कांग्रेस का आरोप, शहीद होने वाले अग्निवीर को सैन्य सम्मान के साथ नहीं दी गई अंतिम विदाई
जम्मू और कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर उपमंडल के मनकोट इलाके में एलओसी के पास में ड्यूटी के दौरान अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत हो गई थी। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को नियंत्रण रेखा के पास सैनिक की गोली लगने से मौत हो गई है। अमृतपाल सिंह की उम्र महज 20 साल थी।
अब अमृतपाल सिंह की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। अमृतपाल का शुक्रवार को गांव कोटली कलां में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दरअसल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि, उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए। इसके अलावा आर्मी की कोई यूनिट तक नहीं आई।

कांग्रेस ने अमृतपाल सिंह के अंतिम संस्कार का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि, पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह अग्निवीर के तौर पर सेना में भर्ती हुए। वो कश्मीर में तैनात थे, 10 अक्टूबर को गोली लगने से वे शहीद हो गए। दुखद ये है कि देश के लिए शहीद होने वाले अमृतपाल जी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई भी नहीं दी गई।
कांग्रेस ने लिखा कि, उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए। इसके अलावा आर्मी की कोई यूनिट तक नहीं आई। यहां तक कि उनके पार्थिव शरीर को भी आर्मी वाहन के बजाए प्राइवेट एंबुलेंस से लाया गया। ये देश के शहीदों का अपमान है।
वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि अमृतपाल सिंह की दोनों बहनों ने उनके पार्थिव शरी को कंधा दिया। पुलिस की टुकड़ी ने सलामी दी और फिर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अमृतपाल सिंह माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। कुछ महीने पहले ही अग्निवीर के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अमृतपाल सिंह के बलिदान पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देश के लिए खास तौर पर परिवार के लिए अपूर्णनीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के साथ गहरी हमदर्दी जाहिर की और कहा कि इस दु:ख की घड़ी में पंजाब सरकार परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीति के मुताबिक पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता दी जाएगी।












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