से पीएम मोदी का काफिला गुज़रना था। वहां प्रदर्शनकारियों की भीड़ कैसे इकट्ठा हुई। पीएम के काफिले के आने से पहले भीड़ को हटाया क्यों नहीं गया या फिर उनकी सुरक्षा में तैनात अधिकारियों को इस बात की सूचना क्यों नहीं दी गई।

रूठ बाधित होने की सूचना क्यों नही दी गई ?
फिरोज़पुर के फ्लाईओवर के नीचे प्रदर्शनकारियों की भीड़ हटाने के बजाए पुलिसकर्मी चाय पीने मे मशगूल थे। वहीं सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब पीएम मोदी के काफिले का रूठ बाधित था तो पुलिसवाले ने अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी। सूत्रों के मुताबिक पंजाब के डीजीपी और मुख्य सचिव की गाड़ियां रिज़र्व रखी गई थीं इसके बावजूद वह पीएम मोदी के काफिले में शामिल नहीं हुए। सियासी जानकारों की मानें तो जिस राज्य में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम होता है, उस राज्य मुख्यमंत्री के साथ-साथ, मुख्य सचिव और डीजीपी खुद प्रधानमंत्री को रिसीव कर उनके काफिले के साथ मौजूद रहते हैं। लेकिन पंजाब में प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री ने रिसीव नहीं किया और ना ही उनके काफिले के साथ राज्य के दो बड़े अफसर मुख्य सचिव और डीजीपी मोजूद रहे।

पंजाब सरकार की कार्यशैली पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी के नेता अब पंजाब सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब के आलाअधिकारियों को क्या पहले से पता था कि ऐसा होने वाला है। अगर ऐसा नहीं था तो जब प्रदर्शनकारियों ने रूट बाधित कर रखा था, तो फिर पीएम मोदी के काफिले को इस मार्ग से जाने कैसे दिया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि पीएम मोदी के रूट का प्रदर्शनकारियों को कैसे पता चला। ऐसा लग रहा है जैसे प्रदर्शनकारियों को काफिले की रूट की जानकारी पहले से दी गई थी। वहीं रूट के मामले में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। भारतीय किसान संघ क्रांतिकारी के प्रमुख सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि वह लोग रैली स्थल से 8 किलोमीटर की दूरी पर प्रदर्शन कर रहे थै। उन्हें बिलकुल भी यह पता नहीं था कि पीएम मोदी का काफिला इस रूट से गुज़रेगा। पुलिस वाले ने उन्हें (सुरजीत सिंह फुल) को बोला की इधर से पीएम मोदी का काफिला गुज़रेगा लेकिन उन्होंने इस बात को झूठ समझा। सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि मुझे लगा कि प्रदर्शन खत्म करने के लिए पुलिस वाले झूठ बोल रहे हैं। पीएम मोदी हवाई मार्ग से रैली स्थल जाएंगे लेकिन अचानक से उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि हम लोग रैली स्थल से 8 किलोमीटर दूरी पर प्रदर्शन कर रहे थे। पीएम मोदी के कार्यक्रम में बदलाव की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए।

कौन तय करता है पीएम का रूट ?
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम जिस राज्य में भी होता है, उनका रूट एसपीजी, केंद्रीय खुफिया एजेंसियां और राज्य स्थानीय पुलिस-प्रशासन मिलकर तैय करते हैं। कोई एक विभाग रूट तय नहीं करता है। रूट फ़ाइनल करने का फ़ैसला एसजीपीसी के हाथों में होता है। जिस राज्य में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम होता है। वहां तय किए गए रूट पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्थानीय पुलिस की होती है। तय किए गए रूट में कोई भी परेशानी या रुकावट होती है, तो उसे स्थानीय प्रशासन हल करती है। अब सवाल यह है कि प्रदर्शानकारी उस रूट पर अचानक तो नहीं पहुंचे थे। जब वह रूट बाधित हो गया था तो तुरंत इसकी जानकारी खुफिया एजेंसियों को दी जानी चाहिए थी। ताकि सुरक्षा के मद्देनज़र बैकअप रूट से पीएम के काफिले को रवाना करवाया जा सके।
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